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किसान पुत्र अशोक जायसवाल 36 देशों को एक्सपोर्ट कर रहे हैं मशीनें

Posted on: 05 May 2018 08:10 by Praveen Rathore
किसान पुत्र अशोक जायसवाल 36 देशों को एक्सपोर्ट कर रहे हैं मशीनें

व्यक्ति अगर ठान लें तो कुछ भी असंभव नहीं है, यह साबित किया है इंदौर के जाने-माने उद्योगपति अशोक जायसवाल ने। इनके पिताजी सांवेर के गांव टोड़ी में खेती करते थे। माताजी के कहने पर 1952 में इंदौर आ गए। एमएससी में टॉप 3 आने के बाद आपने कागज बनाने वाली नेपा मिल्स में दो साल नौकरी की। इसके बाद हुकुमचंद मिल में कुछ साल नौकरी की। नौकरी में संतुष्ट नहीं होने और अपना बिजनेस करने की ठानी और नौकरी छोडक़र हार्डकोम इलेक्ट्रो प्लेटिंग (इंडस्ट्री में लगने वाली डाई पर पॉलिशिंग करने) से बिजनेस की शुरुआत की, आज ड्रिप एरिगेशन की मशीनें 36 देशों में एक्सपोर्ट कर रहे हैं। घमासान डॉटकॉम से उन्होंने अपनी कहानी साझा की….IMG-20180505-WA0002

सवाल : आपके करियर की शुरुआत कब और कहां से हुई?
जवाब : करियर की शुरुआत १९८१ से इंदौर से हुई। १९७८ से एजुकेशन होलकर साइंस से पूरा किया। उसके बाद नेपा मिल लि. में मैंने दो साल नौकरी की। पूरी जिंदगी इस फील्ड में गुजारना मुझे गंवारा नहीं था। मैंने हुकुमचंद मिल में 1981 में अप्लाय किया। यहां मेरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट डिपार्टमेंट में नियुक्ति हुई। यहां से मैंने 1981 में रिजाइन किया और स्वयं का हार्ड कोम इलेक्ट्रो प्लेटिंग (डाईयों पर पॉलिशिंग) का कारोबार शुरू किया। उस समय इंदौर में प्लास्टिक इंडस्ट्रीज ग्रो होने की शुरुआत थी। उन दिनों कास्ता पाइप और पूजा पाइप के प्लांट यहां डले और उन्हें इलेक्ट्रो प्लेटिंग की जरूरत पड़ी। इसी से मेरा पहली बार प्लास्टिक इंडस्ट्रीज से साक्षात्कार हुआ। इसके बाद कारोबार का विस्तार करते हुए 1988 में मैंने सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र सेक्टर ए में म.प्र. वित्त निगम की सहायता से सांई मशीनरी टूल्स एंड मशीनरी की स्थापना की। आज हम प्लास्टिक पाइप निर्माण की मशीनें बना रहे हैं। मौजूदा समय में न सिर्फ देश बल्कि दुनिया के 36 देशों में मशीनें एक्सपोर्ट कर रहे हैं।

सवाल : आगे की विस्तार योजना क्या है?
जवाब : 31 दिसंबर 2017 को सांई टूल्स एंड मशीनरी का टर्न ओवर 40 करोड़ रुपए था। अब हम कारोबार विस्तार करने के साथ ही अगले दो साल में टर्न ओवर सौ करोड़ करने का लक्ष्य लेकर काम कर रहे हैं।

सवाल : अभी आप क्या बना रहे है?
जवाब : अभी हम ड्रिप एरिगेशन (बूंद-बूंद सिंचाई योजना) के पाइप बनाने की मशीनें बनाने पर ही फोकस कर रहे हैं। इन मशीनों की काफी अच्छी डिमांड आ रही है। अभी तक ये मशीनें आयात की जाती थी, अब इसका आयात भी नगण्य रह गया है। हम अभी ये मशीन 36 देशों में निर्यात कर रहे हैं।

सवाल : आपकी पारीवारिक पृष्ठभूमि क्या रही, आपकी शिक्षा कहां हुई?
जवाब : मेरे पिताजी बद्रीप्रसादजी जायसवाल सांवेर तहसील के ग्राम टोड़ी में खेती-किसानी करते थे। थोड़े समय बाद माताजी के कहने पर 1952 में हम इंदौर में शिफ्ट हो गए। यहां छत्रीबाग में रहते हुए माताजी ने घर पर ही एक किराना की दुकान और आटा चक्की डाली। मेरी प्रांरभिक शिक्षा लोधीपुरा के सरकारी स्कूल और माध्यमिक शिक्षा राजमोहल्ला स्थित सरकारी स्कूल में हुई जबकि उच्च शिक्षा होलकर साइंस कॉलेज से पूरी की। मैंने 1972 में एमएससी डीएवीवी की प्रावीण्य सूची में तीसरा स्थान प्राप्त किया। केंद्र सरकारी की सीएसआईआर के लिए भी मेरा चयन हुआ। दो लडक़े हैं, जो मेरे साथ ही कंपनी के डायरेक्टर हैं। एक लडक़ी है, जो डॉक्टर है।

सवाल : आपको अवॉर्ड भी मिले है?
जवाब : राज्य शासन ने सांई टूल्स एंड मशीनरी को एमएसएमई सेक्टर के लिए 2009-10 में राज्य स्तरीय पुरस्कार तत्कालीन उद्योगमंत्री कैलाश विजयवर्गीय के हाथों दिया गया। इसके बाद इसी साल महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने भी मुझे अवॉर्ड देकर सम्मानित किया।

सवाल : आप किन-किन संस्थाओं से जुड़े हैं?
जवाब : सन 2005 में एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज म.प्र. (एआईएमपी) में दो साल सचिव रहा, इसके बाद दो साल लगातार अध्यक्ष रहा। इस दौरान राज्य उद्योगों की कई समस्याएं उठाईं। इसके अलावा सामाजिक संगठनों से भी जुड़ा हूं।

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