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लाख टके का सवाल, किसके खाते में जाएंगे मोदी विरोधी वोट | Lok Sabha Election 2019: How many Votes can Modi win from Varanasi?

Posted on: 20 May 2019 18:50 by Surbhi Bhawsar
लाख टके का सवाल, किसके खाते में जाएंगे मोदी विरोधी वोट | Lok Sabha Election 2019: How many Votes can Modi win from Varanasi?

सत्रहवीं लोकसभा चुनाव के नतीजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी के पक्ष में कितने जाते हैं, इससे भी महत्वपूर्ण सवाल है खुद मोदी वाराणसी से कितने मतों से जीत पाते हैं। क्या वे कोई रिकॉर्ड बनाने की स्थिति में है या फिर सामान्य चुनावी जीत ही हासिल कर पाएंगे। बाबा काशी विश्वनाथ की पूजा-आराधना, गंगा आरती के साथ ही चुनाव क्षेत्र के मतदाताओं को रिझाने के लिए सरकारी स्तर पर और पार्टी स्तर पर मोदी ने जो भी प्रयास किए और लोगों ने उन्हें कितनी तवज्जो दी इसकी परीक्षा वाराणसी के चुनाव में ही होगी।

चुनाव के नतीजों को रोड शो के भीड़ से आकलन करना भी बहुत बुद्धिमत्ता वाली बात नहीं, क्योंकि ऐसी ही भीड़ पिछली बार अरविंद केजरीवाल की नामांकन रैली में भी उमड़ी थी और इस बार प्रियंका वाड्रा के रोड शो में भी। कुल जमा बात यह है कि राजनीतिक रैलियों में और खासतौर पर सेलिब्रिटीस की रैलियों में तमाशबीन ज्यादा होते हैं, बनिस्बत समर्थकों के। खैर सातवें चरण के मतदान के बाद यह बहस भी बेमतलब ही हो गई है। अब तो लाख टके का सवाल यह है कि सत्रहवी्ं लोकसभा में वाराणसी के नतीजे क्या रहेंगे।

पिछले चुनाव की बात करें तो नरेंद्र मोदी को कुल जमा 5,81,023 मत प्राप्त हुए थे औऱ उनके विरोधियों को 3,97,722 मत मिले। इसके अलावा 2,051 मत नोटा पर भी गए। यानी इतने मत तो शर्तिया ऐसे थे, जिन्होंने नरेंद्र मोदी को अपमानजनक ढंग से खारिज किया। मोदी को मिले और न मिले मतों का अंतर 1,88,250 था। मोदी विरोधियों को मिले मतों का सवाल है सबसे ज्यादा 2,09,238 मत अरविंद केजरीवाल को, 75,614 मत कांग्रेस के अजय राय को, 60579 बसपा के विजय जायसवाल को और 45,2 9 सपा के कैलाश चौरसिया को मिले थे। इस बार अजय राय फिर मैदान में है।

वे पांच बार इसी संसदीय क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। पिछली बार एकाएक चुनाव मैदान में झोंक दिए गए थे, इस बार काफी तैयारी कर चुके हैं। सपा-बसपा गठबंधन होने से उसकी उम्मीदवार शालिनी यादव को दोनों दलों के वोट मिल सकते हैं। यानी ये दोनों उम्मीदवार एक लाख का आंकड़ा तो पार कर ही सकते हैं। इसके बाद भी केजरीवाल को मिले दो लाख से ज्यादा वोट किसके खाते में जाएंगे, इस बारे में राजनीतिक विश्लेषक भी भरोसे के साथ कुछ कहने की स्थिति में नहीं है।

हालांकि नामांकन पत्र के प्रस्तावकों से लेकर समूचे चुनाव अभियान पर मोदी के साथ शाह ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। यदि सबकुछ ठीक रहा औऱ दो लाख मत और मोदी के खाते में ही चले गए तो वे कीर्तिमान रच सकते हैं। वैसे वाराणसी सीट से एक बार वामपंथी सत्यनारायण सिंह भी चुने गए थे। इसी सीट ने कांग्रेसी नेताओं को सात बार लोकसभा में भेजा, जिनमें दिग्गज कमलापति त्रिपाठी भी शुमार हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी एक बार यहां से लोकसभा में गए। इस सीट पर भाजपा ने पांच बार ही जीत दर्ज कराई है। इसमें पहली बार उत्तरप्रदेश के डीजीपी रहे श्रीशचंद्र दीक्षित ने रामजन्मभूमि आंदोलन की पीठ पर सवार होकर सफलता पाई थी। शंकर प्रसाद जायसवाल तीन बार यहां से सांसद बने। एक बार मुरली मनोहर जोशी चुने गए और एक बार खुद नरेंद्र मोदी। दूसरी बार मोदी के प्रयास क्या गुल खिलाएंगे इस पर सबकी निगाहें लगना लाजिमी है।

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