टाइगरों की गिनती में फर्जीवाड़ा, कागजी शेरों पर ही मना ली खुशी

देश में टाइगरों की संख्या बढ़ तो रही है, लेकिन पंद्रह साल में सरकार ने जो दावा किया, उस हिसाब से यह काफी ज्यादा है। 1635 तस्वीरों की जांच में 221 ऐसी थीं, जिन्हें अलग-अलग नंबरों से रिकॉर्ड में शामिल किया गया।

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नई दिल्ली। सरकार ने 29 जुलाई को देश में टाइगरों की संख्या के जो आंकड़े जारी किए थे, वे पिछली बार के मुकाबले काफी बढ़े हुए थे। लोगों को शक न हो, इसके लिए 83 फीसद की तस्वीरें भी वेबसाइट पर जारी की गईं। 2015 में देश में टाइगरों की तादाद इस हिसाब से 73 फीसद कम थी। अब पता चला है कि ज्यादा टाइगर बताने में भी झोल-झाल किया गया है।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अफसरों ने जब इन फोटो का मिलान किया, तो पता चला कि कई फोटो के नंबर अलग हैं, लेकिन टाइगर एक ही है। दरअसल, इंसानी फिंगर प्रिंट की तरह ही हर टाइगर के शरीर पर अलग धारियां होती हैं। हालांकि, देश में टाइगरों की संख्या बढ़ तो रही है, लेकिन पंद्रह साल में सरकार ने जो दावा किया, उस हिसाब से यह काफी ज्यादा है। 1635 तस्वीरों की जांच में 221 ऐसी थीं, जिन्हें अलग-अलग नंबरों से रिकॉर्ड में शामिल किया गया। समझने के लिए आंकड़ों में एक टाइगर की तस्वीर हर सातवें टाइगर की तस्वीर के बाद जोड़ दी गई।

वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के सर्वे में पता चला कि 51 तस्वीरें ऐसी थीं, जिनका दो बार इस्तेमाल किया गया। टाइगरों की गिनती तो की गई, लेकिन तस्वीरों में इन्हें कई बार दिखाया गया है। यह बात भी सामने आई कि टाइगरों की गिनती में बड़ों को तो गिना गया, लेकिन छोटों पर ध्यान नहीं दिया गया। सरकार बारह से अठारह महीने के टाइगर को ब”ाा मानती है। ऐसों की संख्या 46 बताई गई। टाइगरों की गिनती के लिए एक टाइगर के लिए दो कैमरे अलग-अलग जगह लगाए गए और दोनों तस्वीरों को अलग-अलग टाइगर का बताया। एक टाइगर ओडिशा के बांदीपुर का बताया गया, तो उसी की तस्वीर को जिम कार्बेट नेशनल पार्क वाले टाइगर का बता दिया गया।

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