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एएन-32 विमान को लेकर भारतीय वायुसेना का बड़ा फैसला

Posted on: 15 Jun 2019 11:55 by Pawan Yadav
एएन-32 विमान को लेकर भारतीय वायुसेना का बड़ा फैसला

नईदिल्ली। भारतीय वायुसेना का लापता विमान आठ दिन बाद अरुणाचल प्रदेश के लीपो गांव में दुर्घटनाग्रस्त स्थिति में मिला था। इसमें सवार सभी 13 लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना के बाद भारतीय वायुसेना खराब मौसम में एएन-32 विमान के उपयोग नहीं करने पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 10 सालों में एएन-32 विमान तीन बार दुर्घटनागस्त हो चुका है।

AN 32

वायुसेना के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार एएन-32 जिसे सेना में सबसे कामकाजी विमान के तौर पर देखा जाता है। सुरक्षा के लिहाज से अब इसे पर्वतीय क्षेत्रों और समुद्र के ऊपर से उड़ान भरने वाले इलाकों में शामिल नहीं किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक वायुसेना द्वारा सी-295 परिवहन विमान खरीदे जा रहे हैं, उनका अधिकांश उपयोग किया जाएगा। एएन-32 से अधिक सुरक्षित सी-295 विमान है।

अधिकारियों के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने एयरबेस द्वारा निर्मित 56 सी-295 विमानों के लिए बीतचीत खत्म हो चुकी है। इसका मकसद जहां परिवहन विमान एवरो-748 की जगह लेना है। वहीं उन कार्यों को भी करने में सक्षम है, जिनका वर्तमान में एएन-32 कर रहा है। अधिकारी ने कहा कि 250 करोड़ रुपए की यह परियोजना अंतिम मंजूरी के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद के पास आएगी। एयरबेस डिफेंस एंड स्पेस एंड टाटा एडवांस सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) संयुक्त रूप से परियोजना पर काम करेंगे। यह एयरोस्पेस क्षेत्र में मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत बनाया जाएगा।

एक बार इस परियोजना को मंजूरी मिल जाए तो एयरबेस 16 विमानों को फ्लाईवे कंडीशन (उड़ान भरने के लिए तैयार) में भेजेगा, जबकि बचे हुए 40 विमानों को भारत में टीएएसएल असेंबल करेगा। तीसरे अधिकारी ने कहा कि डीएसी की अनुमति के बाद सी-295 की खरीददारी को केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि साल के आखिर तक इस परियोजना पर मुहर लग जाएगी। जहां सी295 एवरो की जगह लेगा वहीं यह एन-32 द्वारा किए जा रहे कुछ महत्वपूर्ण कर्तव्य का भी निर्वहन करेगा।

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