Super 30 Movie Review: इतनी कठिनाइयों से इस तरह लड़े आनंद कुमार, जानिए पूरी कहानी

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कलाकार- ऋतिक रोशन, मृणाल ठाकुर

निर्देशक- विकास बहल

मूवी टाइप – बायोग्राफी, ड्रामा

अवधि – 2 घंटा 42 मिनट

बॉलीवुड में चल रही बायोपिक की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दर्शकों के सामने आई है ऋतिक रोशन और मृणाल ठुकार की बहुचर्चित फिल्म ‘सुपर 30’। यह बिहार के ऐसे द्रोणाचार्य की कहानी है जिसने अर्जुन को नहीं एकलव्य को महान बनाया। बिहार के जीनियस गणितज्ञ और शिक्षक आनंद कुमार, जिन्होंने अपना खुशहाल करियर छोड़कर, अपने प्यार को कुर्बान कर के 30 ऐसे बच्चों को आईआईटी के लिए पढ़ाया जो बिल्कुल ही साधन विहीन थे। यह फिल्म उनकी कहानी कहती है। 

‘सुपर 30’ में बच्चों की भूख, बेबसी और उनके अविष्कारों के विकास को कहानी में इमोशनल ढंग से पिरोया है। ‘राजा का बेटा राजा नहीं रहेगा’, ‘आपत्ति से अविष्कार का जन्म होता है’ जैसे संवाद तालियां पीटने पर मजबूर कर देते हैं। क्लाइमैक्स और असरकारक हो सकता था।

निर्देशक विकास बहल की फिल्म का फर्स्ट हाफ काफी सधा हुआ है, मगर सेकंड हाफ में कहानी थोड़ी मेलोड्रमैटिक होकर खिंच जाती है। उन्होंने आनंद कुमार से जुड़े विवादों को अपनी कहानी से दूर ही रखा है, अतः उनसे जुड़े आरोपों का फिल्म में कोई जवाब नहीं मिलता, मगर इसमें कोई शक नहीं कि आनंद कुमार के जीवन के संघर्षों, परिवार के साथ उनके जज्बाती रिश्तों और गरीब बच्चों को रास्ते से उठाकर आईआईटियंस बनाने के जज्बे को वे अपने निर्देशन के जरिए बखूबी निभा ले गए हैं।

अभिनय की बात करें तो भारतीय सिनेमा के ग्रीक गॉड कहे जाने वाले ऋतिक रोशन को पहली बार इतने डीग्लैम अवतार में पेश किया गया है जिसमें ऋतिक रोशन पूरी तरह सफल रहे। हालांकि कहीं कहीं बिहारी भाषा में उनके उच्चारण में दोष नजर आता है मगर वह दोष अभिनय पूरी तरह से ढक देता है। मृणाल ठाकुर के पास रोल की ज्यादा लंबाई तो नहीं थी लेकिन जितनी थी उसमें उन्होंने साबित कर दिया कि आने वाले समय में बॉलीवुड उनके ऊपर बड़ा खेल, खेल सकता है।

मृणाल ने छोटी-सी भूमिका में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। नंदीश सिंह प्रणव कुमार की भूमिका में एकदम फिट बैठे हैं। शिक्षा मंत्री के रूप में पंकज त्रिपाठी ने खूब मनोरंजन किया है। पिता के रूप में वीरेन्द्र सक्सेना का अभिनय दिल को छू जाता है। आदित्य श्रीवास्तव, अमित साद और विजय वर्मा ने अच्छा काम किया है।

अजय-अतुल के संगीत में उदित नारायण और श्रेया घोषाल का गाया, ‘जुगरफिया’ गाना मधुर बन पड़ा है। रेडियो मिर्ची के चार्ट पर यह गाना दसवें पायदान पर है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और लेखन भी अच्छा है जो फिल्म का सफल बनान में सहायक है। फिल्म अच्छी है जिसे एक बार जरूर देखा जा सकता है। 

क्यों देखें : अंडरडॉग्ज के संघर्ष और उनकी जीत का जश्न मनाने वाली इस कहानी को जरूर देखें।

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