मुसीबत में पड़ सकती है H1B वीजा पॉलिसी से भारतीय I.T. कम्पनियां

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h 1b visa policy may result in losses on domestic it companies

बेंगलुरु: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में बदलाव करने का प्रस्ताव रखा है. इस रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में अमरीकी मास्टर्स डिग्री वालों को वीजा में प्राथमिकता देने की बात कही गई है. अगर ऐसा होगा तो भारतीय आई.टी. कम्पनियों को अमरीकी क्लाइंट्स को सर्विस देने के लिए मिलने वाले वीजा में कटौती होगी.

अमेरिका की यू.एस. जनरल सर्विसेज एडमिनिस्ट्रेशन ने एक नोट में कहा है कि, वह ‘बाय अमेरिकन एंड हायर अमेरिकन’ पॉलिसी के तहत वीजा चुनाव प्रक्रिया में बदलाव करने की सोच रहा है. यह सुझाव पहली बार साल 2011 में पेश किया गया था. इसका उद्देश्य H-1B आवेदन के चुनाव प्रक्रिया को बेहतर बनाना था. यू.एस. सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सॢवसेज (यू.एस.सी.आई.एस.) को प्रवासियों को वीजा देने का अधिकार है.

यू.एस. जनरल सर्विसेज एडमिनिस्ट्रेशन कहना है कि इस बदलाव से ऐसे लोगों को वीजा मिलने की संभावना बढ़ेगी जिनके पास अमरीका की मास्टर्स डिग्री है. अमरीका के द्वारा प्रति वर्ष कुशल पेशेवरों को 65,000 H-1B वीजा ऑफर करता है. इसके साथ ही अमेरिका 20,000 वीजा मास्टर्स डिग्री या उससे ऊंची शिक्षा लेने वालों प्रवासियों को देता है. सामान्यतः एजेंसी पहले मास्टर्स डिग्री वालों के वीजा आवेदन पर विचार करती है और उसके बाद बचे हुए आवेदनों को जनरल पूल को ऑफर करने के बारें में सोचती है. प्रस्तावित नियम में यू.एस.सी.आई.एस. सभी आवेदकों को 65,000 वीजा पूल में रखेगी.

इसके खत्म होने के उपरांत उच्च डिग्री रखने वालों के आवेदन को 20,000 वाले वीजा पूल में रखा जाएगा. अमरीकी राजनीतिक न्यूज साइट पॉलिटिको ने डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार के अनुसार इससे अमरीका से हायर एजुकेशन हासिल करने वाले 15 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को वीजा मिल सकता है.

भारतीय I.T. कम्पनियां अधिकतर बैचलर डिग्री रखने वालों को हायर करती हैं, इसलिए उनके लिए संभावित वीजा कोटा कम हो सकता है. कुछ आई.टी. कम्पनियां स्ट्रिक्ट वीजा रूल्स के चलते पहले ही मार्जिन में कमी का सामना कर रही हैं.

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