दुष्कर्म के मामले में मप्र दूसरे नंबर पर, अब SC ने उठाया ये कदम

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नई दिल्ली। देश में नाबालिग और मासूमी बालिकाओं के साथ बढ़ती दुष्कर्म की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित नजर आ रहा है। गलत दिशा में जाते समाज को देखते हुए शीर्ष अदालत ने सख्त रूप अपनाया है। कोर्ट ने बच्चियों के साथ हो रहे दुष्कर्म के मामले में खुद संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दााखिल की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस रंजन गोगोई ने लगातार मीडिया में आ रही बच्चियों से रेप की घटनाओं से आहत होकर ये पीएलआई दायर की है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर वकील वी गिरी को एमिकस क्यूरी बनाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम रजस्ट्री ने देशभर में एक जनवरी से अब तक ऐसे मामलों में दर्ज एफआईआर और की गई कानूनी कार्रवाई के आंकड़े तैयार करने को कहा है। हाल में आए आंकड़ांे के मुताबिक पहली जनवरी से 30 जून तक देशभर में बच्चों से दुष्कर्म के 24 हजार मुकदमें दर्ज किए गए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश का नंबर सबसे पहले है, जबकि मात्र नौ मुकदमों के साथ नागालैंड सबसे नीचे हैं।

बालिकाओं के साथ रेप के मामलों में पुलिस की लापरवाही को भी जिम्मेदार बताया गया है। उत्तर प्रदेश के 50 फीसदी से अधिक यानी 1779 मुकदमों की जांच तक अभी पूरी नहीं हो सकी है। इसके बाद मध्यप्रदेश का नंबर आता है। यहां दुष्कर्म के 2389 दर्ज किए हैं, किंतु पुलिस 1841 मामलों में जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर सकी है। वहीं सूबे की निचली अदालतों ने 247 मामलों में ट्रायल पूरा कर लिया है।

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