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छोटी-सी दुकान से शुरुआत कर करोड़ों की कंपनी खड़ी कर दी गोपाल साबु ने

Posted on: 31 May 2018 10:38 by Praveen Rathore
छोटी-सी दुकान से शुरुआत कर करोड़ों की कंपनी खड़ी कर दी गोपाल साबु ने

इंदौर में 1955 में जन्मे गोपाल साबु आज देश के साबुदाना कारोबार में जाना पहचाना नाम है। 34 साल की उनकी मेहनत और कुशल नेतृत्व में साबु ट्रेड प्रालि आईएसओ 9001:2008 कंपनी बन चुकी है। साबुदाना, साबुदाना पापड़ के बाद उन्होंने अपने कारोबार को विस्तार देते हुए हल्दी, खोपरा बूरा और मोरधन भी अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया और आज देशभर में ये प्रोडक्ट गुणवत्ता के साथ पहुंचा रहे हैं। 1993 में उन्होंने पहली बार दुबई यात्रा की और वहां साबुदाने का एक्सपोर्ट शुरू किया। कालांतर में एक्सपोर्ट कारोबार भी बढ़ता गया और उन्होंने एक नई फर्म एक्सपोर्ट के लिए बनाई। घमसान डॉटकॉम ने इंदौर प्रवास के दौरान उनसे बातचीत की। प्रस्तुत है प्रमुख अंश… sabu8

सवाल : आपका जन्म इंदौर में हुआ और आपने कर्मस्थली सेलम (तमिलनाडु) को बनाया,इसके पीछे क्या कारण है?
जवाब : 1955 में मेरा इंदौर में जन्म हुआ। पिताजी का कारोबार कलकत्ता में था, इसलिए पढ़ाई कलकत्ता में हुई। पढ़ाई पूरी होने के बाद 1976 में कारोबार के लिए सेलम शिफ्ट हो गया, वहां सालों तक साबुदाना व्यापार में दलाली की।1984 में साबु ट्रेडर्स के नाम से छोटी सी दुकान से अपने कारोबार का श्रीगणेश किया। इससे पहले साबु ट्रेडर्स की स्थापना कर एगमार्क में साबुदाना के कारोबार शुरू किया। 1993 में सबसे पहले दुबई गया और चूंकि मुझे क्वालटी की समझ थी, तो मैंने एक्सपोर्ट कंपनी साबु एक्सपोर्ट कंपनी बनाई और इस कंपनी को 1996 में आईएसओ सर्टिफिकेट मिला। इसके बाद कारोबार धीरे-धीरे बढ़ाया। 2007 मैन्युफेक्चरिंग में आए। sabu0

सवाल : कारोबार का तीन दशक का सफर कैसा रहा?
जवाब : 1984 में साबु ट्रेडर्स (श्रीमती कौशल्या देवी साबु के स्वामित्व) व मेरे प्रबंध में प्रोप्राइटर फर्म की शुरुआत की। इस फर्म के माध्यम से बहुत कम पूंजी में स्टार्च और साबुदाना के कारोबार का श्रीगणेश किया। ग्राहकों के विश्वास और हमारी बेहतर सेवा एवं क्वालिटी से कभी समझौता नहीं किया, इस कारण धीरे-धीरे कारोबार बढ़ता गया। घरेलू बाजार में देशभर में नेटवर्क फैलाने के बाद अब नजरें विदेशी बाजार पर थी। 1993 में दुबई की यात्रा की और साबु एक्सपोर्ट प्रा.लि. की नींव रखी। यह सेलम से सीधे निर्यात करने का पहला कदम था। 2006 में नवीनीकरण के तहत कंपनी को साबु ट्रेड प्रालि नाम दिया गया। इसी वर्ष मेरे दोनों पुत्र विकास साबु और विशाल साबु ने भी कारोबार में प्रवेश किया। 2007 में हमने पनामारुथुपट्टी जिला सेलम में प्लांट की नींव रखी।2010 में खोपरा बूरा और 2011 में हल्दी के कारोबार में पदार्पण किया। sbau10

सवाल : अभी आप कितने प्रोडक्ट बना रहे हैं।
जवाब : हमारा मुख्य काम पैकेजिंग से शुरू हुआ था, कालांतर में मैन्युफेक्चरिंग शुरू की। फिलहाल हम साबु ब्रांड से साबुदाना और पापड़ एवं अल्पाहार ब्रांड से हल्दी, खोपरा बूरा और मोरधन बेच रहे हैं। क्वालिटी वाइज इनके लगभग 50 वेरिएंट हो जाते हैं। हमारे लिए क्वालिटी ही सर्वोपरि है। यह कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी कि कंपनी का दिल परंपरा से जुड़ा है तो दृष्टिकोण आधुनिक है। हम हमेशा उत्पादों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। यही कारण है कि हमारे प्रोडक्ट शिकायत रहित है और हमें ग्राहकों का भरपूर प्यार और समर्थन मिल रहा है।

सवाल : बिजनेस के साथ आप सामाजिक संस्थाओं से भी जुड़े हैं?
जवाब : सेलम में माहेश्वरी मंडल की स्थापना की। उस समय सेलम में केवल 11 परिवार ही माहेश्वरी समाज के थे। वहां अन्य सामाजिक संस्थाओं में से भी जुड़ा हूं।

सवाल : आपकी हॉबी क्या है?
जवाब : किताबे पढऩा, दोस्त बनाना, कम्प्यूटर पर सर्च करना, नये-नये विषय में अध्ययन करना मेरी हॉबी है।

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