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इंदौरियों की भाषा पर पंकज क्षीरसागर की जबरदस्त टिप्पणी

Posted on: 12 May 2018 11:10 by Ravindra Singh Rana
इंदौरियों की भाषा पर पंकज क्षीरसागर की जबरदस्त टिप्पणी

आप अगली चक्कर, पेले ही पढ़ चुके हैं कि इंदौरी लोग ‘आटोमेटिक’ ट्रांसलेशन की मशीन हैं। वो एकदम डायरेक्ट ‘अंग्रेजी टू हिंदी’ और ‘हिंदी टू इंदौरी हिंदी’ को लगत में एकसाथ बोलते हैं। उनके लिए ‘अगली चक्कर’ शब्द में पास्ट और फ्यूचर दोनों छिपा है। ‘अगली चक्कर अपन मामाजी के कने गए थे ना’, को समझना बहुत इजी आसान है। लेकिन फिर भी, आल टू आल सब सम्पट पड़े, इसलिए ध्यान देना ज्यादा बेटर रहेगा। बातों के बीच में कोई इंटरवल नहीं होगा। आखरी के ‘दी एंड’ तक पढ़ना। पानी में तैरना आना जरूरी है।

अब तीन लोग ट्रिपल निकल लेते हैं। अकेली सिंगल लेडीज़ की इज्जत करते हैं। अंदर पहनने के लिए अंडर वियर खरीदते हैं। सब तेज फास्ट चलते हैं। पेले फर्स्ट रहते हैं। फास्ट के दिन फल-फ्रूट खाते हैं। ठंडा कोल्ड ड्रिंक पीते है। बोलते हैं, दो गिल्लास आम का मैंगो जूस देना। हम नहाते-धोते भी हैं। डेली रोज का टाइम-टेबल रूटीन से फॉलो करते हैं। रिटन में लिखकर देते हैं। वापसी में रिटर्न आते हैं। सबके घर के आगे, सामने वाली फ्रंट साइड में गाड़ी खड़ी रहती है। दाहिने हाथ पर राइट साइट में मुड़ते हैं। हमारे यहां घर के बाहर आउटडोर, अंदर इनडोर, ऊपर आसमान और जमीन के अंदर, अंडर-ग्राउंड बेसमेंट के नीचे पाताल है।

उल्टे हाथ पर लेफ्ट में कटते हैं। गाड़ी चलाने के ट्राफिक रूल्स के नियम-शियम से पालते हैं। गोल चक्कर लगाते हैं। बीचम बीच सेंटर मिलाते हैं। सीधी स्ट्रैट लाइन हिंचते हैं। संडे के रोज दोपहर में लंच और रात को डिनर करते हैं। हल्का लाइट खाते हैं। लास्टम लास्ट वाली आखरी लाइन में बैठने की सीट पर ही बैठते हैं। भिया आप भी सबेरे-सबेरे अर्ली मॉर्निंग वॉक घूमने जाते समय चल्ल लो, तो दिन-भर ताजा फ्रेश रहते हैं। हवाई जहाज में बैठकर ऊपर से बाय-एयर बंबई जल्दी पहुंचोगे। आउट ऑफ़ स्टेशन बाहर गांव घूम आओ। वहां वैकेन्सी खाली रहती है।

आप को बोलकर बता और सुना रहें हैं। यदि लिखने में गलती से मिस्टेक हो गई हो, तो सॉरी माफ़ करना भिया। लेकिन हलके पतले में ले मत लेना।

पंकज क्षीरसाग

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