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फायर ग़ायब बस ब्रांड बचे हैं तोगड़िया !

Posted on: 11 Jun 2018 15:10 by krishnpal rathore
फायर ग़ायब बस ब्रांड बचे हैं तोगड़िया !

बच्चा बच्चा राम का जन्मभूमि के काम का और जो हिंदू हित की बात करेगा वही देश पर राज करेगा जैसे जोशीले नारों के साथ प्रवीण तोगड़िया (अब जो अपने नाम का जिक्र करते हुए डॉ जोड़ना नहीं भूलते) की मंच पर तब एंट्री नंगी तलवारों और चमचमाते त्रिशूल लहराते युवकों की टोली के साथ होती थी। (मन समझाने को मान लें) केंद्र में छप्पन इंची सीने के साथ हिंदू हित की बात करने वाली सरकार तो है लेकिन चार दशक पहले तक फायरब्रांड के रूप में पहचाने जाने वाले राम मंदिर आंदोलन और विहिप-बजरंग दल के ब्रांड धर्मोपदेशक अब या तो परिदृश्य से ग़ायब हैं या नए सिरे से पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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आज की पीढ़ी को तो आचार्य धर्मेंद्र का नाम भी पता नहीं होगा, इसी तरह साध्वी ऋतंभरा, सुश्री उमाभारती का वह दौर भी पता नहीं होगा जब सादी वर्दी में ख़ुफ़िया एजेंसियों का स्टॉफ इनकी हर गतिविधि की टोह लेता रहता था।
कभी विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष रहे प्रवीण तोगड़िया विहिप-संघ-सहित तमाम आनुषंगिक संगठनों से बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद पहली बार उस इंदौर में आए जो हाल ही में विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित वीएस कोकजे की कर्मस्थली भी है।शायद यही वजह रही कि राम मंदिर मामले में कोकजे से अपेक्षा जैसे सवालों को वे अनसुना करते रहे। उनकी बॉडी लैंग्वेज, बातचीत और ख़ासकर मोदी, विहिप, अड़ानी-अंबानी वाले सवालों पर नपे तुले शब्दों में पीछा छुड़ाने वाले जवाब से लगा कि कभी फायरब्रांड रहे प्रवीण भाई की वह आग (फायर) अब बर्फ़ होती जा रही है और ब्रांड के तौर पर तोगड़िया नाम ही बचा है।

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अब इस हिंदूवादी नेता में खुद को किसान हित रक्षक बताने की छटपटाहट भी देखी जा सकती है। बीते चार दशक में उनकी छवि कट्टर हिंदू वादी नेता की रही है लेकिन वे यह सिद्ध करना चाहते हैं कि तब भी किसानों के मुद्दे पर विहिप-संघ में मुखर रहे, यही नहीं प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भी लिखे हैं। तमाम विवादित या यूँ कहे उलझाने वाले प्रश्नों का उनके पास एक ही जवाब था 24 जून को दिल्ली में नए संगठन की घोषणा करने वाला हूँ, तब आपको सारे प्रश्नों के जवाब मिल जाएँगे।

