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गौरव ने ऐसा फंडा दिया कि बंद होते रेस्टोरेंट सरपट दौडऩे लगे

Posted on: 13 Jun 2018 09:08 by Praveen Rathore
गौरव ने ऐसा फंडा दिया कि बंद होते रेस्टोरेंट सरपट दौडऩे लगे

इंदौर। खान-पान के शौकीनों के शहर में जितने तेजी से रेस्टोरेंट खुलते हैं, उतनी ही तेजी से बंद भी हो जाते हैं। कई लोग इस बिजनेस में घाटा उठा चुके हैं। इसबीच इंदौर में गौरव पडिय़ार ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर प्रोग्राम लांच किया, जिसकी मदद से कई बंद होने की कगार पर पहुंच चुके रेस्टोरेंट सरपट दौडऩे लगे। गौरव के इस सॉफ्टवेयर प्रोग्राम के आज इंदौर से लेकर मुंबई, पूना और राजस्थान तक के यूजर हैं। घमासान डॉटकॉम से गौरव पडिय़ार ने विशेष बातचीत में अपने करियर की कहानी साझा की…

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गौरव बतात हैं, वे एक प्राइवेट कंपनी में सेल्स एक्जीक्यूटिव थे। उन दिनों कई आइडिया दिमाग में हिलोरे ले रहे थे। इसलिए सोचा कुछ प्रयोग करना चाहिए। सबसे पहले उन्होंने हमारा ऑफर डॉटकॉम स्टार्टअप शुरू किया। उसके बाद दो अन्य प्रोडक्ट कूपन कॉन्सेप्ट पर लांच किए। इसके बाद कुछ लोग ऐसे संपर्क में आए, जिनके रेस्टोरेंट घाटे के चलते बंद करने का निर्णय ले चुके थे। तब मैंने इंटरनेट पर काफी सर्च किया और एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम बनाया। एक आउटलेट के लिए यह जरूरी है कि कौनसा कस्टमर आया और उसके बाद उसने आना बंद कर दिया। यदि कस्टमर रिपिट नहीं होते हैं, तो यह चिंताजनक है। दूसरा कस्टमर का फीडबैक लेना, इसके लिए हम एसएमएस से फीडबैक लेते हैं। इससे यह मालूम पड़ जाएगा कि हमारी सर्विस कैसी चल रही है। कुल मिलाकर कस्टमर का रिपिट रेशो बढ़ जाता है। तीसरा है, टेक्नालॉजी। रेस्टोरेंट कोई टेक्नालॉजी का उपयोग नहीं करते हैं, यदि हम कस्टमर को टेक्नालॉजी का उपयोग कर कैश बैक जैसे ऑफर देते हैं। इसके लिए खुद की वेबसाइट बनाना भी जरूरी नहीं है। कस्टमर का वॉलेट बनाना होता है। कैशबैक जैसे ऑफर देना और माउथ पब्लिसिटी से ज्यादा असरदार होती है। इस तरह दोस्तों को लिंक शेयर करते हैं तो कस्टमर को कैशबैक का फायदा मिलता है और रेस्टोरेंट को कस्टमर मिलते हैं। कुल मिलाकर इस सॉफ्टवेयर से सर्विसप्रदाता को तीन माह में रिजल्ट मिलने लगते हैं।

बिंगेज आईटी लैब्स के प्रोप्रायटर गौरव पडिय़ार बताते हैं कि मैंने बॉयलॉजी की पढ़ाई की और आज आईटी सेक्टर में काम कर रहा हूं। हालांकि इसके लिए उन्हें काफी संघर्ष भी करना पड़ा। गौरव बताते हैं कि पढ़ाई के सिलसिले में कुशलगढ़ (राजस्थान) के गांव कसारवाड़ी से इंदौर आए थे। मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे गौरव के पिताजी की गांव में किराना की दुकान है। अपना करियर शुरू करने के नजरिए से उनके सामने उदयपुर, कोटा और इंदौर जैसे तीन शहर में जाने के अवसर थे, उन्होंने इंदौर को चुना। प्रारंभिक दौर में उन्होंने एक निजी कंपनी में सेल्स एक्जीक्यूटिव की नौकरी की, उसके बाद उनका चयन नेस्ले कंपनी मुंबई में हो गया। कुछ दिन यहां नौकरी करने के बाद गौरव ने अपना स्टार्टअप शुरू किया। शुरुआती दौर में दो तीन प्रोडक्ट लॉन्च किए, लेकिन ये सक्सेस नहीं हुए, लेकिन गौरव निराश नहीं हुए। चूंकि पुश्तैनी गांव वापस लौटना नहीं चाहते थे, इसलिए इंदौर में रहकर ही कुछ नया करना चाहते थे, वे लगातार प्रयास करते रहे। अंतत: उन्होंने बिंगोगे नामक सॉफ्टवेयर बनाया, जिसको मार्केट ने हाथोहाथ लिया। इस सॉफ्टवेयर प्रोग्राम में गौरव जीआरएम सॉल्यूशंस, लायल्टी प्रोग्राम, फीडबैक सिस्टम और बिलिंग सेवाओं के लिए काम आता है। आज की तारीख में इस सॉफ्टवेयर प्रोग्राम का सैकड़ों क्लाइंट उपयोग कर रहे हैं।

गौरव बताते हैं, ये सॉफ्टवेयर रेस्टोरेंट, बैकरी, रिटेल काउंटर सहित कई सेक्टर के लिए काफी उपयोगी साबित हो रहा है। गौरव बताते हैं कि नॉवेल पढऩा, हॉलीवुड और बॉलीवुड की फिल्में देखना और घूमना-फिरना उनको पसंद है।

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