‘कोजगर-व्रत’ से प्रसन्न होगी मां लक्ष्मी, देगी सुख-समृद्धि

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sharad poornima

Goddess Lakshmi will be pleased with Kozgar fast gives prosperity

आश्विन मास की पूर्णिमा को रखा जाने वाला व्रत ‘कोजागर व्रत’ के नाम से जाना जाता है। इस व्रत से प्रसन्न हुईं माँ लक्ष्मी इस लोक में तो समृद्धि देती ही हैं और शरीर का अंत होने पर परलोक में भी सद्गति प्रदान करती हैं।

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इस पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा ही कहा जाता है।इस दिन मनुष्य विधिपूर्वक स्नान करके उपवास रखे। अगर आप की व्यवस्था हो तो ताँबे अथवा मिट्टी के कलश पर वस्त्र से ढँकी हुई स्वर्णमयी लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित उनकी पूजा करें, सायंकाल में चन्द्रोदय होने पर सोने, चाँदी अथवा मिट्टी के घी से भरे हुए 111 दीपक जलाए।

अब आप खीर तैयार करे और बहुत-से पात्रों में डालकर उसे चन्द्रमा की चाँदनी में रखें कुछ समय बाद तब लक्ष्मीजी को वो खीर अर्पण करें। भक्तिपूर्वक ब्राह्मणों को इस प्रसाद रूपी खीर का भोजन कराएँ और उनके साथ ही मांगलिक गीत और भजन गाकर रात्रि जागरण करें। सुबह स्नान करके लक्ष्मीजी की वह स्वर्णमयी प्रतिमा किसी ब्राह्मण को अर्पित करें।

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इस प्रकार प्रतिवर्ष किया जाने वाला यह कोजागर व्रत लक्ष्मीजी को संतुष्ट करने वाला है। मध्यरात्रि में देवी महालक्ष्मी अपने कर-कमलों में वर और अभय लिए संसार में विचरते हुए संकल्प करती हैं कि इस समय भूतल पर जो जागकर मेरी पूजा कर रहा है उस मनुष्य की सारी इच्छाएँ पूर्ण कर के उसको मैं आज धनवान बना दूँगी।

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