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ऐसा परिवार जहां सभी बच्चे है IAS-IPS, A family where all children are IAS-IPS

Posted on: 08 Mar 2019 16:44 by Surbhi Bhawsar
ऐसा परिवार जहां सभी बच्चे है IAS-IPS, A family where all children are IAS-IPS

आज के समय में अच्छी नौकरी करना हर किसी का सपना है। हर कोई चाहता है कि उसके पास खूब पैसा और संसाधन हो। ऐसे में पढ़ाई पूरी करने के बाद भी अच्छी नौकरी नहीं मिलना किसी अभिशाप से कम नहीं है। खासकर तो उन लोगों के लिए जिन्होंने पढ़ाई के लिए कठिन परिस्थियों का सामना किया हो। आज हम आपको ऐसे ही एक परिवार की कहानी से रूबरू कराने जा रहे है जिन्होंने गरीबी से लड़कर, कठिन से कठिन परिस्थियों का सामना कर अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी।

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चारों बच्चे है IAS-IPS

प्रतापगढ़ के लालगंज तहसील के रहने वाले अनिल मिश्रा के चार बच्चे है और आज चारों आईएएस और आईपीएस की पोस्ट पर तैनात है। अनिल मिश्रा का हमेशा से सपना था कि उनके चारों बच्चे अपनी ज़िन्दगी में बड़ी से बड़ी सफलता हासिल कर उनका नाम रौशन करें। यही कारण है कि अनिल मिश्रा कभी किसी भी परिस्थिति के आगे झुके नहीं और आज उनके चरों बच्चे अपने पैरों पर खड़े है।

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यहां तैनात है चरों भाई-बहन

अनिल मिश्रा के चार बच्चे योगेश मिश्रा, क्षमा मिश्रा, माधवी मिश्रा और लोकेश मिश्रा है। इन चारों में से सबसे बड़े बेटे योगेश मिश्रा ने बताया कि वह आईएएस है और इस समय कोलकाता में राष्ट्रीय तोप एवं गोला निर्माण में प्रशासनिक अधिकारी हैं। दूसरे नंबर पर बेटी क्षमा आईपीएस है और वह कर्नाटक में पोस्टेड है। तीसरे नंबर पर बेटी माधवी मिश्रा झारखंड कैडर की आईएएस है और इस समय केंद्र के विशेष प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में तैनात हैं। चौथे नंबर पर है बेटे लोकेश मिश्रा भी आईएएस है वह इस समय बिहार के चंपारण जिले में ट्रेनिंग कर रहे हैं।

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पहले सॉफ्टवेर इंजीनियर थे योगेश

योगेश मिश्रा ने बताया कि आईएएस बनने से पहले वह सॉफ्टवेर इंजीनियर थे। उस समय वह नोएडा में काम करते थे और उनकी दोनों बहने क्षमा और माधवी दिल्ली में ही प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रही थीं। उन दोनों का जब रिजल्ट आया तो दोनों फेल हो गई। जिस दिन रिजल्ट आया उसके एक दिन बाद रक्षाबंधन था। योगेश रक्षाबंधन पर दोनों बहनों से राखी बंधवाने गए और दोनों का हौसला बढाया। योगेश ने बताया कि उन्होंने उसी दिन ठान लिया था कि पहले वह खुद आईएएस बनेंगे और अपने छोटे भाई-बहनों को प्रेरणा देंगे। इसके बाद उन्होंने इसकी तैयारियां शुरू कर दी और पहले ही प्रयास में सफल हो गए। आईएएस बनने के बाद उन्होंने अपने भाई-बहनों का मार्गदर्शन किया।

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