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INSIDE STORY: चार्टेड फ्लाइट, मोबाइल ऐप और बीजेपी की बड़ी गलती, कर्नाटक ऐसे आया कांग्रेस के ‘हाथ’

Posted on: 21 May 2018 05:46 by Surbhi Bhawsar
INSIDE STORY: चार्टेड फ्लाइट, मोबाइल ऐप और बीजेपी की  बड़ी गलती, कर्नाटक ऐसे आया कांग्रेस के ‘हाथ’

कर्नाटक: कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस ने कैसे अपने विधायकों को बचाया और कैसे सरकार बनाने में कामयाबी पाई। देखिए घमासान डॉट कॉम की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट-

तारीख 14 मई, जगह 12 तुगलक लेन यानी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का ऑफिशियल एड्रेस, वक्त सुबह के 10:00 बजे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुलाम नबी आजाद, पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल, वीरप्पा मोइली और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ एक बैठक की, जिसमें कर्नाटक चुनाव की तमाम संभावित परिस्थितियों पर चर्चा हुई।

नतीजो से पहले ही तय हो गई थी कांग्रेस की रणनीति-
14 तारीख को ही कांग्रेस यह तय कर चुकी थी कि यदि उसे बहुमत नहीं मिलता है और बीजेपी बहुमत के करीब पहुंच जाती है तो वह बिना शर्त जेडीएस को समर्थन देगी। इतना ही नहीं 14 तारीख को ही यह मैसेज कुमार स्वामी तक पहुंचा दिया गया था। दरअसल कांग्रेस दूध की जली थी।Image result for कर्नाटक ऐसे आया कांग्रेस के 'हाथ'गोवा में सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी सरकार बनाने में नाकाम रही थी। जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहते थे। इस बैठक में यह भी तय हो गया था कि यदि सबसे बड़े दल वर्सेस सबसे बड़े गठबंधन की बात आती है तो किस तरह से सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटाए जाएंगे।Image result for supreme court of indiaइसके तुरंत बाद मल्लिकार्जुन खड़गे, गुलाम नबी आजाद और वीरप्पा मोइली को कर्नाटक के लिए रवाना कर दिया गया। 15 मई को जैसे ही नतीजे आने शुरू हुए एक बार तो कांग्रेस नेताओं का दिल जैसे बैठ ही गया था। लगा कि कर्नाटक उसके हाथ से निकल गया। Image result for मल्लिकार्जुन खड़गे गुलाम नबी आजादलेकिन दिन चढ़ने के साथ ही बीजेपी को शुरुआती रुझानों में मिल रही बढ़त कम होती गई और शाम होते होते यह तय हो गया कि बीजेपी सिंगल लार्जेस्ट पार्टी तो होगी लेकिन बहुमत से दूर ही रहेगी। इसके तुरंत बाद कांग्रेस ने अपनी रणनीति को अंजाम देना शुरू कर दिया। कांग्रेस में सबसे पहले हर 10 विधायकों पर अपने एक बड़े और भरोसेमंद नेता को बैठा दिया। इन नेताओं को जिम्मेदारी दी गई कि किसी भी हालत में कांग्रेस के विधायक संपर्क से बाहर ना हो और सभी विधायकों को अपने अपने प्रमाण पत्र के साथ तुरंत बेंगलुरु पहुंचने के आदेश जारी कर दिए गए, वही बेंगलुरु का एक्शन तो जारी ही था, बड़ा एक्शन दिल्ली में प्लान किया जा रहा था।

