अपने कर्मचारियों के मरने के बाद भी साथ नहीं छोड़ता Google, ऐसे देता है परिवार का साथ

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आज के समय लगभग हर इंसान गूगल का इस्तेमाल करता है. हाल ही में गूगल को दुनिया में 21 साल हो गए हैं. इसे बनाने वाले लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने गूगल को तब तैयार किया था, जब वह स्‍टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में Ph.D. कर रहे थे. जन्म से लेकर अब तक गूगल हर चीज़ को एक अलग तरीके से पेश किया है. गूगल के बारे में ऐसा बहुत कुछ है जो अब तक आप नहीं जानते होंगे. आज हम आपको गूगल के कुछ ऐसी ही रोचक बाते बताने जा रहे हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गूगल का नाम वास्‍तव में एक मैथमेटिकल टर्म से लिया गया है, ‘googol’ है, जिसमें एक के आगे सौ शून्‍य लगे होते हैं. बेहद कम ही लोग जानते है कि गूगल का पहले कुछ और नाम था. जी हां, गूगल का पहले ‘Backrub’ नाम था.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, साल 1998 में 30 अगस्‍त को गूगल-डूडल लगाया गया था. दरअसल, लैरी और सर्गेई, नेवाड स्‍थ‍ित एक बर्निंग मैन फेस्‍ट‍िवल में गए थे. उन्‍होंने बर्निंग मैन फेस्‍ट‍िवल की फोटो होमपेज पर लगा दी, ताकि अपने यूजर्स को वह ये बता सकें कि वो दोनों ऑफिस में नहीं हैं और इस दौरान किसी प्रकार की टेक्‍निकल परेशानी होने पर वे उसे ठीक नहीं कर पाएंगे.

ख़बरों के मुताबिक, अमेरिका में Google कर्मचारियों को डेथ बेनेफिट मिलता है, जो इस बात की गारंटी देता है कि कर्मचारी के जीवित पति या पत्नी को अगले दशक तक हर साल उनके वेतन का 50% राशि मिलेगी.

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