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सरकार किसानों का दमन बंद करे, वर्ना कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी : कमल नाथ

Posted on: 03 Jun 2018 14:34 by Praveen Rathore
सरकार किसानों का दमन बंद करे, वर्ना कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी : कमल नाथ

भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने रविवार का शिवराज सरकार को आड़े हाथों लिया, किसान आन्दोलन के मामले में सरकार को उन्होंने चेतावनीपूर्ण लहजे में कहा कि सरकार किसानों का दमन बंद करे, अन्यथा कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि किसान शांतिपूर्ण ढंग से अपना पूर्व घोषित आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन शिवराज सरकार उनके दमनचक्र पर उतारू हैं। आंदोलन के पूर्व हजारों सीधे-साधे किसानों से शांति भंग के बांड भरवाये गये और उन्हें धमकाया भी गया। पूर्व से ही हैरान-परेशान किसान इन सब बातों को सहता रहा। लेकिन शिवराज सरकार का दमनचक्र और बढ़ता जा रहा है।

किसानों के लिए आपातकाल जैसे हालत बना दिए

कमलनाथ ने कहा कि शिवराज सरकार अपना दमचक्र चलाते हुए शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन कर रहे बेकसूर किसानों पर निरंतर झूठे मुकदमे डाल जेलों में ठूसने का काम कर रही है। जगह-जगह नाकेबंदी कर किसानों को रोककर उनकी तलाशी ली जा रही है, उन्हें परेशान किया जा रहा है और धमकाया भी जा रहा है। मंडियों में आने-जाने वाले किसानों को भी रोककर धमकाया व परेशान किया जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि प्रदेश में किसानों के लिए अघोषित आपातकाल लागू हो चुका है, उन्हें विरोध करने का अधिकार ही नहीं बचा है। किसानों की आवाज को कुचला जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को लोकतंत्र में मिले शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को शिवराज सरकार कुचल रही है। प्रदेश में पहली बार ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। किसान पुत्र के राज में आंदोलनरत किसानों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी की सरकार किसानों का दमन रोकें, वरना कांग्रेस चुप नही बैठेगी।

प्रदेश शर्मसार हो रहा है

कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश में पिछले दो सप्ताह में नौ किसानों की जान जा चुकी है। पूरे प्रदेश में अपनी मांगों को लेकर हैरान-परेशान किसान सड़कों पर आंदोलन कर रहा है। कल भी तीन किसानों ने कर्ज के बोझ के कारण खुदकुशी कर ली। वहीं अशोकनगर में महिला वनकर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर मुंडन तक करवाया। प्रदेश के ढाई लाख संविदाकर्मी व विभिन्न कर्मचारी वर्ग अपनी मांगों को लेकर निरंतर संघर्ष कर रहे हैं। आज जरूरत है, दुखी, पीडि़त किसानों व इन वर्गों से संपर्क की, लेकिन इन्हें छोड़कर प्रदेश के मुखिया व उनकी सरकार फिर से सत्ता प्राप्त करने के लिए ‘‘संपर्क फॉर समर्थन अभियान’’ पर निकल चुकी है।सरकार को आंदोलन कर रहे इन वर्गों से कोई लेना देना नहीं है। वह तो बंद कमरों में विशिष्टजनों से दोबारा सत्ता प्राप्ति के लिए समर्थन हेतु संपर्क पर निकल चुकी है।
कमलनाथ ने कहा है कि प्रदेश का पीडि़त, दुखी किसान, कर्मचारी व अन्य वर्ग आशा भरी निगाहों से सरकार की ओर देख रहे हैं कि सरकार उनके दुःख में ढांढस बंधाकर उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लेगी, लेकिन सरकार इन सब बातों से बेखबर महासंपर्क अभियान में व्यस्त है।

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