Related imageसबसे बड़ी चुनौती थी कि कांग्रेस की लीगल टीम को हेड करने वाले अभिषेक मनु सिंघवी को दिल्ली लाने की। 15 तारीख को अभिषेक मनु सिंघवी चंडीगढ़ में थे। तमाम कोशिशें की गई कि वह रेगुलर फ्लाइट या फिर ट्रेन से दिल्ली पहुंच जाएं। लेकिन शाम को अगर ट्रेन से अभिषेक मनु सिंघवी दिल्ली के लिए रवाना होते, तो उनके पहुंचते-पहुंचते रात हो जाती। लेकिन कांग्रेस इस बार मात खाने के मूड में बिल्कुल नहीं थी। तुरंत ही अभिषेक मनु सिंघवी के लिए एक चार्टेड फ्लाइट की व्यवस्था की गई और ठीक शाम 6:00 बजे अभिषेक मनु सिंघवी दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड कर चुके थे।Related imageइसके तुरंत बाद अभिषेक मनु सिंघवी, पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल और कांग्रेस के अन्य बड़े वकीलों की बैठक हुई, जिसमें यह तय किया गया कि सुप्रीम कोर्ट जाना ही होगा। साथ ही एक ड्राफ्ट भी बना लिया गया। इस ड्राफ्ट का मजमून यह था कि कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला ने संविधान का उल्लंघन किया है और सुप्रीम कोर्ट में इसी की शिकायत की जानी थी। यह ड्राफ्ट बनाने के बाद कपिल सिब्बल और चिदंबरम कांग्रेस के हेड क्वार्टर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए निकल गए और अभिषेक मनु सिंघवी इस लीगल बैटल को लड़ने के लिए अपनी तैयारी में जुट गए।Image result for अभिषेक मनु सिंघवीरातों-रात सुप्रीम कोर्ट जाने का मिला मौका-
हालांकि इस स्टोरी में और भी पेच आने बाकी थे। दरअसल BJP और यदि बीजेपी और येदियुरप्पा की जल्दबाजी में कांग्रेस को बैठे-बिठाए रात में ही सुप्रीम कोर्ट जाने का मौका दे दिया। दरअसल वजुभाई वाला ने BJP के सरकार बनाने के दावे को स्वीकार कर लिया और हाथों-हाथ येदियुरप्पा को सुबह 9:00 बजे शपथ ग्रहण का न्योता दे दिया और इसी को आधार बनाकर कांग्रेस रात में ही सुप्रीम कोर्ट खुलवाने में कामयाब हो गई। इस बीच बेंगलुरु में डी शिवकुमार और उनकी टीम 1-1 कांग्रेस विधायक को पूरे कर्नाटक से बटोर कर बेंगलुरु लाने में कामयाब रही।Image result for प्रोटेम स्पीकर पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेसविधायकों के मोबाइल में कॉल रिकॉर्डर-
इतना ही नहीं कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों के मोबाइल फोन में कॉल रिकॉर्ड करने वाला ऐप डाउनलोड करवा दिया। ताकि BJP की तरफ से जितने भी प्रलोभन है उन सबको रिकॉर्ड किया जा सके। रात होते-होते सुप्रीम कोर्ट ने येदियुरप्पा की शपथ ग्रहण पर रोक लगाने से इंकार कर दिया। लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि बीजेपी को जल्द ही अपना बहुमत साबित करना होगा और यहीं से कांग्रेस को कर्नाटक में आशा की किरण नजर आने लगी।Image result for कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों के मोबाइल फोनप्रोटेम स्पीकर पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस-
जब बात प्रोटेम स्पीकर की आई दोबारा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। दरअसल कांग्रेस यहां पर विक्टिम कार्ड खेलना चाहती थी, कांग्रेस की यह रणनीति भी कामयाब रही और मीडिया और पूरे देश की नजरों में कांग्रेस यह बता पाई कि येदियुरप्पा को शपथ ग्रहण करवाना अनैतिक है। इसके बाद शुरू हुई असली लड़ाई और बीजेपी के बड़े नेताओं ने कांग्रेस और जेडीएस की विधायकों को तोड़ने की भरपूर कोशिश की। लेकिन कांग्रेस अपने सारे विधायकों को एकजुट रखने में कामयाब रही। Image result for प्रोटेम स्पीकर पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस

कुल मिलाकर बीजेपी की येदियुरप्पा को शपथ दिलाने की जल्दबाजी ने कांग्रेस को बैठे-बिठाए बड़ा मसला दे दिया और कानूनी लड़ाई में बीजेपी पिछड़ गई।

घमासान डॉट कॉम के संपादक आलोक वाणी की टिप्पणी

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