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जब पादरी बनने निकले फर्नांडिस चर्च का पाखंड देख भाग गए थे मुंबई

Posted on: 29 Jan 2019 10:05 by Pawan Yadav
जब पादरी बनने निकले फर्नांडिस चर्च का पाखंड देख भाग गए थे मुंबई

पूर्व रक्षामंत्री मंत्री और महान समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस का स्वाइन फ्लू के कारण मंगलवार को निधन हो गया। इनका राजनीतिक करियर हमेशा शिखर पर रहा है। वायपेयी सरकार में रक्षा मंत्री रहते हुए कई कड़े फैसले लिए इसमें पोखरण में परमाणु परीक्षण फैसला अहम है। 3 जून 1930 को जन्मे जाॅर्ज फर्नांडिस हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, मराठी, कन्नड़, उर्दू, मलयाली, तुलु, कोंकणी और लैटिन भाषा के जानकार थे। उनकी मां किंग जॉर्ज फिफ्थ की बड़ी प्रशंसक थीं, इसलिए उन्हीं के नाम पर अपने छह बच्चों में से सबसे बड़े का नाम उन्होंने जॉर्ज रख।

 

जब जाॅर्ज 16 साल के हुए तो एक क्रिश्चियन मिशनरी में पादरी बनने की शिक्षा लेने भेजे गए, मगर चर्च में पाखंड देख उनका मोहभंग हो गया और दो साल बाद उन्होंने चर्च छोड़ दिया। इसके बाद वह रोजगार की तलाश में बंबई चले गए थे। रोजगार की तलाश के दौरान तंगहाली में वे मंुबई की चैपाटी पर लगी बेंच पर रात गुजरते थे। इसके बाद धीरे-धीरे पहचान बड़ी तो सोशलिस्ट पार्टी और ट्रेड यूनियन आंदोलन में हिस्सा लेने लगे थे। फर्नांडिस राम मनोहर लोहिया के सबसे बड़े प्रशंसक थे। वे 1950 में टैक्सी ड्राइवर यूनियन आलाकमान बन गए। इसके बाद उनका राजनीतिक करियर शुरू हो चुका था।

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