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राम मंदिर पर सियासी गणित दुरुस्त करने में लगी सरकार

Posted on: 04 Feb 2019 11:35 by Ravindra Singh Rana
राम मंदिर पर सियासी गणित दुरुस्त करने में लगी सरकार

सतीश जोशी

सुप्रीम कोर्ट में आवेदन के जरिये मोदी सरकार ने न सिर्प अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर भाजपा की प्रतिबद्धता का संदेश देने की कोशिश की है बल्कि सियासी गणित भी दुरुस्त करने का प्रयास किया है। यही नहीं, विपक्ष को भी चुनावी जमीन पर घेरने की तैयारी इसके पीछे दिख रही है। आम चुनाव से ठीक पहले जब साधु-संत सरकार पर राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने के लिए दबाव बना रहे हैं तब सरकार ने गैर-विवादित जमीन को वापस लौटाने की मांग कर बीच का रास्ता एक तरह से निकालने का प्रयास किया है।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या की गैर-विवादित जमीन मूल स्वामी को देने की अर्जी देकर यह जता दिया है कि वह चुनाव से पहले राम मंदिर के लिए ठोस पहल करती हुई दिखना चाहती है। विवादित जमीन पर जब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला आता है तब अगर गैर-विवादित जमीन मिल गई तो उस पर राम जन्मभूमि न्यास मंदिर निर्माण की शुरुआत कर सकता है और इससे भाजपा अपने एक महत्वपूर्ण वादे के लिए प्रतिबद्ध दिखेगी। यह सच है कि नरसिंह राव सरकार ने 1993 में अयोध्या कानून के तहत विवादास्पद स्थल के चारों ओर की यह जमीनें इसीलिए अधिगृहित की थीं ताकि वहां किसी प्रकार की ऐसी गतिविधि न हो जिससे तनाव पैदा हो सके। वह समय छह दिसम्बर 1992 को बाबरी ध्वंस से निपटने का था। भय यह था कि कहीं मंदिर निर्माण की कोशिश न हो जाए।

आज काफी समय बीत चुका है। यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में गया था, जिसने अधिग्रहण को तत्काल सही ठहराया लेकिन कहा था कि जिनकी जमीनें हैं, उनको वापस मिल सकती हैं, बशर्ते वह इसके लिए अर्जी दायर करें। इसमें से 42 एकड़ जमीन राम जन्मभूमि न्यास की है, जिसका गठन मंदिर निर्माण के लिए किया गया था। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई में लगातार विलंब हो रहा है। इसके बार-बार टलने से सरकार निराश है। सरकार को महसूस हो रहा है कि आम चुनाव से पूर्व सुप्रीम कोर्ट से कोई भी फैसला मुश्किल लग रहा है। सुप्रीम कोर्ट भी लगता है कि इसका हल सरकार निकाले और वह कोई भी फैसला देने से बचे रहें। इसीलिए बार-बार सुनवाई टलती जा रही है।

ऐसा लगता है कि फिलहाल सरकार इस मामले में अध्यादेश के विकल्प को अपनाने के पक्ष में नहीं है। इसीलिए रातोंरात सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर गैर-विवादित भूमि को वापस देने की मांग की गई। सरकार को उम्मीद है कि जो गैर-विवादित भूमि है। उसे मामले के निपटारे से पहले संबंधित मालिकों को लौटाने में ज्यादा दिक्कत इसलिए नहीं होनी चाहिए क्योंकि इस मामले में हाई कोर्ट का आदेश भी है। सरकार का कहना है कि उसकी मांग से विवादित 0.313 एकड़ भूमि को अलग रखा गया है। जिस भूमि को लौटाने का अनुरोध किया है, उस पर मुस्लिमों द्वारा कभी दावा नहीं किया गया है। इस जमीन पर कोई और विवाद नहीं है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। फेसबुक वॉल से साभार।

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