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हरतालिका तीज: 108 वे जन्म मे मां पार्वती को मिले भगवान शिव

Posted on: 08 Sep 2018 15:44 by shilpa
हरतालिका तीज: 108 वे जन्म मे मां पार्वती को मिले भगवान शिव

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इस बार हरतालिका तीज 12 सितंबर को है। हरतालिका व्रत भाद्रपद, शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन किया जाता है। इस दिन गौरी-शंकर का पूजन किया जाता है। इस व्रत में भगवान शिव-पार्वती के विवाह की कथा सुनी जाती है। एक बार यह व्रत रखने बाद जीवनभर रखना होता है। यह व्रत सभी कुआंरी यु‍वतियां व महिलाएं करती है।यह व्रत करवाचौथ से भी कठिन व्रत माना जाता है, इस व्रत में पूरे दिन निर्जल व्रत रखा जाता है। अगले दिन पूजन के बाद ही व्रत खोला जाता है।

पति की लंबी आयु के लिए सौभाग्यवती स्त्रियां और अविवाहित युवतियां मन मुताबिक वर पाने के लिए हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं। सबसे पहले इस व्रत को माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था। कहा जाता है कि पार्वती मां ने भगवान शिव को पाने के लिए 107 जन्म लिए थे। जिसके बाद 108वें जन्म में भगवान शिव ने पार्वती को अपनी अर्धांगनी के रूप में स्वीकार किया था।

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हरतालिका पूजन के लिए
गीली काली मिट्टी या बालू रेत, बेलपत्र, शमी पत्र, केले का पत्ता, धतूरे का फल एवं फूल, अकांव का फूल, तुलसी, मंजरी, जनैव, नाडा, वस्त्र, फूल पत्ते आदि। सुहाग सामग्री- चूड़ी, मेहंदी, सिंदूर, काजल, बिंदी, बिछिया, कंघी, माहौर आदि। पंचामृत के लिए- श्रीफल, कलश, अबीर, चन्दन, कपूर, कुमकुम, घी-तेल, दीपक, दही, शक्कर, दूध, शहद।

पूजन विधि
हरितालिका तीज के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती है। इस दिन शंकर-पार्वती की बालू या मिट्टी की मूति बनाकर पूजन किया जाता है। घर साफ-सफाई कर तोरण-मंडप आदि सजाया जाता है। आप एक पवित्र चौकी पर शुद्ध मिट्टी में गंगाजल मिलाकर शिलिंग, रिद्धि-सिद्धि सहित गणेश, पार्वती व उनकी सखी की आकृति बनाएं। इसके बाद देवताओं का आवाहन कर पूजन करें। इस व्रत का पूजन पूरी रात किया जाता है। प्रत्येक पहर में भगवान शंकर का पूजन व आरती होती है।

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