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बर्बादी की ओर ले जाती शादी से इंकार कर रही हैं लड़कियां

Posted on: 30 Jan 2019 16:57 by Ravindra Singh Rana
बर्बादी की ओर ले जाती शादी से इंकार कर रही हैं लड़कियां

पूजा देशपांडे

सचमुच जमाना बदल रहा है। खासतौर पर महिलाओं में जिस तेजी के साथ जागरूकता आ रही है, उसे देखकर यही लगता है कि कुरीतियां जल्द ही काफूर हो जायेंगी। यह जरूरी भी है। ऐसे दौर में ज्यादा जबकि भारत उन्नति के शिखर पर पहुंच रहा है। अब तक कहा जाता रहा है कि महानगरों तक कहा जाता रहा है कि महानगरों की महिलाआएं कुप्रथा आदि के खिलाफ खड़ी होती हैं, किंतु गांवों में तो अंधविश्वास, पुरातन रीति रिबाजों से बंधी जिंदगी जीने को मजबूर हैं औरतें।

किंतु ऐसा नहीं है, जब जागरूकता अपना कदम बढ़ाती है तो उसकी रोशनी कोने-कोने तक फैलती है, फिर चाहे धीरे-धीरे ही क्यों न फैले, मगर फैलती जरूरी है और इसका सीधा कारण है शिक्षा। महिलाओं के साथ अत्याचार में सबसे ज्यादा विवाह के समय और विवाह के बाद होने वाले अत्याचार की खबरें आती हैं। कहीं दहेज के कारण हत्या तो कहीं तलाक, कहीं निरंतर उपभोग की वस्तु जानकर शोषण। हालात ऐसे हो गये थे कि महिला होना अभिशाप महसूस होने लगा था, किंतु अब ऐसा नहीं है।

अब धीरे-धीरे उन्हें अपने अधिकारों की जानकारियां प्राप्त होने लगी हैं और अब वे डट कर मुकाबला करने के लिए तैयार हो रही हैं। इस कथन को पुख्ता करती हैं वे सत्य घटनाएं, जिसमें औरत ने अपना रास्ता खुद अख्तियार किया और वो कुरिवाज के आगे झुकी नहीं, किसी बंधन में बंधी नहीं, किसी समाज के हाथों कठपुतली बनी नहीं रही। उसने सामना किया परिस्थितियां, उन दहेज लोभियों का, जो सामाजिक उलाहना दे-देकर शोषण करते हैं।

आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारात लानी हो तो पहले काफी सोच-विचार कर लाना बेहतर होगा, क्योंकि आप न तो लडक़ी को अल्ला की गाय समझिए और न ही दहेज का कोई लोभ मन में रखिये यहां की लडक़ी पढ़ी-लिखी तो है ही साथ ही अपने अधिकारों को अच्छी तरह समझने लगी हैं। पिछले एक महीने में शादी टूटने के करीब दस घटनाएं घटित हुई हैं, जिन्होंने लड़कियों की जागरूकता का परिचय दिया है। पश्चिमी उत्तरप्रदेश का एक गांव है खुडलिया।

यहां के निवासी विजयपाल ने अपनी लडक़ी देवेंद्र की सगाई मुजफ्फरनगर जनपद के मंसूरपुर थाना क्षेत्र के गांव दूधाहेड़ी निवासी राजपाल के पुत्र प्रदीप से १३ जनवरी को की थी। लडक़ी के पिता विजयपाल ने दस्तूर के हिसाब से नकदी और सामान भी लडक़े वालों को दिया। मगर वे वर पक्ष ने जैसा कि आमतौर पर होता है वधु पक्ष से अपनी मांगे रखीं, उसने २० हजार रुपए और एक मोटर साइकिल की दहेजनुमा मांग रखी। विजयपाल इंतजाम करता इसके पहले लडक़ी देवेंद्री ने ऐसी जगह विवाह करने से इंकार कर दिया, जो दहेज के लोभी हैं। जब लडक़े का पिता राजपाल खुड़लिया आया तो लडक़ी के कहेनुसार ग्रामीणों ने उसे बंधक बना लिया है और दूधाहेड़ी खबर भिजवा दी कि सगाई में जितना सामान व नकद दिया है वह लौटा दें और राजपाल को छुड़ाकर ले जायें।

