देशमध्य प्रदेश

बाबूलाल पटोदी की मुस्कुराहट मन के मवाद को हटाकर घाव को औषधि के गुण से भरेगी : रवि गंगवाल

रवि गंगवाल
आप गौर से देखे । उनके चहरे पर सरलता के साथ कहीं कुछ भी दो टूक है,तो वह उनकी मुस्कुराहट । मुस्कुराहट वह नहीं , कि जो आपको उत्फुल्ल करेगी , बल्कि वह जो आपको भीतर की त्रुटि को , कमजोरी को चुभ जाएगी और मन के मवाद को हटाकर घाव को औषधि के गुण से भरेगी ।

देखा नहीं है पर जाना है , कि सन  1930-40 के बीच प्रजामंडल की राजनीति की भूमिका मै काका प्रमुख अक्षर रहे है । अक्षर ही तो वाक्य में जड़कर सार्थक होता है । वही हुआ भी  है । जीवन के योवन मै काका की सक्रियता का वर्णन उनके कुछ मित्रों ने मुझे सुनाया है । मै अभिभूत हुआ हूँ कि राजनीति मै रहकर अपनी नित्यता को बनाए रखना तो आसन था , किन्तु उस नित्यता से सार्वजनिक स्वरूप के कणो को आने देना अपने आप ही मै उनकी एक सहज सरल विशिष्टता का परिचायक
था । यह राजनीति कुछ इतनी फैली और वे उसमें इतने रम – रच गए की मध्यप्रदेश की विधानसभा के लिए दो बार विधायक चुन लिए गए । वहाँ भी उनकी जन – सेवक स्वरूप अपनी वास्तविकता अथवा “ दो टूक “ बातों के लिए जाना जाता है ।

राजनीति की इस गहमागहमी में काका का सम्पर्क राष्ट्रसन्त आचार्य विद्यानन्द से हुआ ओर यात्री मुड़ गया । राजनीति की पगडंडीया जन पथ में बदल गई । पीछे जो छूट गया है उससे अब न घृणा है और न द्वेष न मोह है । सब कुछ सम है । जीवन अब समाज को समर्पित है समाज मे शिक्षा है स्वास्थ है ओर धर्म है । आप राजमोहल्ला मे देखिये – वैष्णव स्कूल, वैष्णव कॉमर्स कालेज ओर थोड़ा सा हटकर खड़ा है अस्तपाल।

इस सबके योगदान मे काका का योगदान है । छत्रीबाग मे बाल विनय मन्दिर के प्रांगण मे शिशु हाथ आपका स्वागत करें तो समझ लीजिएगा की इन नन्हे – मुन्नों की इस निश्चल श्रद्धा की नींव मे बाबूलाल पाटोदी आपका अभिनन्दन कर रहे है । इस अभिनन्दन मे गर्व है, पर श्रद्धा के साथ। इस स्वागत मे जो आदर्श है , वो काक को समर्पित है । मैं जिस विद्यालय में सेवारत रहा, उसकी बागडोर भी श्री बाबूलाल पाटोदी के हाथ रही । यदि में कहु की शिक्षा, स्वास्थ ओर धर्म इस व्यक्ति को ध्येय बन गया है, तो मैं कोई भूल नही करता।

श्रध्येय काका के जीवन दो प्रसंगों का उल्लेख करना आवश्यक होगा। प्रथम जनवरी 1980 में षष्ठिपूर्ति महोत्सव का आयोजन। इस आयोजन में मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह बतौर मुख्यअतिथि शामिल हुए थे। इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री ने काका के प्रति भावभरे अपने उदगार प्रकट करते हुए कहा था कि मैं पाटोदी को क्या उपहार दे सकता हु ? लेकिन उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए पश्चिमी इंदौर में स्तिथ देवधरम टेकरी जैन समाज को समर्पित करता हूँ ताकि यहाँ एक जैन तीर्थ का निर्माण हो सके ।

इस षष्ठिपूर्ति आयोजन का प्रतिफल आज हमारे समक्ष इंदौर की शान गोम्मटगिरी के रूप में स्थापित है । दूसरा वर्ष 1995 में उनका अमृत महोत्सव का आयोजन जिसमे श्रध्येय मोतीलाल वोरा तत्कालीन राज्यपाल उत्तरप्रदेश बतौर मुख्यअतिथि शामिल हुए थे। यह प्रसंग भी उनके जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।   इस तरह यह यात्री अपने जीवन की समस्त बुलन्दीयो को छूता हुआ 92 वर्ष की उम्र में हम सभी से बिदा हो गया।   इस वर्ष 2020 में उनकी जन्मशताब्दी पर नमन करते हुए कामना करता हू की उनकी सभी स्मृतियां सदा हमारे ह्रदय में विद्यमान रहे ।

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