बिल्डर के डूबने पर उसकी संपत्ति नीलामी में होम बॉयर्स को मिलेगा हिस्सा

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नई दिल्ली। सरकार रियल एस्टेट में होम बॉयर्स के हितों का ध्यान रखते हुए उन्हें बिल्डर की प्रॉपर्टी नीलामी से मिलने वाली रकम में हिस्सा देना तय किया है। यानी अब यदि किसी बिल्डर का प्रोजेक्ट फेल होता है या बिल्डर दिवालिया होता है, या उसके ऊपर बैंक या अन्य वित्तीय संस्थाओं का कर्ज है और वे बैंक या कर्जदाता उस बिल्डर की प्रॉपर्टी नीलामी कर अपना कर्ज वसूलता है, तो ऐसी स्थिति में उस प्रोजेक्ट में जिन लोगों का पैसा फंसा है, उन्हें भी नीलामी से प्राप्त रकम में हिस्सा मिलेगा। building1

सरकार ने होम बायर्स को बड़ी राहत देते हुए इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड में बदलाव को मंजूरी दे दी है। बुधवार सुबह हुई कैबिनेट मीटिंग में कोड में ये मंजूरी दे दी गई। अब बिल्डर के डूबने पर उस प्रोजेक्ट में होम बायर्स का भी हिस्सा होगा। रियलटी सेक्टर की कंपनियों के डूबने की स्थिति में अब तक संपत्ति की नीलामी में बैंक का ही हिस्सा होने की बात थी, लेकिन अब नीलामी में होम बायर्स का भी हिस्सा होगा।
यह कदम उन होम बॉयर्स के लिए राहत है, जिनके पैसे अंडर-कंस्ट्रक्शन रियल्टी प्रॉजेक्ट में फंसे हुए हैं। बैंकरप्ट्सी कोड में बदलाव के लिए गठित समिति ने सिफारिश की थी कि दिवालिया बिल्डर की संपत्ति बेचने पर उन घर खरीदारों को भी हिस्सा दिया जाए, जिन्हें पजेशन नहीं मिला है।

लोन पर तय होगा हिस्सा
होम बॉयर्स को मिलने वाला हिस्सा बिल्डर द्वारा लोन पर आधारित होगा। सरकार का कहना है कि बिल्डर डूबा तो उन घर खरीददारों को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता, जिन्हें पजेशन नहीं मिला है, क्योंकि उनका पैसा उस प्रोजेक्ट में फंसा है। कितना हिस्सा मिलेगा, इसके लिए पहले यह देखा जाएगा कि बिल्डर का कितना पैसा कर्ज बकाया है और कितने लोगों को अब तक मकान का पजेशन नहीं दिया गया है या उसकी कितनी देनदारी है। इसके बाद कितना हिस्सा घर खरीदार को दिया जाए, इसके लिए बैंक और अन्य विशेषज्ञों से बात कर निर्णय लिया जा सकता है। पहले कंपनी से बात किया जाए और उसे इस समस्या को निपटाने के लिए तय समय दिया जाए। अगर कंपनी बात न करे तो तय समय के बाद उसकी प्रॉपर्टी अटैच किया जाए। अगर कंपनी खुद को दिवालिया घोषित करती है तो उसकी पूरी प्रॉपर्टी को अटैच कर उसे तुंरत बेचा जाए।

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