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10वीं, 12वीं में 90 फीसदी अंकों पर ख़ुशी भी, हैरानी भी

Posted on: 15 May 2019 13:12 by Mohit Devkar
10वीं, 12वीं में 90 फीसदी अंकों पर ख़ुशी भी, हैरानी भी

दसवींउच्चतर माध्यमिक का परीक्षा परिणाम आया है , छात्रों के प्राप्तांक देखकर आतंक मिश्रित ख़ुशी होती है. 90% अंक पाना सहज हो गया है अभी पढ़ी कोलकाता की ऋचा सिंह को 99.25 %, अंक मिले हैं उन्हें , उनके अभिभावक गण सहित बधाई । विद्यार्थियों को भाषा में 99 / 100 में से मिले हैं सोच रही हूं यह मुमकिन कैसे हुआ निबन्ध लेखन , पत्र लेखन में पूरे अंक ? मात्रा , वाक्य विन्यास , विषय प्रतिपादन कहीं कोई गलती नहीं हुई ..आश्चर्य हुआ इसलिये भी कि मैं हिंदी की व्याख्याता रही हूं ..विशेषकर अंग्रेजी माध्यम के हिंदी पढ़ने वाले विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकायें जांचने का अनुभव मुझे है ….।

शिक्षा का एक पहलू यह है तो दूसरे पहलू ने चिंतित कर दिया है ..दैनिक अखबार में पढ़ी आठवीं कक्षा के छात्र ने परीक्षा में फेल होने पर फांसी लगा ली …। दूसरा समाचार कि दसवीं की छात्रा ने फेस बुक में किसी क , ख , ग से मित्रता की , यही नहीं मित्र के बहकावे में आकर परीक्षा देने घर से निकल कर सीधे स्टेशन पहुंची , आभासी मित्र के साथ तिरोड़ा गांव पहुंच गई …नाबालिग कन्या के माता पिता की परेशानी की कल्पना हम सब कर ही सकते हैं …

छात्रा ने बताया मां को मोबाईल मिला था पर अशिक्षित मां के लिए मोबाईल का उपयोग सम्भव नहीं था तो मां ने मोबाईल बेटी को दे दिया …किशोरी बेटी सोशल मीडिया की उपयोगिता तो जानती नहीं थी , फेसबुक , व्हाट्स एप्प के जरिये दोस्ती , चैटिंग , विडीयो कॉल करने में मशगूल हो गई स्कूल की पढ़ाई धरी की धरी रह गई , मजदूर अशिक्षित मां बाप को समझ में कुछ आया तो टोका टाकी किये …परिणाम विपरीत ही हुआ …आभासी मित्रता वह भी किशोर वय की ..करेला और नीमं चढ़ा …।

पुलिस कार्रवाई हुई श्रीमान क , ख , ग पकड़े गये उनका फेस बुक अकाउंट ही फर्जी नहीं था , इससे पहले भी वे भिन्न भिन्न उम्र की लड़कियों , महिलाओं से दोस्ती कर चुके थे फ्रेंड लिस्ट बड़ी लम्बी है किसी दुकानदार से दस हजार उधार लिए तो किसी मित्र से कटहल के खेत के लिए 25 हजार का चेक लिए हैं.

पुलिस खंगाल रही है और कितनों को शिकार बनाया है इन बातों की जानकारी …
सोशल मीडिया के दुरूपयोग की यह पहली कहानी नहीं है …मेरी भूतपूर्व छात्रा जो आज सरकारी नौकरी करती है इसी आभासी मित्रता के चलते शादी के नाम पर तीन लाख रूपये गंवा चुकी है तथाकथित मित्र ,भावी वर विवाह की तारीख में निजी अस्पताल में भर्ती हो गये , पुलिस केस इसलिये नहीं बन पाया कि उसने चेक नहीं कैश लिए थे वह भी दो साल में ….।
कई घटनाएं अख़बारों में पढ़ने को मिलने लगी है ..विचारणीय ये है कि इस पर रोक कैसे लगाई जाये ? लोगों को जागरूक करना होगा कि अंजान लोगों से न जुड़ें उम्र चाहे कोई भी हो विशेषकर बच्चे , सद्यः युवाओ में सोशल मीडिया के इस्तेमाल के प्रति जागरूकता , बड़ों के द्वारा नियंत्रण जरूरी हो गया है …
फेस बुक , व्हाट्स एप्प सोशल मीडिया में व्यक्तिगत जानकारी न दें …।

स्कूल , कॉलेज , सामाजिक संगठनों के द्वारा सोशल मीडिया के समुचित उपयोग , इससे होने वाले लाभ , हानि की उचित जांनकारी देने का मुहिम चलाया जावे ….प्रश्न फिर भी शेष है ..क्या उम्र दराज़ लोग आभासी रिश्तों , दोस्ती , फर्जी लेन देन के शिकार नहीं होते ? उत्तर है …अवश्य होते हैं ..जागरूकता किसी वर्ग विशेष के लिए नहीं सबके लिए हो …प्रबुद्ध वर्ग , लेखक गण आगे आएं अपनी कलम को नया विषय दें …विधा चाहे कविता , कहानी , संस्मरण जो हो समाज को दिशा देने , जागरूक करने की नैतिक जिम्मेदारी उनकी ज्यादा है क्योंकि उन्हें भाषा का वरदान मिला है , अतिरिक्त संवेदनशीलता मिली है , अभिव्यक्ति का माध्यम मिला है .. सावधान रहें कि इस आभासी संसार का लेखा जोखा प्रस्तुत करते हुये आपको अपने मित्रों को खोना भी पड़ सकता है कारण कुछ विशेष नहीं , यथार्थ चरित्र चित्रण तो होगा पर दुनिया तो आभासी होगी ज़ाहिर है आभासी मित्र आपके लेखन का पात्र स्वयं को समझने की भूल कर बैठेगा …और तब बहुत सम्भव है सोशल मीडिया की देन आभासी पर सच्चा शुभचिंतक मित्र आपसे दूरी बना ले …यह कोरी कल्पना नहीं है , न ही चेतावनी है अनुभूत सत्य है… पर लिखना तो होगा …..नहीं तो कोई खाला पूछेगी ” बिगाड़ के डर से ईमान की बात नहीं बोलोगे क्या ? ”

इत्यलम्
लेखक – सरला शर्मा

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