राज्यपाल से मिले महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद पद्मश्री डॉ विकास महात्मे

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नीमच जिले में आने वाले नीमच कैंट और मनासा पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी पुलिस अधिकारी एक व्यक्तिगत मामले में संपूर्ण गायरी जाति के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी लिखे जाने के विरोध में सोमवार को महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद और धनगर समाज नेता पद्मश्री डॉ विकास महात्मे ने गायरी समाजजनो के साथ राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से राजभवन में भेंट कर सबंधित पुलिस अधिकारी पर कारवाई की मांग की।सांसद महात्मे ने बताया कि  नीमच कैंट और मनासा पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी द्वारा दिनांक 23-09-2018 को जारी दो आदेेशों में किसी व्यक्तिगत द्वेष के चलते बिना किसी प्रमाण और अधिकार के भारत के संविधान की और सर्वोच्च न्यायपालिका की अवमानना, केंद्र और राज्य सरकार की भावनाओं की अनदेखी और  करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत करते हुए पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान की केंद्र पुण्य श्लोका देवी स्वरूपा इंदौर की  न्यायप्रिय शासिका प्रातः स्मरणीय देवी अहिल्या बाई के वंशज और उनकी पूरी जाति और समाज को कुख्यात अपराधी और तस्कर घोषित कर दिया है।

संविधान में ये स्पष्ट है कि किसी भी व्यक्ति को अपराधी या निर्दोष घोषित करना न्यायपालिका का विशेष अधिकार है पुलिस किसी भी व्यक्ति की जांच कर सकती है लेकिन उसे अपराधी घोषित नहीं कर सकती पर इसकी अवमानना करते हुए 23/09/2018 को जारी एक आदेश में नीमच कैंट थाने के थाना प्रभारी ने आरोपित धर्मेंद्र पिता मदनलाल गायरी के संबंध में एक कार्यालयीन आदेश जारी करते हुए करते हुए लिखा है कि – “उक्त आरोपी गायरी जाति के सदस्य है, जो नीमच, मंदसौर एवं चितोड़गढ जिले में मादक पदार्थ तस्करी करनेवाली कुख्यात्त जाति है एवं इस जाति के लोग अवैध तस्करी कर काफी धनाड्य हो चुके है एवं इनके लोग राजनितिक रूप से सक्रिय होने के कारण समय-समय पर पुलिस एवं एजंसियो पर दबाव निर्मित करते है एवं पुलिस कार्यवाही का विरोध करते है साथ ही एक नेटवर्क के रूप में अपने इस काले धंधे को संचालित करते है।”

ठीक इसी तरह का एक अन्य आदेश इसी दिनांक को नीमच के मनासा थाने के थाना प्रभारी ने आरोपित लालुराम रामलाल गायरी के संबंध में जारी आदेश में इस प्रकार की आपतिजनक टिप्पणी लिखी है- “उक्त आरोपी गायरी जाति के सदस्य है, जो नीमच, मंदसौर एवं चितोड़गढ जिले में मादक पदार्थ तस्करी करनेवाली कुख्यात्त जाति है एवं इस जाति के लोग अवैध तस्करी कर काफी धनाड्य हो चुके है एवं इनके लोग राजनितिक रूप से सक्रिय होने के कारण समय-समय पर पुलिस एवं एजंसियो पर दबाव निर्मित करते है एवं पुलिस कार्यवाही का विरोध करते है साथ ही एक नेटवर्क के रूप में अपने इस काले धंधे को संचालित करते है।”

गायरी धनगर समाज की एक उपजाति है। इंदौर की पूर्व शासिका पुण्य श्लोका देवी अहिल्या बाई होलकर सहित इंदौर का होलकर वंश धनगर समाज का ही हिस्सा है।  दो  थाना प्रभारियों ने  इस समाज और इसकी उपजाति को बिना किसी आधार के कुख्यात अपराधी और तस्कर बताकर देवी अहिल्या बाई होलकर का और देश के सविधान का अपमान किया है। यहां ये बताना भी उचित होगा कि हाल ही में धनगर समाज की सभी उपजातियों को  मध्यप्रदेश सरकार ने  घुमक्कड़ और अर्ध घुमक्कड़ जनजाति की अनुसूची 30 में शामिल किया है।

अपने आदेश में धनगर गायरी जाति (समाज) के लोगों का अपमान करने वाले  सबंधित पुलिस अधिकारियों ने  अपने जजमेंट के पक्ष में कोई आधार या तर्क  नहीं दिया है। केवल पूर्वग्रह एवं विद्वेष के कारण ही उक्त तथ्यहीन टिप्पणी की गई है। सम्पूर्ण गायरी जाती समाज, जो की विमुक्त घुमक्कड़ एवं अर्ध घुमक्कड़ जनजाति वर्ग में सम्मिलीत है और मध्यप्रदेश में धनकर, धनगड, धनगर, गड़ेरिया इत्यादि नाम से जानी जाता है, उक्त टिप्पणी के कारण बहुत रोष है।हमें  ये भी आशंका है कि इस ज्ञापन के बाद  नीमच पुलिस और उक्त अधिकारी धनगर समाज के लोगों को इरादतन पीड़ित कर सकते है।  इसलिए हम हमारी निम्मलिखित मांगे तुरंत प्रभाव से मंजूर करने की अपील करते है।

1. मनासा और नीमच केेंट पुलिस थाना प्रभारी निरीक्षक ने उनकी रिपोर्ट दि.23/09/2018 मे संपूर्ण  धनगर समाज और गायरी जाति को मादक पदार्थ तस्करी करणे वाली कुख्यात जाति है  ऐसा उल्लेख करके आदेश पारित किया है। इसका मतलब उन्होने स्वयं ही न्यायाधीश बनकर न्यायालीन व्यवस्था के उपर जाकर संविधान का उल्लघन किया है, उन्होंने न्यायालय की आवश्यकता न समझते हुए उसकी अवमानना की है, इसके साथ ही पुलिस विभाग ने स्वयं को न्यायालय समझ कर स्वयं ही न्याय देकर संविधान की अवमानना की है। पुलिस विभाग के थाना प्रभारी द्वारा संपूर्ण गायरी जाति का अपमान किया गया है। इस दंडनीय अपराध के लिये उन्हे तत्काल निलंबित करके कानूनन शिक्षा दि जाये।

2. पुलिस विभाग द्वारा इस आपतिजनक टिप्पणी के लिए बिनाशर्त गायरी समाज की जाहिर माफ़ी मांगी जाये।

3. इस समाज पर पूर्वाग्रह के चलते होने वाले अत्याचार और उपरोक्त अपराध की पुलिस विभाग को छोड़कर अन्य विभाग द्वारा निष्पक्ष जाँच हो। संविधान के मूल भावना के अनुरूप एवं कानून के मुताबिक, दोषी साबित ना होने तक किसी व्यक्ति को आरोपीत व्यक्ति (Accused) माना जाता है न की गुनाहगार। नीमच पुलिस द्वारा सबंधित आरोपी व्यक्तियों के जाति के सबंध में आप्पतिजनक टिप्पणी लिखे जाने से पुरे समाज के उपर बदनामी के दाग को कृपया शीघ्र से शीघ्र से दूर कर गायरी समाज को न्याय दिलाये और हमारी उक्त मांगे मंजूर हो यह विनम्रता पूर्वक आपसे अनुरोध करता हु।

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