इंदिरा गांधी हमारी रोल मॉडल शक्ति को नमन, डॉक्टर पुष्प लता अधिवक्ता की कलम से

0
25
Indra-gandhi

उस वक्त पुरुष स्त्री को ताना मार कर कहते थे ” भाई बोल मत इनका राज है अब “।जयललिता, माया ,ममता ,सुषमा, स्त्री पुरुष से बेहतर शासक रही अपवाद छोड़ और बहादुर भी फैसले लेने के मामले में ।जयललिता की अम्मा केंटीन और दहाड़ मारती गश खाती मौत पर भीड़ याद होगी ।मगर इंदु तो इनमें चाँद की तरह थी ।

” तुम हिन्दू मुस्लिम करते हो लो मैं गैर हिन्दू से ही शादी कर लेती हूँ ।तुम बेटा- बेटा करते हो लो मैं बेटा बनकर दिखाती हूँ ।तुम जातिवादी बनते हो लो मैं विजातीय बहु लाती हूँ ।तुम देश- देश करते हो मैं वसुधैव कुटुम्बकम का आदर्श अपना विदेशी रिश्तेदारी बनाती हूँ।तुम स्त्री कमजोर- कमजोर कहते हो मैं तुम्हें आंखें दिखाने वाले देश की रीढ़ तोड़कर दिखाती हूँ ।तुम मुझे गालियाँ बकते हो तुम्हारे ही समुदाय के व्यक्ति के मुख से दुर्गा कही जाती हूँ ।तुम मुझे सत्ता लोलुप कहते हो लो मैं राजनीति में परिवार नियोजन जैसा खतरा उठाती और सबके सम्मुख दो बच्चों का आदर्श स्थापित कर जाती हूँ।

तुम मुझे मारना चाहते हो क्योंकि मैंने तुम्हारी धार्मिक भावनाओं को देशहित में ठेस पहुंचा दी ।गोली सीने पर खाती हूँ ये मैंने अपने मुँह से कभी नहीं कहा मेरी आने वाली पीढ़ियाँ मेरे हमसाये और मेरे देश की बेटियाँ कहेंगी ।मगर मैं उनसे कहूँगी मेरा तो कोई योगदान ही नहीं था पिता नेहरू सा हो तो बेटी इंदिरा सी हो ही जाती है ।आप अपनी बेटियों को नेहरू की तरह पालना ।बेटी बेटे की तरह पलेंगी तो बेटे से बढ़कर होंगी।और उनका वंश भी चलाएंगी।हर व्यक्ति के चरित्र में कुछ न कुछ खामियाँ मिलेंगी मगर नेहरू का ये रूप तो हर बेटी अपने पिता में चाहेगी ।बेटियों से भी चलता है वंश इंदु ये सिद्ध नहीं करके गयी उन्होंने तो पिता के विश्वास की लाज रखी, ये नेहरू ने सिद्ध किया ।अपनी बेटियों को बेटों की तरह पाल बराबर का अधिकार दें फिर देखें क्या बनती है बेटियाँ ।कहा भी है इंसान का स्वभाव सूप की तरह होना चाहिए सार- सार ग्रहण कर थोथा उड़ा दीजिये ।नमन बेटी को ऐसी परवरिश देने वाले को और उस बेटी को भी जिसने पिता की परवरिश सार्थक की।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here