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इस बार के प्रवीण तोगड़िया की बातचीत और किसानों के प्रति रह रह कर उमड़ता प्रेम यह भी आभास करा रहा था कि देश के लिए राम मंदिर जैसे अब आक्रामक मुद्दा नहीं रहा है तो तोगड़िया को भी अपना ब्रांड किसान हिमायती के रूप में स्थापित करना ज्यादा ज़रूरी लग रहा है।जैसे स्टेशन पर चाय बेचने की मोदी की कहानी ने देश को उनके प्रति आकर्षित किया ऐसे ही राष्ट्रीय किसान परिषद के पर्चे में ‘किसान पुत्र : डॉ प्रवीण तोगड़िया’ की कहानी पढ़कर किसानों को अपने इस हितैषी के संबंध में पहली बार पता चलेगा कि सौराष्ट्र के छोटे से गाँव में ग़रीब किसान के घर जन्मे प्रवीण अपनी माँ के साथ छोटी सी खेती के काम में लगे रहते थे…८-९ वर्ष की उम्र में बड़ी बहन के साथ कपास से अपने हाथ से बनाए सूत की गठिया लेकर बस का एक रुपया किराया बचाने के लिए 10किमी पैदल चलकर जाते थे। कैसे मुफ़लिसी में बचपन बीता, माँ से शिक्षा मिली कि यह खेती हमारी माँ है, कैसे मेडिकल की पढ़ाई पूरी की और ख्यात कैंसर सर्जन के रूप में 16 हजार से अधिक यशस्वी शल्यक्रिया की।
बीते चार पाँच दशक में विहिप-संघ आदि में सक्रियता के चलते तोगड़िया को अपने विषय में इतना सब मीडिया को भी बताने की फ़ुरसत ही नहीं मिली कि वे किसान की पीड़ा इसलिए बेहतर समझते हैं कि खुद भी किसान पुत्र हैं। अब जब आरोपों की अंगार वर्षा के साथ मोदी से पंगा ले बैठे, विहिप ने पहली बार चुनाव पद्धति से वीएस कोकजे को आसंदी पर बैठा दिया और तोगड़िया फ़ुरसत में हो गए तब उन्हें अपनी इस किसान काया और उससे जुड़े मार्मिक क़िस्से बताने के लिए राष्ट्रीय किसान परिषद के रास्ते पर चलना पड़ा है। वे साफ़ कहते हैं कि ये कोई आरएसएस से अंडर हैंड डिलिंग या नूरा कुश्ती नहीं है।मैं स्वतंत्र हूँ, 24 जून का इंतज़ार कीजिए, दिल्ली में हिंदुत्व का नया अभियान, नई संस्था से शुरू करूँगा, गत 50 सालों से हिन्दू हित का जो काम कर रहा था उसे और गति देने जा रहा हूँ।
अमित शाह की तरह आप भी बड़े लोगों जैसे बाबा रामदेव, अन्ना हज़ारे से मेल मुलाक़ात को जाएँगे? मैं साधु संतों के पास जाऊँगा रामदेव जी साधु कहाँ हैं? यशवंत और शत्रुघ्न सिंहा साथ आएँगे? 24 जून का इंतज़ार कीजिए। नागपुर में संघ ने प्रणव मुखर्जी को आमंत्रित किया, आप को कैसा लगा? प्रणव दा ने गांधी और नेहरू की विचारधारा का जिक्र किया, हम सावरकर हेडगेवार को मानने वाले हैं। भाजपा को प्रणव मुखर्जी प्रिय हैं, प्रवीण तोगड़िया नहीं, इसलिए नया संगठन बनाना पड़ रहा है।इन चार वर्षों में अच्छे दिन आए हैं क्या? बिल्कुल नहीं, फिर किसके आए, माल्या जैसों के। माल्या को 8 लाख करोड़ ले के भागने देते हैं और किसानों को बिजली महँगी मिलती है,खम्बों के लिए 60 हज़ार रुपये लेते हैं। यहां के मुख्यमंत्री खुद को किसान कहते हैं तो किसानों का दर्द भी समझें, खम्बों के नाम पर जो राशि ली जाती है उसे समाप्त करें।देश में किसानों पर 12लाख करोड़ का कर्ज है उसे भी माफ़ करे सरकार।

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आप को पता नहीं है, आज से नहीं मैं एक दशक से ज्यादा समय तक संगठन में रहकर किसानों के विषय उठाता रहा हूँ।विहिप में रहते हुए भी मंदसौर घटना का विरोध किया था। प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर किसानों के हित की मांग की थी।इन्हीं किसानों की मांग को लेकर आया हूँ । देश भर में 3 लाख से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है। जो अन्न उगाता है, जिसे दुनिया खाती है देश में वो ही अन्नदाता दुखी है तो देश खुश नहीं हो सकता।2014 के चुनाव में बीजेपी ने वादा किया था कि सरकार बनते ही स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू करेंगे, भाजपा अपना वचन पूरा करे।किसानों को लागत से डेढ़ गुना मूल्य सी-2 की पद्धति से मिले।हिंदुस्तान में सिर्फ 6 प्रतिशत किसानों को डेढ़ गुना से मूल्य मिला है।फ़सल बीमा योजना तो कंपनियों की कमाई का साधन बन कर रह गई है।

अशोक सिंघल के लिए इमेज परिणाम

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अमेरिका में 90 प्रतिशत को, चीन में 70 प्रतिशत को और भारत मे 8 प्रतिशत किसानों को फ़सल बीमा योजना का लाभ मिलता है।विहिप ने जो शिला पूजन और मंदिर निर्माण के लिए वर्षों चंदा किया उसका हिसाब माँगेंगे? चंदा जुटाने वाले अशोक सिंघल, मैं और डालमिया जी तीन लोग थे, सारा पैसा सुरक्षित है। कितना पैसा है, साढ़े आठ करोड़। हम राम मंदिर और किसान की क़र्ज़ मुक्ति दोनों मुद्दों पर लड़ेंगे।सरकार संसद में राम मंदिर के लिए क़ानून बनाए, कोर्ट में मामला लंबित होने की बात कहने वाली सरकार यह बताए कि जब कोर्ट की ही बात मानना है तो आडवाणीजी ने रथ यात्रा क्यों निकाली।

कीर्ति राणा

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