तालाबों की सुरक्षा के लिए फेन्सिंग, वृक्षारोपण आदि कार्य कराए जाएंगे -आकाश त्रिपाठी

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इंदौर: संभागायुक्त श्री आकाश त्रिपाठी ने इंदौर तथा इसके आसपास के क्षेत्र में स्थित सभी तालाबों के सीमांकन के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सीमांकन का कार्य एक माह में पूरा हो जाये। सीमांकन के पश्चात मुनारे (सीमांकन चिन्ह) लगाये जायें। तालाबों की सुरक्षा के लिये वहां फेन्सिंग की जाये। तालाब के आसपास वृक्षारोपण तथा उसकी छोटी-मोटी रिपेयरिंग के कार्य भी कराये जायें। गत दिनों तालाबों की चैनल की साफ-सफाई, खुदाई तथा अवरोध हटाने के अच्छे परिणाम भी सामने आये हैं। जिन तालाबों में उक्त कार्य कराये गये, उनमें पर्याप्त पानी भर गया है।

संभागायुक्त श्री त्रिपाठी ने आज तालाबों से जुड़े अधिकारियों और नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन आदि के अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में बताया गया कि इंदौर तथा इसके आसपास कुल 22 तालाब हैं। इसके अलावा मास्टर प्लान सीमा में कुल 15 रिसाव क्षेत्र चिन्हित हैं। संभागायुक्त श्री त्रिपाठी ने इन सभी के राजस्व तथा अन्य रिकार्ड एकत्रित करने के निर्देश दिये। उन्होंने शासकीय रिकार्ड से मिलान करने तथा तालाबों और राजस्व क्षेत्रों का व्यापक सर्वे तथा सीमांकन करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सीमांकन के पश्चात खसरे में उसकी इन्ट्री भी की जाये। तालाबों का दस्तावेजीकरण किया जाये। तालाबों के सीमांकन के पश्चात सीमा चिन्ह, मुनारे भी मानक के अनुसार लगाये जायें। तालाबों की सुरक्षा के लिये फेन्सिंग और वृक्षारोपण का कार्य कराया जाये।

इंदौर शहर में यह कार्य नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत द्वारा कराने के निर्देश दिये। उन्होंने जनभागीदारी लेने की बात भी कही। सीमांकन के पश्चात सीमांकित क्षेत्र की जियो फेन्सिंग भी की जायेगी। बैठक में बताया गया कि इंदौर में बनेड़िया सबसे बड़ा तालाब है। इस तालाब में वर्तमान में जल संसाधन विभाग द्वारा कृषि कार्य के लिये किसानों को पट्टे दिये जा रहे हैं। संभागायुक्त श्री त्रिपाठी ने कहा कि उन्हें सूचना मिली है कि तालाब की भूमि कृषि कार्य के लिये पट्टे पर देने से तालाब के मूल स्वरूप, उसकी जल क्षमता तथा सुरक्षा प्रभावित हो रही है। संभागायुक्त श्री त्रिपाठी ने इसके मद्देनजर पट्टे देने के कार्य पर रोक लगाये जाने के संबंध में निर्देश दिये। उन्होंने राऊ तालाब को नगर परिषद राऊ को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव तैयार करने के संबंध में भी निर्देश दिये। यह तालाब अभी जल संसाधन विभाग के आधिपत्य में है।

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