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आईआईएम इंदौर में एफडीपी 2019 की शुरुआत

Posted on: 26 Apr 2019 19:30 by Mohit Devkar
आईआईएम  इंदौर में एफडीपी 2019 की शुरुआत

आईआईएम इंदौर में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) 2019 की शुरुआत 22 अप्रैल, 2019 को हुई। प्रोग्राम में देश भर से आये २४ प्रतिभागियों ने रजिस्ट्रेशन कराया। उद्घाटन सोमवार को, प्रोफेसर हिमांशु राय, निदेशक, आईआईएम इंदौर के साथ-साथ प्रोफेसर सुबीन सुधीर, कार्यक्रम समन्वयक और संकाय, आईआईएम इंदौर की उपस्थिति में हुआ।

श्री विजय ददलानी , अधिकारी, आईआईएम इंदौर ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। इसके बाद प्रोफेसर सुधीर द्वारा स्वागत भाषण दिया गया। उन्होंने पाठ्यक्रम और कार्यक्रम की अनुसूची के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी। ‘इस वर्ष का एफडीपी केस राइटिंग एंड टीचिंग, रिसर्च मेथोडोलॉजी-मात्रात्मक और गुणात्मक और रिसर्च स्किल डेवलपमेंट पर केंद्रित है, साथ ही 33 दिनों के कार्यक्रम के दौरान निर्धारित विभिन्न विशेषज्ञ वार्ता भी आयोजित की जाएँगी ‘, उन्होंने कहा।

प्रोफेसर हिमांशु राय ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। शिक्षक के रूप में अपने करियर चुनने की बात करते हुए, प्रोफेसर राय ने कहा कि शुरुआती दिनों के विपरीत जब लोग सिर्फ डॉक्टर या इंजीनियर बनने पर ध्यान केंद्रित करते थे, इन दिनों वे लोग जो शिक्षण के बारे में भावुक हैं और दुनिया में बदलाव लाने का उद्देश्य रखते हैं, वे शिक्षण के रूप में अपना करियर चुनते हैं। शिक्षण एक उत्कृष्ट काम है और इसमें समर्पण की आवश्यकता है, उन्होंने कहा। उन्होंने फिर शिक्षाविदों के दो प्रमुख भय के बारे में बात की। ‘एक है असफलता का डर और दूसरा, सफलता का भय। हो सकता है कि आप एक बार अपने किसी व्याख्यान को उचित तरीके से प्रस्तुत करने में विफल हो सकते हैं या अच्छे से नहीं कर सकते, लेकिन यह घातक नहीं है।

दुनिया यहाँ समाप्त नहीं होगी। सुनिश्चित करें कि आपका अगला व्याख्यान हमेशा पिछले से बेहतर हो ’, उन्होंने कहा। ‘फियर ऑफ सक्सेस ’के बारे में चर्चा करते हुए, प्रोफेसर राय ने कहा कि हमेशा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले पर एक दबाव यह रहता है कि कहीं अगला प्रदर्शन बुरा या कम स्तरीय न हो। यह दबाव बहुत अधिक तनावपूर्ण होता है। ‘कुछ लोग सफलता के डर से पीड़ित होते हैं – अगर एक बार उन्होंने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया और प्रशंसा प्राप्त की, तो अगली बार भी वे सर्वश्रेष्ठ होने के लिए ‘बाध्य’ होंगे ऐसा मान कर तनाव लेते हैं। यह समझें, कि पूर्णता और परफेक्शन जैसी कोई चीज नहीं है। हर चीज में एक पूर्णतावादी नहीं हो सकते। परफेक्शन के लिए मेहनत ज़रूर कर सकते हैं और कौशल को बढ़ाते रह सकते हैं।’, उन्होंने कहा।
उन्होंने प्रतिभागियों को सहकर्मियों और दोस्तों से ईर्ष्या से बचने की सलाह दी, और आसपास के लोगों की सफलता पर खुश होने की सलाह दी – क्योंकि यह व्यवहार सकारात्मकता लाता है और हमें एक सकारात्मक व्यक्ति बनाता है।

पहचान के तीन स्तरों की चर्चा करते हुए, प्रोफेसर राय ने कहा कि एकेडेमिया में होने के नाते, व्यक्ति को हमेशा यह जानना चाहिए कि स्वयं क्या है, यह जानें कि उनके प्रतिभागियों को क्या जानना है और उन्हें क्या सीखना है। ‘जिस विषय पर आप पढ़ा रहे हैं, उस पर हमेशा शोध करते रहे और अधिक से अधिक सीखें। इसके अलावा, हमेशा आप और आपके आस-पास के सभी लोगों से सीखने का लक्ष्य रखें – जितना अधिक आप जानते हैं, उतना ही आपको एहसास होता है कि आप कितने अज्ञानी थे ‘।

इसके बाद प्रोफेसर सुधीर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। कार्यक्रम चाय-नाश्ते के साथ संपन्न हुआ जहाँ प्रतिभागियों को एक दूसरे के साथ और संकाय सदस्यों के साथ बातचीत करने का मौका मिला।

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