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मैं चला उम्मीदवार ढूंढने | I run to find candidate

Posted on: 30 Mar 2019 15:48 by Surbhi Bhawsar
मैं चला उम्मीदवार ढूंढने | I run to find candidate

बड़ी मुश्किल है इतनी पुरानी पार्टी है। लंबा चौड़ा नेटवर्क है। सारे दिग्गज नेताओं का जमावड़ा लगा रहता है। गली – मोहल्ले से लेकर राष्ट्रीय पदाधिकारी तक शहर के कांग्रेसी रह चुके हैं। माँ अहिल्या की यह पावन धरती वर्षों तक कांग्रेस के रंग में रंगी थी। लेकिन बाद में केसरिया भी हो गई। अब चुनाव सिर पर और कांग्रेस के पास उम्मीदवार नहीं है। सोचा इतने सारे नाम चल रहे हैं। कुछ उम्मीदवार हम भी ढूंढ लेते हैं।

ढूंढने की शुरुआत कैसे करें कहां – कहां जाऊं। यह सोचते सोचते मैं सबसे पहले घर से निकल कर वल्लभनगर चला गया।पंकज संघवी के यहां भीड़ लगी थी। हमेशा लगी रहती है। स्कूल चलाते हैं धर्मादा के काम करते हैं, और जेब भारी है। इसलिए मदद वालों की भीड़ लगी रहती है। देखा हर कोई कह रहा है। आप चुनाव लड़ो हम आपका काम करेंगे। पर कोई यह नहीं कहता कि दादा अभी तक तीन चुनाव कैसे हार गए। दादा मस्त हाथ से हाथ को मसलते हुए कहते हैं देखो क्या होता है। धीरे – धीरे हंसते – हंसते जोर से भी हंसने लगते हैं। चल ठीक है बेटा वहां चले जाना तेरा काम हो जाएगा। चुनाव लडूगा जब बताऊंगा काम। बस यह सिलसिला काफी देर तक चलता रहा।

pankaj sanghvi

हर कोई संघवी को दादा कह रहा था तो फिर मैंने भी दादा कहकर पूछा क्या विचार है। मैं तो चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं। पूछा क्यों अरे मेयर का चुनाव भी जीत गया था। भाजपा सरकार ने हरवाया। कलेक्टर ने बदमाशी की थी। लोकसभा का चुनाव भी बहुत कम वोटों से हारा। कांग्रेसी कांग्रेसी तय कर ले तो में चुनाव जीत जाऊंगा। ताई के खिलाफ कितना माहौल है। कहीं आती जाती नहीं है। कुछ नहीं करती। मैं तो लोगों की बारह महीने मदद करता हूं। सबके यहां आता जाता हूं और क्या करूं। फिर पार्टी की इच्छा लड़ने के लिए तैयार हूं। तैयारी पूरी है।

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यहां से आगे बढ़ा तो लगा कि अब दूसरे उम्मीदवार के पास चलते हैं। जो उद्देलित भी है और तैयार भी हैं। विधानसभा से टिकट मांग रहे थे। तीन महीने बाद ही लोकसभा चुनाव आ गए। अब लोकसभा से लड़ने को तैयार हैं। गाड़ी रुकी तो मैं विजय नगर चौराहे पर था वहां दूसरी मंजिल पर शानदार ऑफिस। मतदाता सूचियों से माथापच्ची करते हुए युवा और केबिन में अंदर बैठे स्वप्निल कोठारी से मिला। वैसे यह महाशय खुद तो चार्टर्ड अकाउंटेंट है बाद में गुरु जी बन गए फिर प्रिंसिपल और अब सबसे युवा कुलाधिपति बन गए। रेनेसां यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति होने के बाद इनका मन कुल जमा समाज सेवा करने का है। वैसे भी घर की चिंता नहीं हो तो समाज सेवा से अच्छा कोई काम नहीं होता।

Swapnil kothari

बात की शुरुआत की पूछा तो स्वप्निल भाई कहने लगे बताओ मैं चुनाव क्यों नही लडू। क्या कमी है मेरे में। पढ़ा लिखा हूं, अच्छे परिवार से हु। हजारों स्टूडेंट को पढ़ाया हैं। कई युवा मेरे पास आते हैं और कहते हैं चुनाव लड़ो। विचारधारा से कांग्रेसी था तो कांग्रेस का दामन पकड़ लिया। अब कमल नाथ, दिग्विजयसिंह और ज्योति सिंधिया से मिल लिया हूं। टिकट का दावा किया है। इंतजार कर रहा हूं। घोषणा हो जाए तो काम पर लग जाऊ। पूछा कैसे लड़ोगे चुनाव। तो कहने लगे हर बूथ पर मेरे पास कार्यकर्ता है। यदि कांग्रेस का कार्यकर्ता बूथ संभाल ले तो फिर कोई चुनाव नहीं हरा सकता। फिर मैं नए सपनों के साथ, नए वादों के साथ काम करना चाहता हूं। इस बात की पहली गारंटी देता हूं कि राजनीति में कभी बेईमानी नहीं करूंगा। अच्छे सामाजिक काम सांसद बनकर भी कर सकता हूं। वैसे समाज सेवा तो कर ही रहा हूं। जितनी मेरी ताकत है जितना समय है वह मैं देता हूं। टिकट मिल जाएगा तो जीत कर बताऊंगा। कांग्रेस को नए चेहरे को और युवाओं को मौका देना चाहिए। बदलाव युवा ही ला सकते हैं। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के लिए भिड़ लग जाती है। चुनाव लड़ा तो मेरे साथ युवाओं की फोज होगी और बुजुर्गों का आशीर्वाद भी दिखेगा।

सोचा आगे बढ़े तो फिर मैं पलासिया चौराहे तक आ गया। तब तक दिमाग नहीं चला कि कहां जाना चाहिए। नहले दहले नाम सोचे लेकिन पता चला कि यह दोनों ही सबसे गंभीर उम्मीदवार है। बाकी तो कोई मजाक करने लायक भी नहीं है। रास्ते में बात समझ में आई कि जब दो कांग्रेसी चुनाव लड़ने के लिए उतावले हैं। तो फिर पार्टी हमेशा की तरह टिकट देने में देरी क्यों कर रही है। ऐन वक्त पर टिकट देते हैं। उसके बाद परेशानी आती है, क्योंकि प्रचार के लिए समय भी नहीं मिलता। वैसे इन दोनों की तैयारी भी है पैसा भी है।चुनाव कार्यालय कहां खुलेगा वह जगह भी देख ली है। बस उस मैसेज का इंतजार है जिसमें यह लिखा हो कि इंदौर लोकसभा से इनको टिकट मिल गया। जिस तरह से बीजेपी टिकट नहीं घोषित कर पा रही है। उसी तरह से कांग्रेस भी नहीं कर पा रही हैं। लेकिन एक बड़ा अंतर है यह है कि टिकट के दावेदार सुमित्रा महाजन से लेकर पूरी पार्टी गली गली घूम रही है। नाराज कार्यकर्ताओं को मनाया जा रहा है। नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का हवाला दिया जा रहा है। साथ में यह भी कहा जा रहा है कि यदि दिल्ली में मोदी सरकार बन गई तो फिर प्रदेश की कांग्रेस सरकार को भी निपटा दिया जाएगा। भाजपा की सरकार की प्रदेश में बन जाएगी। बस यही ख्याली पुलाव के साथ कार्यकर्ता सोच रहा है कि फिर एक बार काम पर लग जाएं। हो सकता है कि इस बार उनकी सुनवाई सरकार में हो।

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@राजेश राठौर

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