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अक्षय कुमार के इंटरव्यू में पीएम मोदी बोले, मैंने कभी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री बनूंगा | In the interview of Akshay Kumar, PM Modi said, I never thought that I would be the ‘Prime Minister’

Posted on: 24 Apr 2019 09:13 by Pawan Yadav
अक्षय कुमार के इंटरव्यू में पीएम मोदी बोले, मैंने कभी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री बनूंगा | In the interview of Akshay Kumar, PM Modi said, I never thought that I would be the ‘Prime Minister’

फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने पीएम नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू लिया। प्रधानमंत्री मोदी का ये पहला गैर राजनीतिक इंटरव्यू है। इंटरव्यू के दौरान पीएम मोदी ने अक्षय कुमार से दिल की बात करते हुए कहा कि बचपन से आम खाना पसंद है। मैं सेना में जाना चाहता है, शुरू से ही किताब पढ़ना पसंद है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री बनूंगा। उन्होंने कहा कि जवानों को देखकर जीना-मरने का ख्याल आता है।

उन्होंने कहा कि बचपन में मैं सेना में जाना चाहता था। जवानों को देखकर मुझे जीने मरने का ख्याल आया। बचपन से ही मुझे किताबें पढ़ने का शौक है। बचपन में मैंने अच्छी नौकरी के अलावा कुछ नहीं सोचा था, क्योंकि मैं एक गरीब परिवार से था, इसलिए सोचता था कि बस एक अच्छी नौकरी मिल जाए। प्रधानमंत्री बनने के सवाल पर मोदी ने कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं पीएम बन जाऊंगा। जो सोचा नहीं था वो बन गया। मोदी ने बिना नाम लिए गांधी परिवार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मैं वैसे परिवार से नहीं आता जहां लोग पीएम बनने की सोचते हैं। मैं पीएम बनकर घर से नहीं निकला।

इस दौरान पीएम मोदी ने बताया है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद मेरे अच्छे दोस्त हैं। हम साथ रहकर हंसी मजाक करते रहते हैं। इतना ही नहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि ममता दीदी आज भी साल में एक-दो कुर्ते तोहफे में देती हैं। वह मुझे बंगाल की मिठाईयां भी भेजती हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि मुझे शब्दों से खेलना पसंद है। मैं हास्य भी करता हूं। विरोधी पार्टियों में भी मेरे अच्छे दोस्त हैं, अब तो सोच समझकर बोलना पड़ता है। मां के साथ रहने के सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि मैं जिदंगी की छोटी आयु में सबकुछ छोड़ चुका हूं, उस समय जब घर छोड़ा था तो तकलीफ हुई थी। अभी भी मैं मां से मिल लेता हूं. मेरी मां कहती है कि मेरे लिए समय बर्बाद मत करो। मेरी मां जब यहां आती है तो मैं उन्हें समय नहीं दे पाता हूं. मैं अपने कामकाज में बिजी रहता हूं। पीएम मोदी ने कहा है कि मैं अंदर का गुस्सा रोकने की कोशिश करता हूं। गुस्सा इंसान का स्वभाव है. मुझे अनुशासन पसंद है।

इंटरव्यू के दौरान पीएम मोदी ने बताया कि मुझे विधायक के तौर पर गुजरात में एक प्लॉट दिया गया, किंतु उसे भी मैंने पार्टी को देना तय किया। मैंने सोचा मैं इसका क्या करूंगा। मोदी ने कहा कि मैं पीएम बना तो मुझे मुख्यमंत्री रहने के अनुभव का फायदा मिला है। मुझे गुजरात में सबसे ज्यादा समय तक सीएम बने रहने का अनुभव है, उसी अनुभव का फायदा मुझे अब हो रहा है।

4 घंटे सोने के सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि ओबामा भी मुझसे यही पूछते हैं। मोदी जी क्यों ऐसा करते हो, वो मेरे अच्छे दोस्त हैं। अब जब भी वह मिलते हैं तो पूछते हैं कि नींद बढ़ाई या नहीं बढ़ाई। जब उनसे से रिटायरमेंट के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि मैंने इस बारे में कुछ नहीं सोचा। मेरे लिए जिम्मेदारी ही सबकुछ है। मेरे मन में कभी ये विचार नहीं आया। जिंदगी का एक एक पल में किसी ना किसी मिशन में लगाना चाहता हूं। अगर मुझे अलाऊद्दीन का चिराग मिल गया तो मैं जिन्न से कहूंगा कि युवा पीढ़ी को मेहनत करना सिखाओं और ये चिराग वाली कहानी सुनाना बंद करो।

पीएम मोदी ने कहा है कि संघ की शाखाओं में वैज्ञानिक खेल होते हैं। बचपन में संघ की शाखा में जाते थे। अकेले खेलने के बजाय समूह में खेलने का ज्यादा फायदा मिलता है। मैंने गांव के तालाबों में तैरता था। जब उनसे पूछा कि क्या आप अपनी सैलरी मेें से कुछ पैसे अपनी मां को भेजते हैं? इस उन्होंने कहा कि आज भी मेरी मां मुझे पैसे भेजती हैं। वह मुझे सवा रुपए जरूर देती हैं। मेरा परिवार मुझसे कोई मदद नहीं लेता है।

इस दौरान पीएम मोदी ने अपनी ड्रेसिंग सेंस को लेकर बताया कि जब मैं छोटा था तब कुर्ता बड़ा होता था और धोने में महनत लगती थी, इसलिए मैंने कुर्तें को थोड़ा काट दिया। कुर्ता बैग में भी ज्यादा जगह लेता था, ये भी एक वजह थी। अब ये फैशन बन गया है।

मोदी ने बताया कि मुझे सुबह 5 बजे चाय चाहिए। चाय में चीनी मैं लेता नहीं हूं और शाम में 6 बजे भी मुझे चाय चाहिए। मुझे खुले आसमान के नीचे चाय पीना अच्छा लगता है। मैं जंगलों में जाया करता था. मैं मुझसे मिलता था, किंतु अब ये नहीं कर पाता हूूं, पहले बहुत सालों तक किया है। मोदी ने बताया कि मैं यूएन में पहले भाषण के दौरान आत्मविश्वास में था. मुझे लिखा हुआ भाषण पढ़ने में बहुत दिक्कत होती हैं।

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