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शत्रु की बढ़ती दौलत और भाजपा से अदावत | Increasing Wealth of ‘Shatrughan Sinha’ and Betraying with BJP

Posted on: 18 Apr 2019 17:23 by Surbhi Bhawsar
शत्रु की बढ़ती दौलत और भाजपा से अदावत | Increasing Wealth of ‘Shatrughan Sinha’ and Betraying with BJP

सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव में शत्रुघ्न सिन्हा भारी सुर्खियां बटोर रहे हैं। वैसे तो बतौर फिल्म अभिनेता से नेता बनने तक शत्रुघ्न सिन्हा वैसे ही काफी चर्चित नाम था लेकिन जबसे उन्होंने भाजपा सांसद रहते नरेंद्र मोदी-अमित शाह औऱ भाजपा नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोला और ममता बनर्जी के मंच तक पहुंच गए, तबसे चर्चाएं कुछ ज्यादा ही हो रही है। इसी का नतीजा रहा कि भाजपा ने बिहार की पटना साहिब सीट से उनका टिकट काट दिया।

इसके तुरंत बाद उन्हें कांग्रेस ने अपनाया और उसी सीट से टिकट भी थमा दिया। यह तो हुआ एक पहलू। चर्चाओं का एक और सिरा है जो उनकी तेजी से बढ़ रही संपत्ति पर जाकर ठहरता है। हालांकि अभी उन्होंने पटना साहिब सीट से पर्चा दाखिल नहीं किया है। लिहाजा आज की तारीख में उनकी संपत्ति कितनी है इसका अंदाजा लगाना कठिन है, लेकिन वे देश के उन सांसदों में अव्वल नंबर हैं, जिनकी संपत्ति तेजी से बढ़ रही है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में उनकी ओर से दायर हलफनामों में उनकी संपत्ति का यह अंतर साफ झलका और उन्हें सुर्खियों का पात्र बना दिया? इस सवाल के साथ कि यह कैसे हुआ? एक दशक पहले सिन्हा के पास महज पंद्रह करोड़ रुपए की संपत्ति थी। यह 2014 में यानी सोलहवीं लोकसभा का चुनाव लड़ने के पहले तक बढ़कर सला सौ करोड़ पार कर गई। यानी नौ गुना तक बढ़ गई। इसमें जमीन के साथ आवासीय औऱ व्यवसायिक परिसर भी शुमार हैं।

आंकड़े बयां करते हैं कि पच्चीस करोड़ से ज्यादा की जमीन यानी प्लॉट तो देहरादून, पुणे, मुंबई, वर्ली और मलाड में है। और साठ करोड़ से ज्यादा की व्यवसायिक इमारतें मुंबई, पुणे और पटना में उनके पास है। इतना ही नहीं दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम, पुए में कुल मिलाकर दस आवासीय इमारतें भी उनके नाम हैं, जिनकी कीमत पच्चीस करोड़ रुपए उन्होंने ही आंकी है।

इसके बाद बात करें राजनीति की तो उन्होंने भाजपा को एक झटका और दे डाला। उनकी पत्नी पूनम सिन्हा उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी में शरीक हो गई हैं। उनका लखनऊ सीट से देश के गृह मंत्री राजनाथसिंह को चुनौती देना लगभग तय हो गया है। वे पैदाइशी सिंधी होने के नाते, विवाह पश्चात कायस्थ होने के नाते और सपा-बसपा के दलित-पिछड़े-मुस्लिम वोट बैंक की भागीदार होने के नाते किस तरह राजनाथसिंह से चुनाव लड़ती हैं यह सारा देश देख रहा है।

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