अरूणाचल को लेकर चीन की टिप्पणी पर भारत ने दिया करारा जवाब, कहा-‘कुछ भी कहो, हकीकत तो …’

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भारत ने चीन के अरूणाचल प्रदेश पर किए गए दावें पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कहा कि ऐसे दावों से वास्तविकता नहीं बदलेगी कि राज्य देश का हिस्सा है। इससे पहले पीएम मोदी ने प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजना का उद्घाटन किया था। जिसपर चीन ने सवाल खड़े किए थे। चीन परंपरागत रूप से शीर्ष भारतीय नेताओं के क्षेत्र के दौरों पर नाराजगी जताता है लेकिन ऐसी प्रतिक्रियाओं को आमतौर पर नई दिल्ली द्वारा नजरअंदाज कर दिया जाता है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल नें कहा कि “हम प्रधानमंत्री की अरुणाचल प्रदेश यात्रा के संबंध में चीनी पक्ष द्वारा की गई टिप्पणियों को अस्वीकार करते हैं। उन्होनें कहा, भारतीय नेता समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश का दौरा करते हैं, जैसे वे भारत के अन्य राज्यों का दौरा करते हैं। “ऐसी यात्राओं या भारत की विकासात्मक परियोजनाओं पर आपत्ति करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा अरुणाचल प्रदेश राज्य भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।

बता दें सोमवार को, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने सेला सुरंग और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन करने के लिए 9 मार्च को अरुणाचल प्रदेश में मोदी की यात्रा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि ज़ंगनान का क्षेत्र चीनी क्षेत्र है और चीनी सरकार ने कभी मान्यता नहीं दी है

उन्होंने तर्क दिया कि भारत को अरुणाचल प्रदेश को मनमाने ढंग से विकसित करने का कोई अधिकार नहीं ह और इस तरह के कदम सीमा प्रश्न को जटिल बना देंगे और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति को बाधित करेंगे।वांग ने यह भी कहा कि चीन भारतीय प्रधान मंत्री की अरुणाचल प्रदेश यात्रा की कड़ी निंदा करता है और दृढ़ता से विरोध करता है।

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर से 825 करोड़ रुपये की लागत से सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा निर्मित सुरंग का रिमोट से उद्घाटन किया। 13,000 फीट से ऊपर स्थित दुनिया की सबसे लंबी ट्विन-लेन सुरंग, हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और तवांग सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास आगे के क्षेत्रों में सैनिकों और उपकरणों की त्वरित तैनाती की अनुमति देगी। हालांकि चीन अपनी हरकतों से कभी बाज नही आता हर बार बेबुनियाद दावा करता रहता है।