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देश के पहले लोकपाल बने घोष, राष्ट्रपति ने दिलवाई शपथ | Ghosh becomes the first Lokpal of the country, President administers oath

Posted on: 23 Mar 2019 11:13 by Pawan Yadav
देश के पहले लोकपाल बने घोष, राष्ट्रपति ने दिलवाई शपथ | Ghosh becomes the first Lokpal of the country, President administers oath

देश को आखिरकार पहला लोकपाल मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शपथ दिलवाई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू और भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई भी मौजूद रहे।

जस्टिस घोष इससे पहले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के जज रह चुके हैं। जस्टिस घोष वर्तमान में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य भी हैं और मानवाधिकार कानूनों के जानकार के तौर पर उन्हें माना जाता है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मुहर के बाद सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस पीसी घोष देश के पहले लोकपाल नियुक्त किए गए हैं। वहीं एसएसबी की पूर्व प्रमुख अर्चना रामसुंदरम और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन को लोकपाल के गैर न्यायिक सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व जज घोष फिलहाल राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, कानूनविद् मुकुल रोहतगी की चयन समिति ने पूर्व जज पिनाकी चंद्र घोष को देश का पहला लोकपाल बनाने की सिफारिश की थी।

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मोदी सरकार 10 दिन में बताए कब होगी लोकपाल कमेटी की बैठक : सुप्रीम कोर्ट

लोकपाल नियुक्ति के मामले में गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार 10 दिन में बताए कि लोकपाल सेलेक्शन कमेटी की बैठक कब होगी। इस दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि 28 फरवरी को सर्च कमेटी ने लोकपाल के लिए नामों का पैनल सेलेक्ट कमेटी को भेजा है। साथ ही लोकपाल के न्यायिक और गैरन्यायिक सदस्यों के लिए भी पैनल भेजा गया है। इस पर पीएम की अध्यक्षता वाली सेलेक्ट कमेटी इस पर फैसला लेगी।

इधर, कमेटी की तरफ से सौंपे गए नामों को सार्वजनिक करने की याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण की मांग कोर्ट ने ठुकरा दी गई है। सुनवाई के दौरान जब चीफ जस्टिस ने पूछा कि सेलेक्ट कमेटी में नेता-विपक्ष का क्या होगा। इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि नेता-विपक्ष के न होने की वजह से सबसे बड़ी विपक्षी दल के नेता को विशेष सदस्य के तौर पर आमंत्रित किया जाता है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सर्च कमेटी का गठन नहीं होने पर नाराजगी जताई थी। इस पर सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बताया था कि नियम के तहत सर्च कमेटी का सदस्य बनने योग्य लोगों को चुनने में समय लगेगा। इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से चार हफ्ते में हलफनामा दायर कर जानकादी देने की बात कही थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले को लेकर फैसला सुरक्षित रखा

इससे पहले बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में Ayodhya Case में मध्यस्थता को लेकर सुनवाई हुई। इस केस की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एस. ए. बोबड़े, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डी. वाई. चन्द्रचूड़ और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय पीठ ने की। सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के एक याचिकाकर्ता ने दावा है कि मध्यस्थता के लिए आदेश देने से पहले सार्वजनिक नोटिस जारी करने की आवश्यकता होगी।

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इस पर Supreme Court ने कहा कि हम हैरान हैं कि विकल्प आजमाए बिना मध्यस्थता को खारिज क्यों किया जा रहा है। अतीत पर हमारा नियंत्रण नहीं है, किंतु हम बेहतर भविष्य की कोशिश जरूर कर सकते हैं। हिंदू पक्षकारों की ओर से दलील दी गई कि Ayodhya रामजन्मभूमि का मामला धार्मिक और आस्था से जुड़ा है। यह सिपर्फ संपत्ति का विवाद नहीं है।  इस पर शीर्ष कोर्ट ने कहा कि जब वैवाहिक विवाद में कोर्ट मध्यस्थता के लिए कहता है तो किसी नतीजे की नहीं सोचता, बल्कि बस विकल्प आजमाना चाहता है। उन्होंने कहा कि हम ये नहीं सोच रहे कि कोई किसी चीज का त्याग करेगा। हम जानते हैं कि ये आस्था का मसला है। हम इसके असर के बारे में जानते हैं।

सुनवाई के दौरान जस्टिस बोबडे ने कहा कि हम पूरा इतिहास भी जानते हैं। हम आपको  बताना चाहते हैं कि बाबर ने जो किया, उस पर हमारा कंट्रोल नहीं था। उसने जो किया उसे कोई बदल नहीं सकता। हमारी चिंता केवल विवाद को सुलझाने की है। उन्होंने कहा कि यह दिमाग, दिल और रिश्तों को सुधारने का प्रयास है। हम मामले की गंभीरता को लेकर सचेत हैं। इसका असर क्या होगा, यह भी जानते हैं। यह मत सोचो कि तुम्हारे हमसे ज्यादा भरोसा है, मगर यह कानून प्रक्रिया है।

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उन्होंने कहा कि  जब मध्यस्थता की प्रक्रिया चल रही हो तो उसमें क्या कुछ चल रहा है यह मीडिया में नहीं जाना चाहिए। जस्टिस बोबडे ने कहा कि जब मध्यस्थता की प्रक्रिया चल रही हो तो उसमें क्या कुछ चल रहा है यह मीडिया में नहीं जाना चाहिए। हालांकि हम मीडिया पर प्रतिबंध नहीं लगा रहे, परंतु मध्यस्थता का मकसद किसी भी सूरत में प्रभावित न हो। उन्होंनें मध्यस्थता की विश्वसनीयता को बरकरार रखने पर जोर देते हुए कहा कि जब Aypdhya case को सुलझाने के लिए मध्यस्थता चल रही हो तो इसके बारे में खबरें न लिखी जाएं और न ही दिखाई जाएं। सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा ये विवाद दो समुदाय का है। सबको इसके लिए राजी करना आसान काम नहीं। इसी बीच मुस्लिम पक्षकार की ओर से पेश राजीव धवन ने कहा कि मध्यस्थता के लिए तैयार है। मध्यस्थता के लिए सबकी सहमति जरूरी नहीं।

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इस पर हिंदू पक्षकार की ओर से सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि कोर्ट ने इसे अपने फैसले में दर्ज किया था, वहां सुलह करने जैसा कुछ नहीं। नरसिंह राव सरकार कोर्ट में वचन दे चुकी है कि कभी भी वहां मंदिर का सबूत मिला तो वो जगह हिंदुओं को दे दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अयोध्या एक्ट से वहां की सारी जमीन का राष्ट्रीयकरण हो चुका है।

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि नरसिंह राव सरकार कोर्ट में वचन दे चुकी है कि कभी भी वहां मंदिर का सबूत मिला तो वो जगह हिंदुओं को दे दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इसे अपने फैसले में दर्ज था, वहां सुलह करने जैसा कुछ नहीं है। वहीं सुनवाई केदौरान निर्मोही अखाड़ा मध्यस्थता के लिए तैयार है। रामलला विराजमान और हिंदू महासभा ने कहा कि हम मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं है। इसी बीच Ayodhya case में मध्यस्थता पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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