न खाऊंगा… न खाने दूंगा… गजब चौकीदार है! राजेश ज्वेल की टिप्पणी

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मोदी भक्त बार-बार ये दुहाई देते हैं कि केन्द्र की सरकार पर साढ़े 4 साल में भ्रष्टाचार के कोई आरोप न लगे… अब इन जड़ बुद्धि लोगों को कौन समझाए कि भ्रष्टाचार के खुलासे तत्काल कम और कालान्तर में ही ज्यादा हो पाते हैं… अब कौन-सी सरकार अपने खुद के किए काले-पीले की जांच करवाएगी और सारी जांच एजेंसियों को वैसे ही पंगू बना रखा है… ताजा चौंकाने वाला मामला सीबीआई के अपर निदेशक राकेश अस्थाना का सामने आया, जिसमें वे 2 करोड़ रुपए की रिश्वत के आरोपी बताए गए हैं…

ये अस्थाना प्रधानमंत्री के विश्वस्त अफसर माने जाते हैं और सीबीआई में नया पद सृजित कर गुजरात कॉडर के इस आईपीएस अधिकारी की पोस्टिंग की गई, जो पहले दिन से ही विवादित थी, क्योंकि अस्थाना जी पर इसी तरह के आरोप पहले भी लग चुके हैं… मगर विपक्ष को सीबीआई के नाम पर डराने-धमकाने की जिम्मेदारी इस अफसर को दी गई, जो खुद भ्रष्टाचार के दल-दल में डूबा हुआ है… अब सवाल यह है कि न खाऊंगा और न खाने दूंगा का उद्घोष करने वाले प्रधानमंत्री को क्या ऐसे अफसरों की जानकारी नहीं है, जो उनकी नाक के नीचे ही माल सूतने में लगे हैं… अस्थाना के साथ रॉ के एक अफसर पर भी रिश्वतखोरी के गम्भीर आरोप लगे हैं… जब देश की शीर्ष जांच एजेंसी के अफसर ही कठघरे में खड़े हों तो भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग क्या खाक लड़ी जाएगी..?

न लोकपाल के ठिकाने हैं और न राज्यों में सशक्त लोकायुक्त और कैग सहित अन्य एजेंसियों को भी निष्क्रिय बना दिया है और सूचना के अधिकार कानून को भी अमल के मामले में हाशिए पर पटक रखा है… अरे जब देश का चौकीदार ईमानदार व्यवस्था देना चाहता है तो फिर इतने भ्रष्ट कैसे नियुक्त हो गए और साढ़े 4 साल में कितने रॉबर्ट वाड्रा जेल चले गए..? वाकई गजब का चौकीदार मिला है देश को, जिसके 56 इंची गुब्बारे में नित नए छेद हो रहे हैं… राफेल डील में ही संतोषजनक जवाब देश को नहीं मिल सका… न खाऊंगा और न खाने दूंगा जुमले से बढ़कर हास्यास्पद मजाक में तब्दील हो चुका है…

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