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भिंड में अब बन्दुक नहीं हैंडपंप है शान | Handpump is the New Status Symbol in Bhind

Posted on: 10 May 2019 15:33 by Parikshit Yadav
भिंड में अब बन्दुक नहीं हैंडपंप है शान | Handpump is the New Status Symbol in Bhind

भिंड में अब लोग बंदूक छोड़ चुके है , उन्होंने अपना नया स्टेटस सिंबल हैंडपंप को बना लिया है। सांसद भागीरथ प्रसाद कहते हैं कि समय बदला है और कई लोग चाहते हैं कि उनके घर के सामने या आंगन में हैंडपंप लगा हो। स्थानीय लोग इस काम में प्रगति के लिए राजनीतिक प्रतिनिधियों से संपर्क करते हैं। भिंड लोकसभा सीट पर रविवार को चुनाव होने हैं। इस हिस्से में लंबे वक्त तक असलहे साथ लेकर चलना स्टेटस सिंबल माना जाता रहा है।, यहां पर ठाकुरों और ब्राह्मणों का बोलबाला रहा है। कई वर्षों पहले जब इस क्षेत्र से डकैतों का सफाया किया जा रहा था, उस दौरान सरकार असलहों का लाइसेंस भी बड़ी आसानी से लोगों को उपलब्ध कराती थी। यही नहीं, यहां पर बंदूक की दुकान का व्यापार सबसे तेजी बढ़ा, लेकिन वक्त गुजरने के साथ ही प्राथमिकताओं में भी तब्दीली आ गई। अब लोग अपना हैंडपंप चाहते हैं।

बढ़ रही है ट्यूबवेल की संख्या

डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर जे. विजय कुमार का कहना है कि सिर्फ भिंड की बात की जाए तो यहां 22,752 असलहों के लाइसेंस हैं। अब लोग खास तौर पर अपने ट्यूबवेल होने पर ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। वह कहते हैं, ट्यूबवेल की संख्या जल्द ही बंदूक के लाइसेंस की गिनती को पार कर जाएगी। अब तक ये आंकड़े 20,170 पहुंच चुके हैं और लगातार बढ़ रहे हैं।भाजपा विधायक अरविंद भदौरिया अटेर विधानसभा क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं। यहां पर हैंडपंपों की संख्या सबसे अधिक 5196 है। वह कहते हैं, हर तीसरे घर से हैंडपंप की मांग की गई है। एक हैंडपंप लगाने में तकरीबन एक लाख रुपए का खर्च आता है और मेरे पास विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए 2 करोड़ रुपए हैं।

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