मथुरा में एक हीरोइन हेमा मालिनी का चुनाव प्रचार | Hema Malini’s election campaign in Mathura

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वरिष्ठ पत्रकार ऋषिकेश राजोरिया

गुजरे हुए जमाने की ड्रीम गर्ल अभिनेत्री हेमा मालिनी इस बार फिर मथुरा से लोकसभा चुनाव लड़ रही है। भाजपा ने एक बार फिर उन्हें टिकट दे दिया है। जो भी चुनाव लड़ता है, उसको क्षेत्र में चुनाव प्रचार करना जरूरी होता है, इसलिए हेमा मालिनी भी इन दिनों क्षेत्र में चुनाव प्रचार कर रही हैं। उन्होंने पिछली बार भी चुनाव प्रचार किया था और लोग उन्हें साक्षात देखकर धन्य हो गए थे। हेमा मालिनी किसी क्षेत्र की सांसद कहलाए, इससे बड़ी गर्व की बात उस क्षेत्र के लोगों के लिए क्या हो सकती है? और वह भी भाजपा अर्थात मोदी की पार्टी से, सोने में सुहागा। हेमा मालिनी को जब पिछली बार टिकट मिला था, तब उन्होंने चुनाव लड़ा था। उन्होंने चुनाव क्यों लड़ा और जीतने के बाद क्या किया, शायद वे खुद नहीं जानती। वे लोकसभा में भाजपा के बहुमत में शामिल सांसदों में से एक सांसद हैं। कभी-कभी संसद में चली जाती होंगी, जब किसी विधेयक आदि पर वोट देना होता है।
हेमा मालिनी फिल्म स्टार रही हैं। कई फिल्मों में उन्होंने काम किया है और उन फिल्मों ने जुबलियां मनाई हैं। उन्होंने अपने साथी अभिनेता धर्मेन्द्र से विवाह किया, जो कि पहले से शादीशुदा थे। हेमा मालिनी की सुंदरता के दीवानों की संख्या करोड़ों के पार है। वे उम्र के साठ दशक पूरे कर चुकी हैं और अभी भी सुंदर दिखती हैं। टीवी पर चलने वाले विज्ञापनों में भी वे लगातार दिखाई देती हैं। चुने हुए सांसद को व्यावसायिक उद्देश्य से किसी कंपनी का विज्ञापन नहीं करना चाहिए, यह सैद्धांतिक नियम हेमा मालिनी पर लागू नहीं होता है। किसी ने इस पर एतराज भी नहीं किया।
लोकसभा चुनाव के लिए जब भाजपा के उम्मीदवारों की सूची बन रही थी, तब मथुरा से हेमा मालिनी के नाम के अलावा और किसी पर विचार करने की गुंजाइश नहीं थी। इसलिए उन्हें पक्के तौर पर टिकट मिला और घोषणा के बाद उन्होंने प्रचार शुरू किया। सबसे पहले एक फोटो खिंचवाकर सभी अखबारों में छपवाई और वह सोशल मीडिया पर वायरल हुई कि वे एक खेत में गेहूं की फसल काट रही हैं। हेमा मालिनी ने सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए हंसिया हाथ में रखकर गेहूं की उंबियों के सामने रखा होगा। फोटो शानदार बना। इन दिनों कई जगह गेहूं की फसल की कटाई चल रही है, इसलिए यह फोटो क्षेत्र के सांसद का किसानों के साथ सीधा जुड़ाव प्रदर्शित करता है।
फोटो वायरल होने के बाद हेमा मालिनी ने क्षेत्र में दौरा शुरू किया। लोकसभा चुनाव लड़ना है तो कुछ सभाएं करनी पड़ती हैं, कुछ रोड शो करने पड़ते हैं, जनसंपर्क करना पड़ता है, जिसका अभ्यास हेमा मालिनी को नहीं है। भाजपा संगठन के लोग ही इसका प्रबंध करते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान कई बार वे संगठन के लोगों को भी परेशानी में डाल देती हैं। एक गांव में सभा के लिए भाजपा के स्थानीय पदाधिकारी ने अनुमति ले ली थी, लेकिन तय जगह पर, जो किसी चौक, चौराहे जैसा सार्वजनिक स्थान ही होगा, वहां सभा नहीं हुई। हेमा मालिनी ने स्कूल में सभा करने का फैसला किया, जिसकी अनुमति नहीं ली गई थी। स्कूल में पढ़ाई जारी थी। उसे बीच में रुकवाकर हेमा मालिनी की सभा का इंतजाम किया गया। इस पर आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज हुआ। क्या इससे हमा मालिनी की सेहत पर कोई असर पड़ेगा?
