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वायनाड और रायबरेली में हिंदुस्तान हार गया क्या?: मोदी

Posted on: 26 Jun 2019 17:31 by Surbhi Bhawsar
वायनाड और रायबरेली में हिंदुस्तान हार गया क्या?: मोदी

नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर चर्चा संसद के दोनों सदनों में हुई। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद दिया। इस दौरान पीएम मोदी के निशाने पर कांग्रेस ही थी। उन्होंने कांग्रेस पर चुन-चुनकर हमला किया। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार पर मोदी ने कहा कि 55-60 वर्ष तक देश को चलाने वाला एक दल 17 राज्यों में एक भी सीट नहीं जीत पाया तो क्या इसका मतलब ये हुआ कि देश हार गया?

गुलाम नबी आजाद के बयान का जवाब

मोदी ने इस दौरान कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के उस बयान का भी जवाब दिया जिसमें उन्होंने नरेंद्र मोदी की जीत को देश का हार जाना कहा था। मोदी ने कहा कि इतने बड़े जनादेश को कुछ लोग ये कह दें कि आप तो चुनाव जीत गए लेकिन देश चुनाव हार गया। मैं समझता हूं कि इससे बड़ा भारत के लोकतंत्र और जनता जनार्दन का कोई अपमान नहीं हो सकता।

सवाल पूछते हुए मोदी ने कहा कि मैं पूछना चाहूंगा कि क्या वायनाड में हिंदुस्तान हार गया क्या? क्या रायबरेली में हिन्दुस्तान हार गया? क्या बहरामपुर और तिरुवनंतपुरम में हिंदुस्तान हार गया क्या? और क्या अमेठी में हिंदुस्तान हार गया? मतलब कांग्रेस हारी तो देश हार गया क्या? अहंकार की भी एक सीमा होती है।

मोदी ने कहा कि मैं हैरान हूं, मीडिया को भी गाली दी गई कि मीडिया के कारण चुनाव जीते जाते हैं। मीडिया बिकाऊ है क्या? जो खरीद कर चुनाव जीत लिए जाएं। तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी यही लागू होगा क्या?: ये तक कह दिया कि देश का किसान बिकाऊ है। दो-दो हजार रुपये की योजना के कारण किसानों के वोट खरीद लिए गए। मैं मानता हूं कि मेरे देश का किसान बिकाऊ नहीं हो सकता। ऐसी बात कहकर देश के करीब 15 करोड़ किसान परिवारों को अपमानित किया गया है।

मतदाताओं का सर

राज्यसभा में चर्चा के दौरान मोदी ने मतदाताओं का भी धन्यवाद दिया। इस चुनाव की एक विशेषता है कि ईस्ट, वेस्ट, नॉर्थ, साउथ सभी कोने से बहुमत के साथ बीजेपी और एनडीए जीतकर आया हैं। जो हार गए हैं, जिनके सपने चूर-चूर हो गए वो मतदाताओं का अभिनंदन नहीं कर सकते होंगे। मैं मतदाताओं का सिर झुकाकर कोटि-कोटि अभिनंदन करता हूं

उड़ाया था मजाक

मोदी ने कहा कि कभी सदन में हम भी 2 रह गए थे। हमको 2 या 3 बस, कहकर बार-बार हमारी मजाक उड़ायी जाती थी। लेकिन हमें कार्यकर्ताओं पर भरोसा था, देश की जनता पर भरोसा था। हममें परिश्रम करने की पराकाष्ठा थी और इससे हमने फिर से पार्टी को खड़ा किया। हमने ईवीएम पर दोष नहीं दिया। चुनाव प्रक्रिया में सुधार होते रहे हैं और होते रहने चाहिए। खुले मन से इस पर चर्चा होनी चाहिए। लेकिन बिना चर्चा के ये कह देना कि हम एक देश-एक चुनाव के पक्ष में नहीं हैं, कम से कम चर्चा तो करनी चाहिए। ये समय की मांग है कि देश में कम से कम मतदाता सूची तो एक हो।

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