दूसरी घटना बुलंदशहर जनपद के कस्बा बुगरासी निवासी रहीस कुरैशी ने अपने बहन का रिश्ता गाजियाबाद के गांव नाहल में तय किया। १९ जनवरी को निकाह तय था। तैयारियां हो रही थीं, दूल्हे मिया ने इतनी शराब पी ली कि वे सरेआम नशे में धुत जमीन पर गिर पड़े। यह पता लगते ही दुल्हन ने निकाह से इंकार कर दिया और कहा कि उसे शराबी पति नहीं चाहिए। बारात को बैरंग लौटना पड़ा। वहीं बहादुरगढ़ निवासी अख्तर कुरेशी अपने पुत्र मशरुफ के साथ विवाह समारोह में मौजूद थे, उन्होंने मायूस कुरैशी से अपने पुत्र की बात की और मशरुफ का निकाह उनकी बहन के साथ हो गया।

तीसरी घटना मुकीमपुर खजूरवारा निवासी रामवीर की बेटी कृष्णा का विवाह पारसा, बुलंदशहर निवासी पिंटू तथा गीता का विवाह हर्रा खिवाई (मेरठ) निवासी विमल के साथ हुआ। तीसरी बेटी सीमा का विवाह विमल के भाई अमित से तय हुआ और बारात उसके घ आयी। विमल के पिता ताहर सिंह ने पिंटू के पिता पर व्यंग्य किया, छींटाकशी ने विवाद का रूप ले लिया। इस पर रामवीर ने निर्णय लिया कि वे सीमा का विवाह अमित से नहीं होने देंगे। सीमा ने भी अपने पिता पर कसे गये कटाक्ष व व्यंग्यबाणों का जवाब शादी से मनाही के साथ दिया।

ग्रामीणों ने मेरठ के खेड़ा गांव के सुधीर से सीमा का रातोंरात रिश्ता तय किया और खुशी के माहौल के साथ विवाह संपन्न हुआ।
चौथी घटना-बुलंदशहर के बीवीनगर में दहेज की मांग करने वाले वर पक्ष को दुल्हन ने ऐसा सबक सिखाया कि वह जिंदगी भर नहीं भूल सकता। हुआ यूं कि दुल्हन ने ऐन मौके पर जब जयमाल पहनाई जा रही थी, तो माला पहनाने से इंकार कर दिया। ग्रामीणों के साथ परिवार वालों ने पूरी बारात को बंधक बना लिया तथा तभी रिहा किया, जब दहेज के रूप में पहले ही ले रखा सामान लौटा न दिया।

पांचवी घटना : बंदायूं जिले में एक जगह फेरे के समय जब लडक़ा गिर पड़ा तो लोगों ने समझा वह मिर्गी का मरीज है। लडक़े ने स्वयं को स्वस्थ तथा बीए पास नौकरीपेशा बताया था। मगर बाद में जब पता चला तो वह आठवीं फेल था। दुल्हन ने शादी का जोड़ा उतार फेंका, अपने माथे पर लगा सिंदूर पोंछ डाला और मनाकर दिया कि वह झूठे लडक़े के साथ शादी नहीं कर सकती। इसी तरह की एक और घटना है-१३ जनवरी को हापुड़ नामक एक गांव में खुद को नेवी का अफसर बताने वाले दूल्हे की, जब पोल खुली तो लडक़े ने बीच फेरे में उसे रोक दिया और शादी के लिए मना कर दिया।

बात बुलंदशहर की है, १७ जनवरी के दिन चढ़त की रस्म के दौरान वर घोड़ी पर नहीं चढ़ पाया, क्योंकि उसके दोस्तों ने उसे शराब पिला दी थी। वहीं मौजूद लडक़ी के मामा ने नजारा देख लिया और अपनी भांजी का हाथ उसके हाथ में देने से मना कर दिया। लडक़ी ने मामा की बात मान ली और बारात लौटा दी।

एक के बाद एक कई घटनाएं पिछले महीने घटित हो गई हैं, जो साबित करती हैं कि आजकल की लड़कियों को किसी दबाव के चलते बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता। उनमें भी अव्वल हैं, वे भी दुनिया जानती हैं और अपने जीवन को कहां, कैसे निखार सकें उन्हें बखूबी आता है।
इसलिए होशियार हो जाने की जरूरत है उन दहेज लोभियों को जो समाज की कुप्रभा को अधिकारित तौर पर दुल्हन के परिवार पर थोपते हैं। वो दिन गुजर गये जब लड़कियां मजबूर थीं। अनपढ़ थीं। अपने अधिकारों को जानने से वंचित रह जाया करती थीं। अब २१वीं सदी का उन्नत भारत है, खुशहाल भारत है और उसकी महिलाएं चांद-सितारे तोड़ सकती हैं।

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