इंदौर। भारतीयों ने अपनी मेहनत, बुद्धि और सनातन मूल्यों के प्रति निष्ठा से संसार में विशिष्ट स्थान बनाने में सफलता पाई है। पिछले अरसे में भारतीय समुदाय का सम्मान और प्रभाव बढ़ा है, लेकिन जिस तरह से भारतीय कम्यूनिटी आगे बढ़ रही है, उसे देखते हुए मैं दावे से कह सकता हूं कि “सर्वश्रेष्ठ अभी आना बाकी है।” यह बात अप्रवासी भारतीय दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों अवार्ड प्राप्त करने वाली मीडिया जगत की इकलौती हस्ती, गुजरात समाचार एवं वॉइस ऑफ एशिया, यूके के प्रकाशक – संपादक सी.बी.पटेल ने स्टेट प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित परिसंवाद ‘ विदेशों में भारत की बदलती छवि ‘ में कही।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों से पधारे पत्रकारों ने  पटेल का आत्मीय स्वागत भी किया। पटेल ने अपने उद्बोधन में कुछ दशक पूर्व भारत के बारे में अन्य देशों की धारणा गरीब और कमज़ोर देश की थी। समय के साथ भारत ने कभी अतिवृष्टि तो कभी अनावृष्टि में सदा फंसे रहने वाले देश की छबि से उबरकर, खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाकर, योग – अहिंसा जैसे सिद्धांत देकर अपने लिए सम्मान कमाया है। और आज स्थिति यह है कि यूक्रेन पर हमले के बाद सिर्फ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में हिम्मत थी कि शक्तिशाली नेता पुतिन को यह कह सकें कि आपने गलत किया।

यह स्वाभिमान और हिम्मत दुनिया के किसी भी कोने में रहने भारतीय के प्रयासों के कारण है। बुरा काम करने या अपराध के प्रति भारतीयों में सहज ” शर्म ” या हिचक का भाव है, और यह शर्म देश के लिए बहुत अच्छी है। पाकिस्तान हमारे साथ ही आज़ाद हुआ था लेकिन आज पाकिस्तान की अंतराष्ट्रीय छवि उसे सहानुभूति का पात्र बनाती है। इंग्लैंड में भारतीय समुदाय के सबसे पुराने और लोकप्रिय चैनल एमएटीवी के सीएमडी कुलदीप सिंह शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विदेशों में भारत की छवि बहुत निखरी है। भारत अब ऐसा देश बन गया है जिसकी बात अन्य देश ग़ौर से सुनते हैं।

एबीपीएल ग्रुप, यूके के समूह संपादक महेश लिलोरिया ने कहा कि विदेशों में आज भारतीय अनेक क्षेत्रों में सिरमौर बने हुए हैं और उनकी उपलब्धियाँ देखकर सहज गर्व हो उठता है। भारतीयों की सफलता के पीछे सनातन मूल्यों से मिली ऊर्जा और उदारता भी है। आज भारत को सबसे प्रभावशाली देशों में गिना जाता है। यूके में तो भारतीय उद्योग, राजनीति, संस्कृति आदि से लगाकर दान और सेवा के क्षेत्रों में भी आगे हैं। ग्लोबल कन्वरजेंस एवं समग्र भारत मीडिया ग्रुपों के सम्पादकीय प्रमुख एवं वरिष्ठ पत्रकार कुमार राकेश ने कहा पिछले अरसे में उन्होंने 70 से ज़्यादा देशों की यात्रा की है और महसूस किया है कि कर्मयोगी भारतीयों के कारण विश्व में भारत की छवि बदली है और सम्मान बढ़ा है।

वर्ष 2014 से पहले जहाँ भारतीय दूतावासों को विदेशी अख़बारों में छोटी सी ख़बर छपवाने के लिए भी बड़ी मशक़्क़त करनी पड़ती थी, वहीं आज कई प्रमुख अख़बार मोदीजी से अपॉंइट्मेंट के लिए लाइनें लगाते हैं। भारत की छवि में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। स्टेट प्रेस क्लब, मप्र के अध्यक्ष प्रवीण कुमार खारीवाल ने कहा कि यह हमारे लिए फ़ख़्र का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों सम्मानित होने वाली हस्तियों में एक मीडिया जगत की भी है और हमें उन्हें सम्मानित कर पा रहे हैं।

प्रारम्भ में अतिथियों ने दीप प्रज्जवलन कर एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से परिसंवाद का शुभारम्भ किया। अतिथियों का स्वागत वरिष्ठ पत्रकारगण संजीव आचार्य, मनोहर लिंबोदिया, ललित उपमन्यु, नवनीत शुक्ला, दीपक बुडाना, आकाश चौकसे,रचना जौहरी,मीना राणा शाह, सोनाली यादव, प्रीति भारद्वाज आदि ने किया। कार्यक्रम का संचालन बहुविध संस्कृतिकर्मी आलोक बाजपेयी ने किया जबकि स्टेट प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने आभार प्रदर्शन किया।

संस्कृति और स्वाद का आयोजन हो लंदन में

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार महेश लालोरिया ने प्रस्ताव रखा कि स्टेट प्रेस क्लब मप्र और अभिनव कला समाज मालवा की संस्कृति और स्वाद को लेकर लंदन में अनूठा आयोजन करें। एबीपीएल मीडिया समूह को इसकी मेज़बानी करके प्रसन्नता होगी। मीडिया बिरादरी में सी. बी. पटेल के स्वागत के लिए अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। रायपुर से आए आशीष पाटनी, आशीष झा, मन्दसौर के ईश्वर चेन्दानी जितेंद्र जाखेटिया, सत्यकाम शास्त्री,भोपाल से डॉ.कमल हेतावल, गौरव चतुर्वेदी, गणेश एस. चौधरी, गगन चतुर्वेदी, चंद्रशेखर शर्मा, अशोक रघुवंशी, प्रवीण धनोतिया, ताहिर कमाल सिद्दीक़ी, आदि सहित बड़ी संख्या में पत्रकारों एवं संस्कृति प्रेमियों ने पटेल का स्वागत कर उनके नागरिक अभिनंदन सा दृश्य बना दिया।

अलग -अलग रंग के पासपोर्ट, लेकिन दिल है हिंदुस्तानी

सी.बी. पटेल न केवल अनिवासी भारतीयों अपितु अन्य देशों की नागरिकता ले चुके भारतवंशियों को भी खाँटी भारतीय ही मानते हैं बल्कि, उन्होंने स्वयं इंग्लैंड में नागरिकता, इमिग्रेशन, रेशियल भेदभाव आदि के ख़िलाफ़ भारतीय एवं एशियन समुदाय का बहुत साथ दिया है। पटेल ने कहा कि अलग-अलग देशों में बसे भारतीयों के पासपोर्ट के रंग भले अलग-अलग हैं, लेकिन दिल ख़ालिस हिंदुस्तानी है।

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