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क्या आपने देखा है ग्वालियर का ये आलीशान जयविलास पैलैस

Posted on: 03 Jan 2019 21:47 by krishnpal rathore
क्या आपने देखा है ग्वालियर का ये आलीशान जयविलास पैलैस

ग्वालियर आये आप और जयविलास पैलैस नही देखा तो ग्वालियर आना बेकार ही समझिये अपना ! इस बेहतरीन महल को बनवाया महाराजा जयाजीराव सिंधिया ने ! साल था अठारह सौ चौहत्तर ! उस समय इस महल की बनवाई मे लगे करीब एक करोड रूपये ! अब उस वक्त के रूपये की आज क्या कीमत होगी ये बता पाना मेरे बूते की बात नही ! फिर भी मेरा ख्याल है ये आज इतनी कीमत का तो होगा ही कि एकाध दर्जन एंटिलिया खरीद लिये जायें !

बारह लाख वर्गफीट मे बना चार सौ कमरो वाला ,सफेद झक जयविलास यूरोपीय आर्किटेक्ट और डिजाइन का बेहतरीन नमूना है ! इसके आर्किटेक्ट थे नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित सर माइकल फिलोसे ! इसके एक हिस्से को अब म्यूजियम बना दिया गया है !


इसके भव्य म्यूजियम मे आकर इतिहास से मिल सकेगे आप ! इसमे सिंधिया काल के हथियार ,बग्गियाँ ,कारें ,फर्नीचर ,मूर्तिशिल्प ,पेंटिग्स समेत विदेशों में बनी प्राचीन कलाकृतियाँ देखी जा सकती है ! एक इरानी कालीन भी है यहाँ जो अपनी किस्म का इकलौता कालीन है इसकी खास बात यह है कि इसमे सैकडो की तादाद मे दुनिया भर के शासक उकेरे गये हैं ! ये सब अब एंटीक धरोहरे हैं और इनकी कीमत आँकना बहुत मुश्किल होगा !

ये सब तो है ही एक बडी सी डॉयनिंग टेबल भी है यहाँ , ऐसी डॉयनिंग टेबल जिसपर रेल की पटरियाँ बिछी है ! कभी इन पटरियो पर चलती चाँदी की ट्रैन मेहमानो के लिये खाना लेकर दौडा करती थी ! ये ट्रैन अब भी यहाँ है और आप इसे देख सकते हैं !


इस महल का खास आकर्षण है इसका दरबार हाल ! दीवारो और छत पर सोने की पॉलिश वाले इस दरबार हॉल की खास बात है ,यहाँ की छत से लटके सात टन वजन के बेल्जियम के दो झूमर ! ये खूबसूरत झूमर दुनिया के सबसे वजनदार झूमर हैं !

ये कितने वजनी है इसे ऐसे समझिये कि इन्हे टाँगने से पहले महल के यूरोपियन आर्किटेक्ट माइकल फिलोसे ने महल के छत पर दस दस हाथियों को चढ़ाकर छत की मजबूती आँकी थी ! ये हाथी सात दिनो तक दरबार हाल की छत पर चहलकदमी करते रहे और तब माईकल ये फानूस लगाने के लिये राजी हुये !

एक सौ चालीस साल से टंगे ये झूमर दरबार हाल की छत की मजबूती के गवाह तो है ही ये भी बताते है कि उस वक्त के आर्किटेक्ट अपने काम के प्रति कितने ईमानदार थे !
यदि ग्वालियर आकर भी जयविलास ना देख पाये हो आप तो अगली बार केवल इसे देखने भी ग्वालियर आ सकते है !

 

लेखक- मुकेश नेमा आबकारी अफसर हैं

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