ग़ज़ल | Ghazal

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gajal

परवाना सरकारी रख ।
राग सभी दरबारी रख ।।

दाल रखी तरकारी रख ।
रोटी गरम करारी रख ।।

आग जले चाहे दिल में ।
होठों पर फुलवारी रख ।।

जैसे मिसरी घोली हो ।
बोली मीठी प्यारी रख ।।

करजा लेने दैने की ।
दूर अलग बीमारी रख ।।

नंगा नाचे सङकों पर ।
कुछ तो परदादारी रख ।।

बात सही तेरी लेकिन ।
कुछ तो बात हमारी रख ।।

गीत गजल पढना है तो ।
” हीरा ” फिर तैयारी रख ।।

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