भारत में वेदांता के सभी चार प्रोजेक्ट्स का रहा विवादों से नाता

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तमिलनाडु के तूतीकोरिन में प्रदर्शन और फिर पुलिस फ़ायरिंग में 13 लोगों की मौत के बाद वेदांता एक बार फिर विवादों में है.लेकिन ये पहली बार नहीं है जब ब्रिटेन की ये कंपनी विवादों में घिरी हो. लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड वेदांता के भारतीय उपक्रम का नाम स्टरलाइट है. कोरबा में भी हादसा स्टरलाइट छत्तीसगढ़ के कोरबा में एल्यूमीनियम कंपनी चलाती है जिसमें साल 2009 में हुए एक चिमनी हादसे में 42 मज़दूरों की मौत हो गई थी. पुलिस ने इस हादसे में बाल्को वेदांता, चीनी कंपनी शैनदोंग इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन और जीडीसीएल के ख़िलाफ़ रिपोर्ट दर्ज की थी.इस मामले में राज्य सरकार ने बख़्शी आयोग भी बनाया था जिसकी रिपोर्ट हुक़ूमत को भी सौंप दी गई थी. लेकिन सरकार ने उसे कभी सार्वजनिक नहीं किया.

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साल 2001 में इस सरकारी कंपनी को वेदांता के द्वारा ख़रीदे जाने के समय से ही विवाद शुरू हो गया था. वेदांता ने भारत एल्यूमीनियम कंपनी या बाल्को की रिफ़ाइनरी, समेलटर और खदानों को भारत सरकार से क़रीब 551 करोड़ रुपयों में ख़रीदा था. लेकिन कहा ये जा रहा था कि सरकारी कंपनी की क़ीमत इससे कहीं अधिक थी. कंपनी को बेचे जाने के विरोध में कामगारों ने हड़ताल कर दी थी जो क़रीब 60 दिन चली थी.आदिवासी बहुल इलाक़े में बॉक्साइट खनन को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया जिसने डोंगरिया कोंड आदिवासियों को इस पर अपना मत ग्राम पंचायतों में रखने को कहा.

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सभी 12 पल्ली सभाओं ने खनन के प्रस्ताव को एकमत से नकार दिया. देश की सबसे ऊंची अदालत के हुक़्म पर ये सभाएं जुलाई-अगस्त के महीने में आयोजित हुई थीं. वेदांता ने लांजीगढ़ में 10 लाख टन की क्षमता वाली एक रिफ़ाइनरी का निर्माण किया था जिसकी क्षमता नियमगिरी में खनन के बलबूते छह गुना बढ़ा दी गई थी. हालांकि कंपनी के पास तब तक इसका औपचारिक आदेश नहीं आया था.

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