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राजनीति का कठोर परिश्रम

Posted on: 15 May 2018 05:24 by Surbhi Bhawsar
राजनीति का कठोर परिश्रम

कर्नाटक चुनाव के नतीजों पर वरिष्ठ पत्रकार राजेश राठौर की टिप्पणी-

हिंदुस्तान की आजादी से लेकर अब तक जितने भी चुनाव हुए उनमे से ये चुनाव काफी अलग था. पहले चुनाव इस तरह से नहीं होते थे कि पूरी ताकत झोंकनी पड़ती थी। इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव को छोड़कर लगता नहीं था कि किसी चुनाव में इतनी मेहनत हुई हो। अब कांग्रेस के लंबे शासन के बाद जबसे देश की सत्ता की बागडोर नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे नेताओं के हाथ में आ गई है, तब से भारत का चुनावी परिदृश्य पूरी तरह से बदल गया है।

अब 24 घंटे फैक्ट्री की तरह काम होता है। पार्टी काम करती है, उस फैक्ट्री में कितना उत्पादन हो रहा है, कितना माल बिक रहा है, कितना माल खराब हो रहा है, माल किस कीमत पर बिक रहा है। यदि प्रतिस्पर्धा किसी और कंपनी से है तो माल की रेट कैसे गिराया जाए माल की गुणवत्ता कैसे बनाई जाए और इन सबसे बढ़कर किस तरह से उसकी मार्केटिंग की जाए। यह काम नरेंद्र मोदी और अमित शाह की टीम से बेहतर अभी तो कोई नहीं कर पा रहा है।Image result for मोदी शाहजिस तरह से अमित शाह 24 घंटे में से 16-18 घंटे रोज मशीन की तरह चुनाव के लिए काम करते हैं, वह हिंदुस्तान के इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित हो गया है। जिस तरह का अमित शाह का काम करने का तरीका है जो रोज बदलाव करते हैं, ऐसा बाकि कोई ओर नेता नहीं कर पाता। क्या कारण है कि राहुल गांधी युवा होने के बावजूद आज भी राजनीति में चुनावी समय को छोड़कर 400 घंटे से ज्यादा राजनीति नहीं करते या राजनीति का कामकाज नहीं करते।

एक तरफ ऐसा अध्यक्ष हो जो 18 घंटे काम करने की ताकत रखता हो और दूसरी तरफ ऐसा अध्यक्ष हो जो बार-बार विदेश चला जाता हो या 4-5 घंटे काम करने के बाद थक जाता हो। ऐसे अध्यक्ष से कांग्रेस का भविष्य गर्त में दिखाई देता है। राहुल गांधी लगता है दिल से राजनीतिज्ञ नहीं है और दिमाग भी उनका राजनीति में कमजोर साबित हो गया है। कांग्रेस के गढ़ में कर्नाटक में जिस तरीके से भाजपा ने सेंध लगाई वह वाकई अमित शाह की पीठ थपथपाने का काम है। अमित शाह ने देशभर के भाजपा के मुख्यमंत्री, केंद्र सरकार के गृहमंत्री और कई राज्य सरकारों के कैबिनेट मंत्री के साथ-साथ संघ के नेता और संगठन के नेताओं को हर चुनाव में मैदान में दौड़ आने दिया।Related imageयही कारण है कि 1-1 करते बीजेपी ने देश के 21 राज्यों मेंराज कर रही है, वही कांग्रेस सिर्फ 3 राज्यों में बची है। चुनावी मैनेजमेंट अमित शाह का कितना खतरनाक है कि कम समय लेकर भी ज्यादा विधानसभा क्षेत्र कवर किए। मोदी और अमित शाह की सभाओं के अलावा बाकी मुख्यमंत्रियों की सभाओं में भी अलग-अलग क्षेत्रों में अपना रंग जमाया। यही कारण है कि आज कर्नाटक में कमल खिल गया है।Image result for राहुल गांधी

सबसे बड़ी बात यह है कि हिंदुस्तान की राजनीति में ही मेरा सोचना है कि पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी पार्टी का प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष दोनों रोज 16 से 18 घंटे काम करते हैं। डिसीजन तत्काल लेना उस पर काम करना काम के दौरान यदि सफलता मिलती है तो काम का तरीका बदलना। किसी भी मामले में नए जमाने और नए तरीके से काम करना। उसके अलावा नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जुगलबंदी लगता है, अब इशारों में काम कर रही है। यही कारण है कि दोनों के बीच अभी तक इसी तरह के विवाद की खबरें सुनने को नहीं मिली।Image result for मोदी शाहदोनों के बीच भाइयों और दोस्ताना जैसा रिश्ता है, नरेंद्र मोदी अमित शाह की तारीफ करने में कभी कंजूसी नहीं करते। आश्चर्यजनक बात यह है कि अमित शाह ने मोदी की सभाओं का कार्यक्रम भी ऐसा बनाया कि कम सभाएं करने के बावजूद ज्यादा विधानसभा क्षेत्र कवर किए। तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कर्नाटक चुनाव में भाजपा की जबरदस्त चुनावी जीत केस स्टडी का विषय बन गया है। भारतीय राजनीति में मोदी और अमित शाह भी कोई गलती नहीं करते ऐसा नहीं है।

इन सबके बावजूद चुनाव लड़ने के मामले में तो दोनों की मास्टरी हो गई है। जिस तरह का प्लान बनाते हैं उससे लगता है कि देश की राजनीति के सारे पुराने रिकॉर्ड टूटते जा रहे हैं। अब तो राहुल गांधी को सोचना चाहिए कि उन्हें कांग्रेस को बचाना है ।लोकसभा चुनाव में सम्मानजनक सीटें जीतना है तो आज से ही 16 घंटे काम करना पड़ेगा ।यदि अब राहुल गांधी ने 1 घंटे भी काम कम किया तो उसका नुकसान सीधे-सीधे कांग्रेस को होगा। हर चुनाव में भाजपा पूरे देश के नेताओं को लगा देती है, लेकिन कांग्रेस में संगठन कमजोर हो गया है।Related imageइस कारण कोई रणनीति बनाने वाला नहीं है। गुलाम नबी आजाद से लेकर चिदंबरम और तमाम पुराने आउटडेटेड नेताओं से कांग्रेस को दूर कर दे। सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे युवाओं को कांग्रेस की बागडोर दे तभी कांग्रेस पार्टी का कुछ हो सकता है।

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