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झुग्गी से निकलकर ऐसे IAS ऑफिसर बनीं Ummul Kher | IAS officer Ummul kher story

Posted on: 07 Mar 2019 15:24 by Surbhi Bhawsar
झुग्गी से निकलकर ऐसे IAS ऑफिसर बनीं Ummul Kher | IAS officer Ummul kher story

उर्दू के शायर अल्लामा इक़बाल की पंक्तियों को सच कर दिखाया है उस लड़की ने जो झुग्गी से निकलकर आईपीएस ऑफिसर बन गई। वह पंक्तियां है ‘ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले, ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है’। ऐसी बिमारी होने के बाद भी, जिसमे हड्डियां बेहद कमजोर हो जाती है, छोटी सी चोट से फ्रैक्चर होने का खतरा रहता है, इस लड़की ने हार नहीं मानी और यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में शानदार कामयाबी हासिल की।

उम्मुल खैर की सफलता

जी, हां यहां हम बात कर रहे है आईपीएस ऑफिसर उम्मुल खैर की, जिन्होंने कठिन परिस्थियों को पार कर यूपीएससी के सिविल सर्विसेज एग्जाम में सफलता हासिल की है। उम्मुल की यह सफलता इसलिए भी ख़ास है क्योकि उन्होंने इसके लिए बहुत संघर्ष किया। इस परीक्षा में उम्मुल ने 420वीं रैंक हासिल की थी।

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राजस्थान से दिल्ली आया परिवार

राजस्थान की रहने वाली उम्मुल जब पांच साल की थीं तब उनका परिवार रोजगार की तलाश में दिल्ली आ गया था। दिल्ली में उनका परिवार निजामुद्दीन के स्लम एरिया में झुग्गी में रहने लगा। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता रहता था और रास्ते नालियों से नाला बन जाते थे उनके पिता स्टेशन के पास छोटे-मोटे सामान बेचा करते थे। कुछ सालों बाद झुग्गियां वहां से हटा दी गईं और उम्मुल का परिवार बेघर हो गया। इतना ही नहीं उनके पिता का काम भी छूट गया।

उम्मुल लेने लगी ट्यूशन

निजामुद्दीन में झुग्गी टूटने के बाद उम्मुल का परिवार रहने के लिए त्रिलोकपुरी गया। यहां आने के बाद उनके पापा का काम भी छूट गया. इस समय उम्मुल 7 वीं क्लास में थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। इससे उन्हें 50 रूपये महीने की कमाई होने लगी।

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उम्मुल को है बेहद गंभीर बीमारी

उम्मुल को ‘फ्रिजाइल बोन डिस्ऑर्डर’ नाम की गंभीर बीमारी है। इस बीमारी में हड्डियां बेहद कमजोर हो जाती है और छोटी से चोट में फ्रैक्चर हो जाता है। उम्मुल को बचपन में 16 बार फ्रैक्चर हो चुका है। इन फ्रैक्चर्स को ठीक कराने के लिए उम्मुल को कई सर्जरी भी करानी पड़ी।

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9वीं क्लास में छोड़ दिया था घर

जब उम्मुल 8वीं क्लास में पढ़ती थीं तब उनके घरवालों ने उनपर पढ़ाई छोड़ने का बहुत दबाव बनाया। उम्मुल के घरवालों ने साफ कर दिया कि अगर वे पढ़ाई नहीं छोड़ती हैं तो उन्हें अलग होना पड़ेगा। इसके बाद उम्मुल ने पढ़ाई करने के लिए त्रिलोकपुरी में ही एक कमरा किराए पर ले लिया।इस दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती रही। 2016 में वह पहले प्रयास में ही यूपीएससी में 420वां रैक पाने में सफल हुई।

कर चुकीं हैं भारत का प्रतिनिधित्व

उम्मुल कई बार विदेशों में दिव्यांगों से जुड़े कार्यक्रमों में भारत का प्रतिनिशित्व कर चुकी है। 2014 में उम्मुल का जापान के इंटरनेशनल लीडरशिप ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए सिलेक्शन हुआ था। उम्मुल के लिए यह भी कामयाबी थी क्योकि वह चौथी भारतीय थी जिन्हें इस कार्यक्रम के लिए चुना गया था।

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