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नर्मदा जयंती : जब मां नर्मदा की पूजा करने आया था रावण

Posted on: 12 Feb 2019 12:15 by Pawan Yadav
नर्मदा जयंती : जब मां नर्मदा की पूजा करने आया था रावण

माघ माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को नर्मदा जयंती मनाई जाती है। इस बार 12 फरवरी यानी मंगलवार को नर्मदा जंयती मनाई गई। जगत जननी मां नर्मदा का वर्णन महाभारत और रामायण सहित कई धार्मिक गं्रथों में है। ऐसी ही एक कथा हम आपको को बता रहे हैं।
पुराणों और वाल्मीकि रामायण के मुताबिक लंकापति रावण सभी राजाओं पर विजय प्राप्त करने के बाद महेश्वर (तब महिष्मती नगर) के राजा सहस्त्रबाहु अर्जुन को हराने के लिए महेश्वर पहुंचा। उस दौरान सहस्त्रबाहु अपनी रानियों के साथ नर्मदा नदी में स्नान कर रहे थे। जब रावण को पता चला कि राजा नगर में नहीं है, तो युद्ध करने का विचार त्याग दिया। ऐसे ही विचरण करते हुए रावण जब दल-बल के साथ नर्मदा किनारे पहुंचा, तो वहां जलधारा को देखकर शिव-पूजा करने का निर्णय किया। रावण जहां भगवान शंकर की आराधना कर रहा था, वहीं से थोड़ी दूर महिष्मती के राजा सहस्त्रबाहु अर्जुन अपनी रानियों के साथ जलक्रीड़ा में मग्न थे। पुराणों के मुताबिक राजा सहस्त्रबाहु अर्जुन की एक हजार भुजाएं थीं।

इसी दौरान उसने खेल ही खेल में नर्मदा का प्रवाह रोक दिया। इससे नर्मदा का पानी तटों की ओर बढ़ने लगा। इस दौरान रावण जहंा पूजा कर रहा था, वो स्थान भी डूबने लगा। इससे क्रोधित रावण ने सेना को भेजकर बाढ़ के कारण का पता करने लगाने को कहा। जब सैनिकों ने कारण पता कर रावण को बताया तो उसने सहस्त्रबाहु अर्जुन को युद्ध करने की चुनौती दे दी। इसके बाद नर्मदा तट पर ही दोनों के बीच जमकर युद्ध हुआ। इसमें सहस्त्रबाहु अर्जुन ने रावण को परास्त करते हुए बंदी बना लिया। जब यह बात रावण के पितामाह (दादा) पुलस्त्य मुनि को पता चली, तो वे सहस्त्रबाहु अर्जुन के पास आए और रावण को छोड़ने का आग्रह किया। सहस्त्रबाहु अर्जुन ने रावण को छोड़ दिया और उससे मित्रता कर ली। ऐसी महिमा है नर्मदा तट की।

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