Ayodhya case : Hindu Mahasabha ने मध्यस्थता के लिए SC में दिए 3 नाम| Hindu Mahasabha proposes three names as mediators in Ayodhya case

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भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट में मध्यस्थता को लेकर सुनवाई की गई। इसका फैसला सुरक्षित रख लिया है।  मध्यस्थता का पहले हिन्दू महासभा ने विरोध किया था, लेकिन अब मध्यस्थता के लिए तैयार हो गए है। हिन्दू महासभा की ओर से तीन नाम सुप्रीम कोर्ट को दे दिए है।

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इस केस की सुनवाई सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस एस. ए. बोबड़े, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डी. वाई. चन्द्रचूड़ और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय पीठ ने की। सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के एक याचिकाकर्ता ने दावा है कि मध्यस्थता के लिए आदेश देने से पहले सार्वजनिक नोटिस जारी करने की आवश्यकता होगी।

इस पर Supreme Court ने कहा कि हम हैरान हैं कि विकल्प आजमाए बिना मध्यस्थता को खारिज क्यों किया जा रहा है। अतीत पर हमारा नियंत्रण नहीं है, किंतु हम बेहतर भविष्य की कोशिश जरूर कर सकते हैं। हिंदू पक्षकारों की ओर से दलील दी गई कि Ayodhya रामजन्मभूमि का मामला धार्मिक और आस्था से जुड़ा है। यह सिपर्फ संपत्ति का विवाद नहीं है। इस पर शीर्ष कोर्ट ने कहा कि जब वैवाहिक विवाद में कोर्ट मध्यस्थता के लिए कहता है तो किसी नतीजे की नहीं सोचता, बल्कि बस विकल्प आजमाना चाहता है। उन्होंने कहा कि हम ये नहीं सोच रहे कि कोई किसी चीज का त्याग करेगा। हम जानते हैं कि ये आस्था का मसला है। हम इसके असर के बारे में जानते हैं।

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सुनवाई के दौरान जस्टिस बोबडे ने कहा कि हम पूरा इतिहास भी जानते हैं। हम आपको बताना चाहते हैं कि बाबर ने जो किया, उस पर हमारा कंट्रोल नहीं था। उसने जो किया उसे कोई बदल नहीं सकता। हमारी चिंता केवल विवाद को सुलझाने की है। उन्होंने कहा कि यह दिमाग, दिल और रिश्तों को सुधारने का प्रयास है। हम मामले की गंभीरता को लेकर सचेत हैं। इसका असर क्या होगा, यह भी जानते हैं। यह मत सोचो कि तुम्हारे हमसे ज्यादा भरोसा है, मगर यह कानून प्रक्रिया है।

उन्होंने कहा कि जब मध्यस्थता की प्रक्रिया चल रही हो तो उसमें क्या कुछ चल रहा है यह मीडिया में नहीं जाना चाहिए। जस्टिस बोबडे ने कहा कि जब मध्यस्थता की प्रक्रिया चल रही हो तो उसमें क्या कुछ चल रहा है यह मीडिया में नहीं जाना चाहिए। हालांकि हम मीडिया पर प्रतिबंध नहीं लगा रहे, परंतु मध्यस्थता का मकसद किसी भी सूरत में प्रभावित न हो। उन्होंनें मध्यस्थता की विश्वसनीयता को बरकरार रखने पर जोर देते हुए कहा कि जब Aypdhya case को सुलझाने के लिए मध्यस्थता चल रही हो तो इसके बारे में खबरें न लिखी जाएं और न ही दिखाई जाएं।

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सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा ये विवाद दो समुदाय का है। सबको इसके लिए राजी करना आसान काम नहीं। इसी बीच मुस्लिम पक्षकार की ओर से पेश राजीव धवन ने कहा कि मध्यस्थता के लिए तैयार है। मध्यस्थता के लिए सबकी सहमति जरूरी नहीं।

इस पर हिंदू पक्षकार की ओर से सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि कोर्ट ने इसे अपने फैसले में दर्ज किया था, वहां सुलह करने जैसा कुछ नहीं। नरसिंह राव सरकार कोर्ट में वचन दे चुकी है कि कभी भी वहां मंदिर का सबूत मिला तो वो जगह हिंदुओं को दे दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अयोध्या एक्ट से वहां की सारी जमीन का राष्ट्रीयकरण हो चुका है।

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि नरसिंह राव सरकार कोर्ट में वचन दे चुकी है कि कभी भी वहां मंदिर का सबूत मिला तो वो जगह हिंदुओं को दे दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इसे अपने फैसले में दर्ज था, वहां सुलह करने जैसा कुछ नहीं है। वहीं सुनवाई केदौरान निर्मोही अखाड़ा मध्यस्थता के लिए तैयार है। रामलला विराजमान और हिंदू महासभा ने कहा कि हम मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं है। इसी बीच Ayodhya case में मध्यस्थता पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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