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जीजाजी संग केबीसी

Posted on: 08 Feb 2019 09:38 by Pawan Yadav
जीजाजी संग केबीसी

अमित मंडलोई

चारों ओर अफसरों से घिरे जीजाजी मध्य में बैठे हैं। एक-एक कर सवाल उछाला जाता है। जीजाजी पहले सवाल लिखते हैं और फिर जवाब भी उन्हें ही लिखना होता है। अंदर सवाल-जवाब चल रहा है और बाहर घमासान मचा हुआ है। कोई कह रहा है, हम सब जानते हैं, आखिर इसी वक्त क्यों ये फाइल खुली है। कोई एक-एक चेहरा बेेनकाब करने का दम भर रहा है।

जीजाजी से पूछा जाता है कि आखिर ये डेल्टा कौन है, जिसके साथ आपकी ईमेल पर बात हुई है। जीजाजी कोई जवाब नहीं दे पाते। अफसर फिर पूछते हैं कि कहीं यह भगोड़ा आर्म्स डीलर तो नहीं है। जीजाजी इधर-उधर देखने लगते हैं। सवाल लिखते हैं और इतना कहते हैं कि मेरा इनसे कोई लेना-देना नहीं है। मैं तो इन्हें जानता तक नहीं हूं कि ये कौन हैं। डेल्टा, अल्फा, चार्ली तो लोग खेल-खेल में भी बना लेते हैं। लगता भी बड़ा इम्प्रेसिव है ना। अफसर अब नया नाम उछालते हैं नाम मनोज का आता है। इस पर जीजाजी कुछ नहीं कह पाते, मानना ही होता है कि इन्हें मैं जानता हूं, क्योंकि ये मेरे पूर्व कर्मचारी थे, लेकिन अब क्या करते हैं क्या नहीं, मुझे कोई जानकारी नहीं है।

तभी एक ई मेल का जिक्र आता है जो जीजाजी ने डेल्टा को किया था। इसमें जीजाजी कहते हैं कि मुझे पता नहीं था कि तुम तक कुछ पहुंचा नहीं है। मैं सुबह ही इस मामले को देखता हूं। निश्चिंत रहो मनोज इस मामले को सुलझा लेगा। यानी वह तुम्हारी व्यवस्था कर देगा। अब मनोज का जिक्र आ ही गया था इसलिए उसकी आसपास मौजूदगी को नकारते भी तो कैसे। स्वीकारना ही पड़ा, लेकिन यह भी जोड़ दिया कि मेरे किसी ईमेल से उसका कोई लेना-देना नहीं था। इतने दखल की गुंजाइश किसी को नहीं है।

अफसर फिर तीसरा नाम उछालते हैं नाम सुमित का है, जो ऐसे ही किसी डेल्टा का कजीन बताया जाता है। उसके जो ईमेल वाड्रा की तरफ सरकाए गए उनमें बड़े दिलचस्प संवाद हुए थे। एक ईमेल में सुमित पूछता है कि किचन में कौन सी टाइल्स लगाई जाना चाहिए। फिर पूछता है कि बाथरूम कैसा लगना चाहिए। यहां तक कि घर की रंगाई-पुताई के बारे में भी सवाल-जवाब होते हैं और ये घर कहीं और नहीं बल्कि लंदन में है। जीजाजी बोल पड़ते हैं लंदन में हमारा कोई घर नहीं साहब और ईमेल की मुझे कोई जानकारी नहीं है। ये और बात है कि जीजाजी ने ऊपर के तमाम ईमेल का बड़ी शिद्दत से जवाब दिया।

फिर बात आई 2009 की पेट्रोलियम डील की। इस डील के तुरंत बाद एक सिनटेक्स कंपनी के खाते में कुछ राशि आई। इस कंपनी के डायरेक्टर वही डेल्टा टाइप सज्जन बताए जाते हैं। इन्हीं सज्जन ने किसी वरटेक्स कंपनी के माध्यम से लंदन में 49.9 लाख डॉलर में एक संपत्ति खरीदी। करीब डेढ़ साल बाद यह संपत्ति जीजाजी से जुड़े किसी लिंक को उतनी ही राशि में बेच दी गई, जबकि खरीदने वाले ने इसके रिनोवेशन पर 65 हजार ब्रिटिश पाउंड खर्च किए थे। है ना कमाल का सौदा।

अब आरोप है कि सिनटेक्स के खाते में जो राशि आई वह पेट्रोलियम डील के एवज में मिली रिश्वत की है, उसी से यह संपत्ति खरीदी गई थी, जिसे घूमा-फिराकर जीजाजी की मिल्कियत में शामिल कर दिया गया। वरना कोई वजह नहीं है कि कोई संपत्ति के रिनोवेशन पर इतनी बड़ी रकम खर्चने के बाद भी उसे उसी कीमत में डेढ़ साल बाद बेच दे। लोग इसे लांड्रिंग कह रहे हैं कि दाग-धब्बे वाला पैसा आया और जीजाजी ने उसे धोकर सारा हिसाब जमा दिया।
कहने वाले कह रहे हैं कि 6 फ्लैट और दो मकान हैं, 112 करोड़ की कुल संपत्ति है। इनको लेकर 40 सवाल पूछे जा चुके हैं। घंटों बात हो चुकी। सब पर ना-ना कह रहे जीजाजी यह जरूर कहते हैं कि मैं जांच में पूरा सहयोग करूंगा। उनका वकील भी यही दोहरा रहा है। आप सोचते रहें कि जांच में सहयोग के मायने क्या हैं।

इधर, अंदर जीजाजी संग केबीसी चल रहा है और बाहर सत्ता के दुरुपयोग-सदुपयोग के पुराण का गगनभेदी वाचन हो रहा है। हालांकि यह भी कम मजेदार नहीं है कि जो ईमेल सबूत की तरह पेश किए जा रहे हैं, उनका खुलासा कोई एजेंसी नहीं बल्कि पार्टी का एक प्रवक्ता कर रहा है। इस केबीसी का बड़ा हिस्सा देश के लोकतंत्र के लिए भी है, उनके जवाब हमें ही ढूंढना होंगे।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। फेसबुक वॉल से साभार

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