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“आरक्षण उनको मिले जिनको आरक्षण की जरूरत है, आरक्षण के नाम पर देश में राजनीति देश हित में नहीं” राजेश रोत की कलम से

Posted on: 23 May 2018 04:49 by Ravindra Singh Rana
“आरक्षण उनको मिले जिनको आरक्षण की जरूरत है, आरक्षण के नाम पर देश में राजनीति देश हित में नहीं”  राजेश रोत की कलम से

मेरे पिता जी रेलवे में थे उन्हें आरक्षण के चलते नौकरी मिली थी। तब हमें नौकरी की बहुत जरूरत थी। पिताजी रेलवे से क्लास वन अफ़सर पद से सेवानिवृत्त हुए। इस बीच मैंने इंजीनियरिंग की और आरक्षण का लाभ लेकर नौकरी पाई। आज मेरा परिवार सक्षम है,इसलिए अब मुझे किसी तरह के आरक्षण की जरूरत नहीं।

मेरा मानना है कि आरक्षण उन लोगों को मिलना चाहिए जिनको इसकी जरूरत है। इसलिए मैंने आरक्षण का लाभ न लेने का फैसला किया है। ये कहना है भील समुदाय से आने वाले राजेश रोत का। मूल रूप से राजस्थान के डूंगुरपुर के रहने वाले राजेश कांडला पोर्ट पर मैकेनिकल इंजीनियर हैं। राजेश वनवासी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।

आज जब देश में आरक्षण के नाम पर राजनीति हो रही है। ऐसे में राजेश ने अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए आरक्षण न लेने का फैसला किया है। राजेश मानते हैं कि आरक्षण जब लागू किया गया था उस समय इसका उद्देश्य उन लोगों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करना था जो सामाजिक विसंगतियों के कारण पिछड़ गए थे। लेकिन आज जब उसी वर्ग में जो लोग सक्षम हो चुके हैं तो उन्हें आरक्षण लेने की जरूरत नहीं है।

वे कहते हैं कि बाबा साहेब आंबेडकर ने जिस समाज को समरस बनाने के लिए अथक प्रयास किए उस समरसता को आज कुछ राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए खंडित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। सत्ता पाने के लिए आरक्षण के लिए जो हो रहा है वह दुर्भाग्यपूर्ण है। राजेश बताते हैं ” मेरे दो बेटे हैं। देव और सोहम।देव बारहवीं कक्षा में और सोहम चौथी कक्षा में है। मैं मानता हूं कि जब मेरे बेटे कॉलेज की पढ़ाई करें तो वह प्रवेश में आरक्षण का सहारा बिल्कुल न लें। इसलिए मैंने दोनों बच्चों के जाति प्रमाणपत्र ही नहीं बनवाए।

मैंने अपने दोनों बच्चों को सक्षम बनाने और बिना किसी सहारे के अपने पैरों पर खड़ा होने की शिक्षा दी है। मेरा परिवार साधन संपन्न है। और अब हमें आरक्षण की जरूरत नहीं है। जब जरूरत थी, तब हमने उसकी सुविधा ली। अब जबकि मैं और मेरा परिवार हर तरह से सुखी तो मुझे और मेरे परिवार के किसी भी सदस्य को आरक्षण की जरूरत नहीं है।” रोत कहते हैं ” मैंने अपने दोनों बच्चों को भी यही सिखाया कि इतने काबिल बनो कि लोग तुम्हें तुम्हारी काबिलियत की वजह से जानें।

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