काश इन गालीबाज़ों को चुनाव लड़ने से रोक दिया जाता | Abusers were prevented from Contesting Elections

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लीना मल्होत्रा

चाहे मायावती हों, सोनिया गांधी, प्रियंका, राबड़ी, स्मृति अथवा जया प्रदा मैं उस हर पुरुष मानसिकता का विरोध करती हूँ जो स्त्रियों के बारे में न केवल अपशब्द बोलते हैं बल्कि उन्हें गालियों से भी काश इन गालीबाज़ों को चुनाव लड़ने से रद्द कर दिया जाता।बेधते हैं। वह स्त्रियों पर टिप्पणी करते हुए सीधे उनके चरित्र हनन पर उतर आते हैं काश हमारे देश मे स्त्रियों की गरिमा को इतने हल्के में न लिया जाता। काश इन गालीबाज़ों को चुनाव लड़ने से रद्द कर दिया जाता।यहां पार्टी मेरे लिए मायने नहीं रखती न ही स्त्री की प्रतिभा। जब असंयमित और अभद्र भाषा मे एक स्त्री पर टिप्पणी की जाती है उसे गाली दी जाती है तो यह गाली सिर्फ उस स्त्री के लिये नहीं होती यह उन तमाम उपस्थित अनुपस्थित स्त्रियों को भी दी जाती हैजो उनके भाषण को सुनेंगी अथवा वहां रहकर गाली सुनने पर इधर उधर ताकने लगती हैं. यह कैसे समाज का निर्माण कर रहें हैं हम। क्या विश्व पटल पर भारत की छवि ध्वस्त करने का इन्हें कभी मलाल नहीं होता। और वह औरते जो कहती हैं उनके घर मे माँ बेटी नहीं हैं वह भी अपरोक्ष रूप में स्त्री को ही गाली दे रहीं हैं । सबसे पहले मानसिक स्वच्छता की ज़रूरत है भारत को। किन्तु तब दुख और बढ़ जाता है जब यही गाली खाई स्त्रियां इसे चुनावी मुद्दा बनाकर वोट बटोरने में लग जाती हैं । उफ्फ!!!

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