हेमा मालिनी वृंदावन और महावन में रोड शो करने पहुंची। क्षेत्र में लोगों ने एक शानदार मर्सिडीज एसयूवी कार देखी और उसके साथ काफिला था। सैकड़ों की संख्या में लोगों ने हेमा मालिनी को मर्सिडीज कार में सवार देखा। हेमा मालिनी को धूल और धूप रास नहीं आती, इसलिए वे गाड़ी से नहीं उतरती और आंखों पर धूप का चश्मा लगाए रहती है, जिसकी वजह से लोग उनसे नजरें मिलाकर बात नहीं कर सकते। गहरे रंग का चश्मा लगाने के बाद अन्य लोगों से सीधा नेत्र-संपर्क समाप्त हो जाता है। और हेमा मालिनी की आम जनता के बीच घुलने-मिलने में जरा भी रुचि नहीं है। वे हीरोइन हैं और जनता को वे अपने प्रशंसकों के रूप में ही देखती हैं।
हेमा मालिनी को जब भी गाड़ी से नीचे उतरना होता है, तब उन्हें चारों ओर से बाउंसर घेर लेते हैं। एक बाउंसर छाता खोलकर उनके सिर पर तान देता है। इस तरह वे पूरी सुरक्षा में गाड़ी से नीचे उतरती हैं और शानदार मिजाज के साथ आम जनता से दूरी बनाकर रखती हैं। लोग उन्हें दूर से ही देख सकते हैं। हेमा मालिनी उन्हें देखकर मुस्कुरा देती हैं तो वे धन्य हो जाते हैं। भाजपा के वोट पक्के हो जाते हैं। वृंदावन और आसपास के क्षेत्र में ही बड़ी संख्या में वे विधवाएं भी रहती हैं, जिन्हें पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड के लोग शेष जीवन व्यतीत करने के लिए बेसहारा छोड़ जाते हैं। उनकी संख्या हजारों की संख्या में हो सकती हैं। वे किसी पार्टी का वोट बैंक नहीं हैं। हेमा मालिनी को क्षेत्र की महिला सांसद होने के नाते उनकी हालत के बारे में जानकारी है या नहीं, पता नहीं।
मथुरा-वृंदावन के लोगों के लिए यही बहुत बड़ी बात है कि हेमा मालिनी उनकी सांसद हैं। हेमा मालिनी चुनाव के मौके पर उन्हें दर्शन देती रहती हैं, इससे उनका जीवन सफल हो जाता है। हेमा मालिनी ने मथुरा में अपना कोई घर भी बनाया है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। वे क्षेत्र में आसमान से उतरने वाले सांसदों में से हैं। उन्हें सितारा दर्जा प्राप्त है। इस बार भी मथुरा के लोगों के सामने सांसद के रूप में हेमा मालिनी का कोई विकल्प नहीं है। जीवन में भाग्य का महत्व होता है या नहीं, किस्मत की भूमिका होती है या नहीं, यह साबित करने के लिए हेमा मालिनी का जीवन सामने है, जो कभी भाजपा की कार्यकर्ता नहीं रही, वे सीधे सांसद बनीं। भाषण देना नहीं आता, राजनीति में कोई योगदान नहीं फिर भी दूसरी बार मथुरा से भाजपा उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। इसे किस्मत का खेल नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे?

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