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भोपाल के कृषि वैज्ञानिक बोले- अब लॉक डाउन बढ़ाने का कोई ओचित्य नहीं

शाजी जॉन की कलम से

इंडियन एक्सप्रेस के इस रिपोर्ट में पिछले हफ्ते कोविड-19 से संक्रमित मरीजो के प्रतिशत बताई गई है।
इसको समझने के लिए हम दिनांक 23 मई का उदाहरण लेते है।

23 मई को एक्टिव केसेज की संख्या थी 69597 यानी के वो मरीज जो अभी भी संक्रमित है।इनमें वो मरीज नही है जो ठीक हो चुके है, या जिनकी मौत हो चुकी है। अब ऊपर बताए गए रिपोर्ट के अनुसार ये संक्रमित मरीज का विश्लेषण करते है।
15% हॉस्पिटल में भर्ती है = 10440
2.25% ICU में भर्ती है =1566
1.91% को ऑक्सीजन की जरूरत है= 1329
0.004% को वेंटीलेटर की जरूरत है= 278

इंडिया टुडे के उनके 22 अप्रैल के रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार ने राज्यो और प्राइवेट हॉस्पिटल के साथ मिलकर 395689 बेड की व्यवस्था कोविड के मरीजो के लिए कर रखी थी। इसके अतिरिक्त 40195 ICU बेड और 18828 वेंटीलेटर की व्यवस्था कर रखी थी।

इसका मतलब ये है कि अस्पताल की क्षमता के अनुसार सिर्फ 2.6% मरीज भर्ती है
ICU के क्षमता के अनुसार 3.89 मरीज ही भर्ती है
और उपलब्ध वेंटीलेटर में सिर्फ 1.47 वेंटीलेटर का उपयोग हो रहा है।

क्या आप सोचते है कि कोरोना की स्तिथि बहुत गंभीर है?
क्या मीडिया आपको अधूरी जानकारी देकर डरा नही रहा है?

लॉक डाउन जब मार्च में किया गया था, तब उसका मुख्य उद्देश्य यही था कि अचानक यदि मरीजो की बाढ़ आ जाए तो हमारे अस्पताल उन्हें झेलने में सक्षम नही होंगे, और अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने के लिए लॉक डाउन किया गया था। अब चूंकि अस्पतालों में आवश्यक क्षमता उपलब्ध है, तो लॉक डाउन को आगे बढ़ने का क्या कोई औचित्य है?