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एग्जिट पोल: बढ़ा दी और बेचैनी

Posted on: 08 Dec 2018 12:20 by Surbhi Bhawsar
एग्जिट पोल: बढ़ा दी और बेचैनी

मुकेश तिवारी

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मध्यप्रदेश के इतिहास में संभवत यह पहला मौका है जब विधानसभा चुनाव का परिणाम जानने के लिए राजनेताओं में ही नहीं आम लोगों में भी बेहद उत्सुकता और बेचैनी देखी जा रही है। चुनाव प्रचार के दौरान यह सवाल खूब गूंजा कि अबकी बार कौन सरकार? जब मतदान की बेला आई तो मतदाता ने ऐसा उत्साह दिखाया कि सवाल उठा इतना मतदान कितना और किसके साथ? शुक्रवार की शाम अनेक चैनल और एजेंसी एग्जिट पोल लेकर हाजिर हुए तो बेचैनी व उत्सुकता और बढ़ा गए। प्रश्न आने लगे क्या 11 दिसंबर को मध्यप्रदेश यही रिजल्ट देने जा रहा है?

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मैंने चुनाव के दौरान और मतदान के बाद कई वरिष्ठ पत्रकार साथियों से चर्चा की थी। सवाल यही था कि इस बार मध्यप्रदेश के चुनाव परिणामों को लेकर इतनी उत्सुकता, बेचैनी और असमंजस क्यों है? जवाब यह मिला था कि जब-जब मुकाबला कड़ा होता है और ऐसा दिखता है कि कुछ सीटों के परिणामों के बारे में तय तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता तब ऐसी स्थिति बनती है। सबने एक स्वर से यह कहा था कि 15 साल में पहली बार कांग्रेस मध्यप्रदेश में बहुत अच्छी तरह से चुनाव लड़ रही है और इसका असर रिजल्ट पर जरूर दिखेगा। रिजल्ट तो आने में अभी 3 दिन बाकी है हां एग्जिट पोल के जो नतीजे कल आए हैं वह इन वरिष्ठ पत्रकार साथियों की बात पर मुहर लगाते दिख रहे हैं। किसी भी एग्जिट पोल में भाजपा ना तो पिछले तीन चुनाव के अपने प्रदर्शन के आसपास दिख रही है ना ही वह अपने गढ़ माने जाने वाले इलाकों से पहले की तरह भरपूर वोट और सीट ला रही है। कुछ एग्जिट पोल के नतीजे 200 पार क्या उसका 100 का आंकड़ा पार करना भी मुश्किल बता रहे हैं तो कुछ एग्जिट पोल बेहद साधारण बहुमत से उसकी सरकार चौथी बार आती दिखा रहे हैं। कांग्रेस का चुनाव प्रचार के दौरान जो कॉन्फिडेंस दिखा था कई एग्जिट पोल उसे एकदम सही बताते हुए यह कह रहे हैं कि 15 साल बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस का राज आने वाला है। वहीं कुछेक का यह भी मानना है कि गुजरात की तरह ही कांग्रेस बहुत अच्छी टक्कर देने के बाद भी सत्ता से कुछ कदम दूर रह सकती है। ऐसे में अगर सारे एग्जिट पोल के नतीजे लेकर आप किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचने की कोशिश करेंगे ना तो एक वरिष्ठ पत्रकार की भाषा में और ज्यादा कन्फ्यूज्ड हो जाएंगे। एक बात साफ है कि अगर हम इन एग्जिट पोल को ही 11 दिसंबर को आने वाले चुनाव परिणाम के रूप में देखने की कोशिश करते हैं। मतलब हम यह माने इसी तरह का परिणाम आ रहा है तो यह भारतीय जनता पार्टी की बड़ी हार है भले ही वह सरकार से बाहर हो जाए या साधारण बहुमत से सत्ता में आ जाए। कांग्रेस की यह हर हाल में जीत मानी जाएगी चाहे वह पूर्ण बहुमत से सरकार में आए या 57 सीट के अपने आंकड़े को 100 के पार ले जाए। बस हर समझदार व्यक्ति यही चाहेगा कि मध्यप्रदेश की जनता कुछ ऐसा फैसला सुनाए कि त्रिशंकु विधानसभा की नौबत ना आए। विधायकों की बोली ना लगे और विधायकों को अपने साथ बनाए रखने के लिए किसी पर्यटन स्थल की होटल या रिसोर्ट में घेरकर किसी राजनीतिक दल को ना रखना पड़े। चलते-चलते यही कहूंगा कि मालवा-निमाड़ हमेशा से मध्यप्रदेश की सत्ता की चाबी अपने हाथ रखता आया है और इस बार भी ताला शायद यहीं की चाबी से खुलने वाला है। किसके लिए खुलता है यह जानने के लिए 11 दिसंबर दोपहर के बाद तक इंतजार करना पड़ेगा।

लेखक Ghamasan.com के संपादक हैं।

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