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हद है यहां पूजन पर भी लगता है टैक्स

Posted on: 03 Feb 2019 08:03 by Pawan Yadav
हद है यहां पूजन पर भी लगता है टैक्स

उज्जैन बाबा महाकालेश्वर की नगरी है। इस देश के प्रमुख तीर्थ स्थल पर भगवान का पूजन करने के लिए भी सरकारी शुल्क टैक्स चुकाना पड़ता है शनिवार को उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थल और 84 महादेव मंदिर में शामिल अंगारेश्वर महादेव पर पूजन करने के लिए गया था यहां पर जाते के साथ ही जानकारी मिली की पहले सरकारी टैक्स जमा कराना होगा उसके बाद ही भगवान का पूजन कर सकते हैं टैक्स जमा करने वाले ने बताया कि यह पैसा मंदिर के विकास हेतु लिया जा रहा है लेकिन मुझे यहां किसी तरह का विकास नहीं दिखा विकास तो दूर मंदिर तक पहुंचने वाली सड़क भी बेहद खराब हालत में है यहां पर भौतिक सुविधाओं के नाम पर भी कुछ नहीं है भगवान के मंदिर पर पूजन का टैक्स जमा करने के बाद जब पूजन करने लगा तो पता चला कि अंगारेश्वर महादेव शिव पिंडी पर अभिषेक पर भी रोक लगा दी गई है, भगवान का यहां पर अभिषेक नहीं किया जा सकता है।

जबकि पहले जब भी में यहाँ पूजन करने गया हूं तब मैंने वेदोक्त रीति से शिव अभिषेक कर पूजन किया। अब यहां पर केवल हार फूल चढ़ाने के लिए ही अनुमति उज्जैन जिला प्रशासन ने जारी की है। बगैर अभिषेक शिव पूजन कैसे हो सकता है यह मुझे समझ नहीं आ रहा। शिव पूजन की जो वेदोक्त रीति है शिव अभिषेक सबसे महत्वपूर्ण ओर एकमात्र उपाय भी है, जो शिव को प्रसन्न कर सकता है। शिव जो स्वयं सभी सभी बातों से दूर हैं उनके नाम पर वसूली और फिर उनका पूजन रीवाज से नहीं करना सीधा-सीधा मुझे संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन जान पड़ा। मैंने जब इस रोक के बारे में पूछा तो बताया गया कि लगभग 7 माह पहले यहां पर ही नहीं उज्जैन के समस्त धार्मिक स्थलों पर मन माने नियम और कानून बनाकर उसके हिसाब से ही पूजन करने के लिए सभी को बाध्य किया जा रहा है।

अंगारेश्वर ओर मंगलनाथ मन्दिर पर सेकड़ो लोगक्योंकि लंबे समय से मैं उज्जैन नहीं आ पाया था। इसलिए मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं थी, लेकिन इस जानकारी उसके बाद मन में एक सवाल आया कि क्या हम आज भी इस देश में आजाद हैं क्या? महज 4 दिन पहले गणतंत्र दिवस को हमने पूरे उत्साह के साथ मनाया था, ऐसे हालत में वह दिन क्या वास्तव में हम अभी भी मना सकते हैं? संविधान में साफ लिखा है जिस देश में रहने वाले सभी व्यक्तियों को अपने धार्मिक रीति रिवाजों को पूरा करने की स्वतंत्रता है तो फिर यह सरकारी बंधन किस हिसाब से लगाए गए और किस नियमों के तहत लगाए गए हैं? क्या इस देश में मुझ जैसे साधारण व्यक्ति को अपने मौलिक अधिकारों का भी हक नहीं है।

पराधीन भारत में भी अंग्रेजों ने भारत वासियों के धार्मिक अनुष्ठानों पर रोक नहीं लगाई थी, लेकिन इस देश के काले अंग्रेज (अफसरों) ने यह रोक लगा रखी है एक और देश की सुप्रीम कोर्ट भारत में संविधान का हवाला देते हुए हिंदू मंदिरों में सभी के प्रवेश को संवैधानिक अधिकार बताती है वहीं दूसरी ओर धार्मिक रीति से पूजन करने पर भी उज्जैन में रोक लगी हुई है। भगवान के पूजन के लिए भी कोर्ट की ही चोखट पर जाना होगा। क्या सरकारों को ये नही दिख रहा है?

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